स्वतंत्रता दिवस पर दयालबाग से राष्ट्र-निर्माण का संदेश, अनुशासन, सेवा और स्वावलंबन को जीवन में उतारने का आह्वान

आगरा। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राधास्वामी सतसंग सभा, दयालबाग की ओर से देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्र-निर्माण में नागरिकों की भूमिका, अनुशासन, कठिन परिश्रम, सामाजिक उत्तरदायित्व और निःस्वार्थ सेवा को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया गया। राधास्वामी सतसंग सभा के अध्यक्ष गुर सरूप सूद और सचिव प्रेम दास सतसंगी ने अपने-अपने संदेशों में स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का स्मरण करते हुए युवा पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति कर्तव्य और जिम्मेदारी की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। दोनों ने दयालबाग में शिक्षा, श्रम, सेवा, स्वावलंबन और पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से विकसित किए जा रहे मूल्य-आधारित जीवन पर भी प्रकाश डाला।

Aug 15, 2026 - 13:24
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स्वतंत्रता दिवस पर दयालबाग से राष्ट्र-निर्माण का संदेश, अनुशासन, सेवा और स्वावलंबन को जीवन में उतारने का आह्वान
गुर सरूप सूद-प्रेमदास सतसंगी

स्वतंत्रता सेनानियों के मूल्यों को जीवन में उतारना जरूरी : गुर सरूप सूद

राधास्वामी सतसंग सभा के अध्यक्ष प्रे.भा. गुर सरूप सूद ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस उन असंख्य बलिदानों का स्मरण कराता है, जो स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को आजाद कराने के लिए दिए। उन्हीं के त्याग और संघर्ष के कारण देशवासियों को स्वतंत्र भारत में जीवन जीने और राष्ट्र-निर्माण में योगदान देने का अवसर मिला है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके द्वारा संजोए गए अनुशासन, कठिन परिश्रम और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों को जीवन में आत्मसात किया जाए। राष्ट्र की प्रगति केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के निर्वहन से संभव है।

गुर सरूप सूद ने कहा कि दयालबाग समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े, सबसे कम अवसर प्राप्त, सबसे निचले पायदान पर स्थित तथा भटके हुए लोगों को मूल्य-आधारित, कार्योन्मुखी एवं बहुविषयक शिक्षा निरंतर प्रदान करता आ रहा है। इसके साथ ही निःस्वार्थ सेवा, स्वावलंबन और पर्यावरण संरक्षण जैसे मूल्यों को भी प्रोत्साहित किया जाता है।

उन्होंने कहा कि दयालबाग प्रत्येक व्यक्ति में समाज और व्यापक रूप से राष्ट्र के प्रति कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व की भावना विकसित करता है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी को आत्मविश्वास, अनुशासन और निःस्वार्थ सेवा की भावना के साथ राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने इस वर्ष राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने का स्मरण करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ ने देशभर के स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया था। आज भी यह मातृभूमि के प्रति समर्पण, एकता और देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करता है।

उन्होंने कामना की कि स्वतंत्रता दिवस सभी को अपने कर्तव्यों के प्रति और अधिक सजग होने तथा बेहतर नागरिक बनने की प्रेरणा प्रदान करे।

स्वतंत्रता दिवस कर्तव्य और सेवा-भाव मजबूत करने का अवसर : प्रेम दास सतसंगी

राधास्वामी सतसंग सभा, दयालबाग, आगरा के सचिव प्रे.भा. प्रेम दास सतसंगी ने अपने संदेश में कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि देश के प्रति अपने कर्तव्यों, अनुशासन और सेवा-भाव को और अधिक दृढ़ करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

उन्होंने कहा कि भारतवर्ष सभी परम पूज्य संत सतगुरुओं की पावन कर्मभूमि रहा है। इसलिए इस देश की मिट्टी, संस्कृति और सभ्यता से दयालबाग का अत्यंत आत्मीय और गहरा संबंध है। दयालबाग में स्वतंत्रता दिवस सहित सभी राष्ट्रीय पर्वों और आयोजनों में पूरे उत्साह, अनुशासन और उत्तरदायित्व के साथ सहभागिता की जाती है।

श्री सतसंगी ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां काफी पहले से प्रारंभ हो जाती हैं। प्रस्तुतियों को सफल बनाने में केवल बच्चों की भूमिका नहीं होती, बल्कि उनके अभिभावकों, शिक्षकों, प्रशिक्षकों, विभागाध्यक्षों तथा संबंधित संस्थानों के अनेक सदस्यों का अथक परिश्रम और समर्पण भी रहता है। उन्होंने बताया कि यह सामूहिक तैयारी बच्चों और युवाओं में अनुशासन, सहयोग, राष्ट्रीय भावना तथा उत्तरदायित्व के संस्कारों को और मजबूत करती है।

उन्होंने कहा कि दयालबाग में शिक्षा के साथ श्रम, सेवा, स्वावलंबन, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और समाजोपयोगी कार्यों को जीवन का अभिन्न अंग माना जाता है। इसी आधार पर समग्र विकास की भावना को निरंतर प्रोत्साहित किया जाता है।

उन्होंने कामना की कि स्वतंत्रता दिवस का यह पावन अवसर सभी के भीतर देश के प्रति प्रेम, कर्तव्यबोध और सेवा की भावना को और अधिक प्रगाढ़ करे।

SP_Singh AURGURU Editor