मासूम भाई की हत्या के षड्यंत्र में शामिल नाबालिग बहन को 20 साल की कैद, प्रेमी के साथ मिलकर रची थी दिल दहला देने वाली साजिश

-आरके सिंह- बरेली। पांच वर्षीय मासूम भाई की हत्या के षड्यंत्र में शामिल रही नाबालिग बहन को आखिरकार अदालत ने दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह वही सनसनीखेज मामला है, जिसमें बहन अपने प्रेमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में थी और मासूम भाई द्वारा मां को घटना बताने की बात कहने पर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद शव को मकान की छत से नीचे फेंक दिया गया, ताकि घटना हादसा प्रतीत हो।

Aug 6, 2026 - 12:27
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मासूम भाई की हत्या के षड्यंत्र में शामिल नाबालिग बहन को 20 साल की कैद, प्रेमी के साथ मिलकर रची थी दिल दहला देने वाली साजिश

विशेष पॉक्सो अदालत की जज नम्रता अग्रवाल ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि दोषी युवती हत्या के षड्यंत्र में शामिल थी और उसने साक्ष्य मिटाने में भी सहयोग किया। घटना के समय वह नाबालिग थी, इसलिए उसे कानून के प्रावधानों के तहत उम्रकैद या फांसी की सजा नहीं दी जा सकती थी। इसी आधार पर अदालत ने उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास और 35 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

पांच वर्षीय भाई ने देख लिया था प्रेमी के साथ आपत्तिजनक दृश्य

विशेष लोक अभियोजक राजीव तिवारी (पॉक्सो-03) के अनुसार, घटना 28 जुलाई 2020 की दोपहर बरेली के नवाबगंज थाना क्षेत्र के ईद जागीर गांव में हुई थी। उस समय 17 वर्षीय लड़की घर में अकेली थी। इसी दौरान उसका प्रेमी महेश उर्फ मुकेश (23 वर्ष) घर पहुंच गया।

दोनों आपत्तिजनक स्थिति में थे। तभी दूसरे कमरे से लड़की का पांच वर्षीय भाई वहां पहुंच गया। मासूम ने यह बात अपनी मां को बताने की बात कही। बदनामी के डर से महेश ने बच्चे का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।

बहन ने कहा- शव छत से फेंक दो, हादसा लगेगा

अभियोजन के अनुसार, हत्या के बाद नाबालिग बहन ने अपने प्रेमी महेश से कहा कि शव को मकान की छत से नीचे फेंक दिया जाए, जिससे मामला दुर्घटना जैसा दिखाई दे। महेश ने वैसा ही किया और घटनास्थल से फरार हो गया।

बाद में जांच के दौरान पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ और पुलिस ने मामले में हत्या, साक्ष्य मिटाने तथा पॉक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया।

पहले प्रेमी को मिली थी उम्रकैद

इस मामले में विशेष पॉक्सो अदालत पहले ही आरोपी महेश (23 वर्ष) को पांच वर्षीय मासूम की हत्या का दोषी ठहरा चुकी है। अदालत ने सोमवार को उसे आजीवन कारावास तथा 40 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।

नाबालिग होने के कारण अलग चली थी सुनवाई

घटना के समय मृतक की बहन की उम्र 17 वर्ष 26 दिन थी। इसलिए उसका मामला किशोर न्याय प्रणाली के तहत अलग कर दिया गया था। उसके विरुद्ध हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने और साक्ष्य मिटाने की चार्जशीट दाखिल की गई थी।

बालिग होने के बाद उसके मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने यह साबित किया कि युवती ने हत्या की साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई और अपराध छिपाने में सहयोग किया।

कानून के कारण नहीं हो सकती थी उम्रकैद

अधिवक्ताओं के अनुसार, घटना के समय आरोपी युवती 18 वर्ष से कम आयु की थी। किशोर न्याय कानून के तहत उस स्थिति में दोषी को हत्या के षड्यंत्र के मामले में उम्रकैद या मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता। इसी कानूनी प्रावधान को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उसे अधिकतम सीमा के अनुरूप 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत परिसर में एक ओर न्याय मिलने का संतोष दिखाई दिया, तो दूसरी ओर मासूम बच्चे के माता-पिता अपने बेटे को याद कर भावुक हो उठे।

SP_Singh AURGURU Editor