मंदाना करीमी नहीं जाएंगी ईरान, बताया- मैं भारत से नाराज हूं, मुझे कभी कोई सपोर्ट नहीं मिला
मंदाना करीमी ने एक बार फिर से सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी बातों को गलत तरह से पेश किया गया है। वह ईरान नहीं जाएंगी क्योंकि वहां 10 साल से बैन हैं। भारत छोड़ेंगी क्योंकि यहां कभी सपोर्ट नहीं मिला।
मुंबई। ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत का जश्न मनाने वाली ईरानी एक्ट्रेस मंदाना करीमी इस वक्त सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हालांकि अब एक्ट्रेस का कहना है कि उनकी बातों को सोशल मीडिया पर तोड़-मरोड़ के पेश किया जा रहा है और ईरान की असली कहानी दुनिया को बताने की बजाय उनके बयानों को सनसनीखेज तरीके से पेश किया जा रहा है।
ईरानी एक्ट्रेस मंदाना करीमी ने अब इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट किया है और सोशल मीडिया पर उनके विरोध में फैली बातों को लेकर सफाई दी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि आने वाले समय में वह भारत में रहेंगी भी या नहीं। वीडियो के जरिए एक्ट्रेस ने बताया कि उनके भारत छोड़ने की चर्चा हो रही है और लोगों को लग रहा है कि वह वापस ईरान जाने वाली हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने बताया कि ईरान में वह बीते 10 साल से बैन हैं और वह भारत जरूर छोड़ेंगी, लेकिन वापस ईरान जाने के लिए नहीं। 'मैं भारत से नाराज हूं क्योंकि पिछले कुछ महीनों से मुझे भारत में कोई सपोर्ट नहीं मिला। मैं ईरानियों की आवाज को बुलंद करने के लिए मीडिया से बात कर रही हूं। '
भारत पर धोखा देने के आरोप पर एक्ट्रेस का कहना है कि पिछले कई महीनों से उन्हें भारत की तरफ से किसी तरह का कोई सपोर्ट नहीं मिला है और सुरक्षा कारणों की वजह से वो बीते 2 महीने से एक ही जगह पर फंसी हैं और अपने करीबी दोस्तों से दूर हैं। उन्होंने बताया कि उनके इवेंट्स भी कैंसिल हो चुके हैं। इतना ही नहीं, एक्ट्रेस ने पोस्ट में रजा शाह पहलवी को याद किया।
करीमी ने कहा कि जरूरी बात यह है कि उन ईरानियों की आवाज सुनी जाए जो स्वतंत्रता के लिए सब कुछ दांव पर लगा रहे हैं। मैं ईरान और अपने लोगों के बारे में बोलने से कभी पीछे नहीं हटूंगी। न आज, न कल, न कभी।
उन्होंने कहा, 'बातचीत मेरे लोगों के बारे में होनी चाहिए, उनकी परेशानियों के बारे में, ईरान के भविष्य के बारे में, और हमारे नेता रजा शाह पहलवी के बारे में, जिन्हें कई ईरानी इस शासन के पतन के बाद अपने देश के पुनर्निर्माण की उम्मीद के प्रतीक के रूप में देखते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस्लामी गणराज्य की सच्चाई क्या है और इस शासन का अंत क्यों होना चाहिए। जरूरी बात यह है कि उन ईरानियों की आवाज सुनी जाए जो स्वतंत्रता के लिए सब कुछ दांव पर लगा रहे हैं। मैं ईरान और अपने लोगों के बारे में बोलने से कभी पीछे नहीं हटूंगी। न आज, न कल, न कभी।'