आगरा के एसएन में रचा गया नया मेडिकल इतिहास, पहली बार हुआ सफल किडनी प्रत्यारोपण

एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा में पहली बार सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित 32 वर्षीय मरीज को उसकी पत्नी ने किडनी दान की। पांच घंटे से अधिक चली जटिल सर्जरी एसजीपीजीआई लखनऊ की विशेषज्ञ टीम और एसएनएमसी आगरा के डॉक्टरों के संयुक्त प्रयास से सफल हुई। मुख्यमंत्री असाध्य रोग उपचार योजना से मिली आर्थिक सहायता के चलते मरीज को यह उपचार मिल सका। ट्रांसप्लांट के बाद मरीज और उसकी पत्नी दोनों की हालत स्थिर है और मरीज की नई किडनी ने काम करना शुरू कर दिया है। एसएनएमसी में ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू होने से आगरा मंडल और आसपास के जिलों के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।

Aug 22, 2026 - 19:26
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आगरा के एसएन में रचा गया नया मेडिकल इतिहास, पहली बार हुआ सफल किडनी प्रत्यारोपण
किडनी प्रत्यारोपण के बारे में जानकारी देते एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता।

32 वर्षीय मरीज को पत्नी ने दी नई जिंदगी, लखनऊ की विशेषज्ञ टीम और एसएनएमसी के डॉक्टरों के संयुक्त प्रयास से हुआ ऐतिहासिक प्रत्यारोपण, आगरा में अब स्थानीय स्तर पर मिलेगी अत्याधुनिक सुविधा

आगरा। सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) में चिकित्सा क्षेत्र में शनिवार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई। कॉलेज में पहली बार सफल किडनी ट्रांसप्लांट (गुर्दा प्रत्यारोपण) किया गया। क्रॉनिक किडनी डिजीज से जूझ रहे 32 वर्षीय मरीज को उसकी पत्नी ने अपनी किडनी दान कर नया जीवन दिया। लंबे समय से डायलिसिस पर चल रहे मरीज का यह जटिल प्रत्यारोपण मुख्यमंत्री असाध्य रोग उपचार योजना के तहत मिली वित्तीय सहायता से संभव हुआ।

इस उपलब्धि के साथ एसएनएमसी आगरा और आसपास के जिलों के मरीजों के लिए किडनी प्रत्यारोपण की दिशा में एक नई उम्मीद का केंद्र बन गया है। अब गंभीर किडनी रोग से पीड़ित मरीजों को ट्रांसप्लांट के लिए हर बार दिल्ली, लखनऊ या जयपुर जैसे बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

पांच घंटे से अधिक चली जटिल सर्जरी

किडनी प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे शुरू हुई और दोपहर 3 बजे तक चली। यह जटिल सर्जरी संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), लखनऊ की विशेषज्ञ टीम के मार्गदर्शन तथा एसएनएमसी आगरा के विभिन्न विभागों के डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के संयुक्त प्रयास से पूरी की गई। प्रत्यारोपण के बाद मरीज की नई किडनी ने अच्छी तरह काम करना शुरू कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार मरीज और किडनी दान करने वाली उसकी पत्नी दोनों की स्थिति स्थिर है और दोनों तेजी से रिकवर कर रहे हैं।

लंबे समय से डायलिसिस पर था मरीज

32 वर्षीय मरीज क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित था और लंबे समय से डायलिसिस पर निर्भर था। बीमारी के बढ़ने के कारण किडनी ट्रांसप्लांट ही उसके लिए बेहतर उपचार विकल्प था। परिवार के सामने आर्थिक चुनौती भी थी, लेकिन मुख्यमंत्री असाध्य रोग उपचार योजना के तहत मिली सहायता ने उपचार को संभव बनाया। पत्नी ने आगे बढ़कर किडनी दान की और पति के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सफल प्रत्यारोपण के बाद परिवार में राहत और खुशी का माहौल है।

एसएनएमसी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

एसएनएमसी के प्रधानाचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस सफलता को कॉलेज और पूरे आगरा मंडल के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने से आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने इस सफलता के लिए एसएनएमसी की पूरी टीम को बधाई दी और एसजीपीजीआई लखनऊ की विशेषज्ञ टीम के सहयोग एवं मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।

मरीज और डोनर दोनों की हालत स्थिर

एसएनएमसी के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. अपूर्व जैन ने बताया कि प्रत्यारोपण के बाद मरीज और उसकी पत्नी दोनों की हालत स्थिर है। मरीज की नई किडनी ने काम करना शुरू कर दिया है और उसकी स्थिति में सुधार हो रहा है। चिकित्सकों की टीम दोनों की लगातार निगरानी कर रही है।

दो संस्थानों की विशेषज्ञ टीम ने संभाली जिम्मेदारी

किडनी ट्रांसप्लांट को सफल बनाने में एसजीपीजीआई लखनऊ और एसएनएमसी आगरा की विशेषज्ञ टीमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एसजीपीजीआई लखनऊ की टीम में यूरोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. एमएस अंसारी, डॉ. संजय कुमार सुरेका और डॉ. आशीष रंजन, नेफ्रोलॉजी से डॉ. मानस रंजन बेहरा, एनेस्थीसिया से डॉ. तपस कुमार सिंह और डॉ. बोनचनपल्ली मोहन कुमार शामिल रहे। नर्सिंग टीम में सोसाकुट्टी विल्सन, विजय कुमार और आकांक्षा गौतम ने सहयोग किया।

वहीं एसएनएमसी आगरा की टीम में नेफ्रोलॉजी विभाग से डॉ. अपूर्व जैन, डॉ. मुदित खुराना और डॉ. कैरवी भारद्वाज शामिल रहे। यूरोलॉजी विभाग से डॉ. प्रशांत लवानिया, डॉ. अंकुश गुप्ता, डॉ. विजय त्यागी, डॉ. प्रदीप देब और डॉ. अभिषेक पाठक ने जिम्मेदारी संभाली। एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. योगिता द्विवेदी, डॉ. अर्चना अग्रवाल, डॉ. राजीव पुरी, डॉ. अतिहर्ष मोहन और डॉ. प्रवीण पांडेय ने ऑपरेशन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आगरा सहित आसपास के जिलों के मरीजों को बड़ी राहत

एसएनएमसी में किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू होना आगरा के साथ-साथ मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, कासगंज, हाथरस और आसपास के अन्य जिलों के मरीजों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। अब किडनी फेल्योर के गंभीर मरीजों को ट्रांसप्लांट के लिए दूसरे शहरों में जाने की मजबूरी कम होगी। इससे मरीजों और उनके परिजनों का यात्रा, इलाज और रहने का आर्थिक बोझ कम होगा, वहीं समय पर उपचार मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

आगरा में हाई-एंड चिकित्सा सेवाओं की दिशा में बड़ा कदम

एसएनएमसी में पहला सफल किडनी ट्रांसप्लांट सिर्फ एक मरीज के इलाज की सफलता नहीं, बल्कि आगरा में उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी बड़ा कदम है। इससे आने वाले समय में गंभीर किडनी रोगियों के लिए स्थानीय स्तर पर उपचार के नए विकल्प उपलब्ध होंगे।