राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में नया मोड़, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख और एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद सामने आया। मामले में पहले ही आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है और चार आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। एसआईटी अब बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है।

Jun 26, 2026 - 14:49
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राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में नया मोड़, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा

अयोध्या। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ियों की जांच के बीच शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और संस्थापक ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया। बताया जा रहा है कि दोनों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए यह फैसला किया है।

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच के निर्देश तथा विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, दोनों नेताओं की ओर से इस्तीफे को लेकर अभी तक कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है।

एसआईटी रिपोर्ट के बाद तेज हुई कार्रवाई

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में कुछ गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत करते हुए कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इसके बाद पुलिस ने जांच की गति तेज कर दी। जांच एजेंसी फिलहाल कथित वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, संपत्तियों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर

गौरतलब है इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी कृष्ण मोहन की शिकायत पर राम जन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर में जिन आठ लोगों को नामजद किया गया है, उनमें रामशंकर यादव उर्फ टीनू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव शामिल हैं। इन सभी पर गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि बाकी की तलाश जारी है।

कौन हैं कृष्ण मोहन, जिन्होंने दर्ज कराई शिकायत?

इस पूरे मामले की शिकायत ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई है। सितंबर 2025 में उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था। वे ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद ट्रस्ट से जुड़े। हरदोई निवासी कृष्ण मोहन ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने करीब छह वर्ष तक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में कार्य किया और फिर भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होकर महाराष्ट्र कैडर में सेवाएं दीं। वर्ष 2012 में सेवानिवृत्त होने के बाद वे सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे।

चंपत राय की क्या थी जिम्मेदारी?

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता रहे चंपत राय राम मंदिर आंदोलन के शुरुआती दौर से जुड़े प्रमुख चेहरों में रहे हैं। मंदिर निर्माण से लेकर ट्रस्ट के प्रशासनिक संचालन तक उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। महासचिव के रूप में वे ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्य, वित्तीय प्रबंधन, भूमि संबंधी मामलों, मंदिर संचालन और दैनिक व्यवस्थाओं की निगरानी करते थे। सूत्रों के अनुसार, मंदिर संचालन से जुड़े अधिकांश महत्वपूर्ण निर्णय और सूचनाएं उनके स्तर तक पहुंचती थीं।

डॉ. अनिल मिश्रा की क्या थी भूमिका?

अयोध्या के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनिल मिश्रा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से लंबे समय से जुड़े रहे हैं और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टियों में शामिल थे। उनकी जिम्मेदारियों में  मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे की गिनती, धन का सुरक्षित भंडारण, बैंक में जमा कराने की निगरानी तथा मंदिर परिसर की साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं की देखरेख शामिल थी।

रामशंकर उर्फ टीनू यादव की भूमिका भी जांच के दायरे में

जांच एजेंसियों के अनुसार, चंपत राय के करीबी माने जाने वाले रामशंकर यादव उर्फ टीनू यादव श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था के साथ-साथ चढ़ावे और दान से जुड़ी व्यवस्थाओं का संचालन देखते थे। एफआईआर में उनका नाम प्रमुख आरोपियों में शामिल है और उनकी भूमिका की गहन जांच की जा रही है।

सरकार का रुख स्पष्ट

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून के अनुसार कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। अब सभी की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।