यूएस-ईरान वार्ता से पहले एक्शन में पाक,   मिडिल ईस्ट की तरफ उड़ाए लड़ाकू विमान,   प्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट

संभावित खतरों को देखते हुए इस्लामाबाद को लगभग एक किले में तब्दील कर दिया गया है। दक्षिणी और पश्चिमी एयरस्पेस में डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्रिय कर दिए गए हैं।

Apr 10, 2026 - 19:51
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यूएस-ईरान वार्ता से पहले एक्शन में पाक,   मिडिल ईस्ट की तरफ उड़ाए लड़ाकू विमान,   प्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट

इसलामाबाद। इस्लामाबाद में शनिवार को होने जा रही अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर जहां एक तरफ उम्मीदें बढ़ी हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। दो हफ्ते के सीजफायर के बावजूद मिडिल ईस्ट में तनाव बना हुआ है। ऐसे में ईरान से हवाई मार्ग के जरिए आने वाले प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान अलर्ट पर है। खासकर इजरायल की संभावित गतिविधियों को देखते हुए।

पाकिस्तान ने सुरक्षा के मद्देनज़र अपने लड़ाकू विमान, सी-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, रिफ्यूलिंग टैंकर्स और  अवाक्स (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) को मिडिल ईस्ट दिशा में तैनात कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की तैयारी इस्लामाबाद पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव को भी दर्शाती है, क्योंकि यह बैठक क्षेत्रीय शांति के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

संभावित खतरों को देखते हुए इस्लामाबाद को लगभग एक किले में तब्दील कर दिया गया है। दक्षिणी और पश्चिमी एयरस्पेस में डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्रिय कर दिए गए हैं। पाकिस्तान के मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि सभी विदेशी मेहमानों की “फुल-प्रूफ सिक्योरिटी” सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं।

उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद के लिए रवाना हो चुका है, जहां अमेरिकी और ईरान के बीच अहम शांति वार्ता होने वाली है। ईरान की ओर से इस वार्ता में संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल होंगे, जो इस बातचीत को और भी महत्वपूर्ण बना देता है।

खास बात यह है कि ईरानी रिवोल्यूशन के बाद यह पहली बार है जब दोनों देशों के बीच इतनी बड़ी और हाई-लेवल आमने-सामने  बैठक होने जा रही है,  जिससे इसे ऐतिहासिक माना जा रहा है। यह बैठक सिर्फ कूटनीतिक पहल नहीं बल्कि पाकिस्तान के लिए एक बड़ी परीक्षा भी है, जहां उसकी सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय साख दोनों दांव पर हैं।