नेट बैंकिंग बंद, फिर भी खाते से उड़ गए 5 लाख रुपये, साइबर ठगों ने किया खेल

आगरा में साइबर ठगों ने शमशाबाद रोड निवासी नवीन कुमार शर्मा के बैंक खाते से 5 लाख रुपये पार कर दिए। हैरानी की बात यह है कि पीड़ित ने नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग पहले से बंद करा रखी थी। 12 अगस्त की सुबह करीब नौ बजे मोबाइल पर रकम निकलने का मैसेज आने के बाद उन्हें ठगी का पता चला। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने जीरो FIR दर्ज कर बैंक से ट्रांजेक्शन डिटेल मांगी है। पुलिस रकम की मनी ट्रेल खंगालने के साथ ठगी के तरीके और आरोपियों की पहचान में जुटी है।

Aug 16, 2026 - 18:17
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नेट बैंकिंग बंद, फिर भी खाते से उड़ गए 5 लाख रुपये, साइबर ठगों ने किया खेल

आगरा। साइबर ठगों ने बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देते हुए एक व्यक्ति के खाते से 5 लाख रुपये पार कर दिए। चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़ित ने अपने खाते की नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग पहले से ही बंद करा रखी थी। इसके बावजूद 12 अगस्त की सुबह करीब नौ बजे अचानक खाते से पांच लाख रुपये निकल गए। मोबाइल पर रकम निकासी का मैसेज पहुंचने के बाद पीड़ित के होश उड़ गए। उन्हें यह तक पता नहीं चल सका कि रकम किस माध्यम से और किस खाते में ट्रांसफर की गई।

सुबह मोबाइल पर आया 5 लाख रुपये निकलने का मैसेज

शमशाबाद रोड स्थित डी-54 अंसल टाउन निवासी नवीन कुमार शर्मा ने साइबर क्राइम थाना, पुलिस लाइन में मामले की शिकायत दर्ज कराई है। नवीन के मुताबिक, 12 अगस्त की सुबह करीब नौ बजे उनके मोबाइल पर बैंक खाते से 5 लाख रुपये की निकासी/ट्रांसफर का संदेश आया। मैसेज देखते ही उन्होंने खाते की जानकारी जांची तो रकम गायब थी। उन्होंने बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल किए बिना ही इतनी बड़ी रकम निकलने पर तत्काल बैंक से संपर्क किया। पीड़ित का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आया कि ठगों ने खाते तक किस तरह पहुंच बनाई।

नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग पहले से थी बंद

मामले में सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि नवीन कुमार ने अपने खाते की नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग पहले ही बंद करा रखी थी। इसके बावजूद खाते से इतनी बड़ी रकम निकल गई। इससे आशंका जताई जा रही है कि ठगों ने किसी दूसरे माध्यम से बैंकिंग ट्रांजेक्शन को अंजाम दिया। रकम निकलने की जानकारी मिलते ही पीड़ित बैंक पहुंचे और खाते की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए। उन्होंने बैंकिंग सेवाओं को दोबारा जांच कराया और ऑनलाइन भी शिकायत दर्ज कराई।

जीरो एफआईआर दर्ज, बैंक से मांगा गया पूरा ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड

शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने जीरो FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बैंक से खाते का विस्तृत लेनदेन विवरण मांगा है। अब जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि पांच लाख रुपये आखिर किस खाते में ट्रांसफर हुए, किस माध्यम से ट्रांजेक्शन हुआ और रकम के बाद आगे कहां-कहां भेजी गई। पुलिस द्वारा रकम की मनी ट्रेल खंगाली जा रही है। जिस खाते में रकम पहुंची, उसके धारक और उससे जुड़े अन्य खातों की भी जांच की जाएगी। साइबर विशेषज्ञ ट्रांजेक्शन के तकनीकी रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाने में जुटे हैं कि ठगों ने बैंकिंग सिस्टम में सेंध किस तरीके से लगाई।

फर्जी कस्टमर केयर और केवाईसी के नाम पर ठगी का खतरा

साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। कभी बैंक अधिकारी बनकर KYC अपडेट कराने के नाम पर जानकारी मांगी जाती है तो कभी फर्जी कस्टमर केयर के जरिए ग्राहक को अपने जाल में फंसाया जाता है। इसके अलावा पुलिस कार्रवाई, खाता बंद होने या बैंक खाते में संदिग्ध गतिविधि का डर दिखाकर भी लोगों से संवेदनशील बैंकिंग जानकारी हासिल की जाती है। पुलिस के मुताबिक, किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP, PIN, पासवर्ड, CVV, बैंक खाते की जानकारी या मोबाइल पर आए किसी लिंक का एक्सेस नहीं देना चाहिए। बैंक से संबंधित किसी समस्या के लिए केवल बैंक के आधिकारिक नंबर या अधिकृत माध्यम से ही संपर्क करना सुरक्षित है।

पुलिस खंगाल रही साइबर ठगों का पूरा नेटवर्क

पांच लाख रुपये की ठगी के इस मामले में पुलिस केवल रकम की बरामदगी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि यह पता लगाने में जुटी है कि इसके पीछे कोई संगठित साइबर गिरोह तो नहीं है। बैंक ट्रांजेक्शन की जानकारी मिलने के बाद संदिग्ध खाते, मोबाइल नंबर, डिजिटल डिवाइस और रकम की आगे की आवाजाही की जांच की जाएगी। फिलहाल पीड़ित के खाते से रकम निकलने का पूरा तरीका जांच का विषय बना हुआ है। नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग बंद होने के बावजूद इतनी बड़ी रकम निकलने से मामला और भी गंभीर हो गया है।