हर 3 मिनट में एक मरीज को चाहिए नया अंग, एक मृत व्यक्ति बचा सकता है 9 जिंदगियां
भारत में हर तीन मिनट में किसी मरीज को अंग की जरूरत पड़ने के बावजूद अंगदान करने वालों की संख्या पर्याप्त नहीं है। इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणवीर सिंह त्यागी ने आगरा में कहा कि दक्षिण भारत की तुलना में उत्तर भारत में अंगदान को लेकर जागरूकता कम है। सिनर्जी प्लस हॉस्पिटल में अंगदान जागरूकता पोस्टर का विमोचन किया गया। पूरे अगस्त देशभर में अभियान चलाया जा रहा है, जिसका समापन 31 अगस्त को होगा। चिकित्सकों के मुताबिक, एक मृत व्यक्ति के अंगों से नौ लोगों की जान बचाई जा सकती है। वहीं, एसएन मेडिकल कॉलेज में जल्द किडनी ट्रांसप्लांट शुरू कराने और अंगों को सुरक्षित रखने की सुविधाएं विकसित करने की तैयारी है।
अंगदान महादान-उत्तर भारत में जागरूकता की कमी, आगरा में पूरे अगस्त चलेगा जागरूकता अभियान
आगरा। देश में हर दिन बड़ी संख्या में मरीजों को अंग प्रत्यारोपण की जरूरत होती है, लेकिन मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। हर तीन मिनट में भारत में किसी न किसी मरीज को एक अंग की जरूरत पड़ती है। ऐसे में अंगदान किसी जरूरतमंद के लिए जीवनदान साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एक मृत व्यक्ति के अंगों से नौ लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है।
इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणवीर सिंह त्यागी ने कहा कि दक्षिण भारत की तुलना में उत्तर भारत में अंगदान को लेकर अभी भी जागरूकता का अभाव है। लोगों में अंगदान को लेकर कई तरह के भ्रम और संकोच हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है।
सिनर्जी प्लस हॉस्पिटल में जागरूकता पोस्टर का विमोचन
शुक्रवार को सिकंदरा बाईपास स्थित सिनर्जी प्लस हॉस्पिटल में इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन की ओर से अंगदान जागरूकता अभियान के तहत पोस्टर का विमोचन किया गया। जागरूकता पोस्टर का संयुक्त रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणवीर सिंह त्यागी, डॉ. राकेश त्यागी, डॉ. अरविंद यादव, डॉ. रजनीश मिश्रा और डॉ. दीप्तिमाला अग्रवाल ने विमोचन किया। इस दौरान चिकित्सकों ने लोगों को अंगदान के महत्व की जानकारी दी और समाज में फैले भ्रमों को दूर करने का आह्वान किया।
पूरे अगस्त चलेगा जागरूकता अभियान
डॉ. रणवीर सिंह त्यागी ने बताया कि अगस्त माह को अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष रूप से अभियान चलाया जा रहा है। इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन की ओर से देशभर में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान का 31 अगस्त को समापन समारोह होगा। इसमें शहर के प्रबुद्ध वर्ग को अंगदान की आवश्यकता और इसके महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही शहरवासियों से अंगदान का संकल्प लेने की अपील की जाएगी। अगस्त में अंगदान से जुड़े दो महत्वपूर्ण दिवस भी मनाए जाते हैं। 3 अगस्त को भारतीय अंगदान दिवस (इंडियन ऑर्गन डोनेशन डे) मनाया गया, जबकि 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस (World Organ Donation Day) मनाया जाएगा। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करना और इससे जुड़े भ्रम एवं भ्रांतियों को दूर करना है।
स्कूल-कॉलेज से लेकर सामाजिक संगठनों तक चलेगा अभियान
अंगदान को जनआंदोलन बनाने के लिए स्कूल, कॉलेज, विभिन्न समितियों, सामाजिक संगठनों और सरकारी विभागों के सहयोग से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि अंगदान को लेकर समाज में सही जानकारी पहुंचाना जरूरी है। यदि अधिक लोग मृत्यु के बाद अंगदान का संकल्प लें तो प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे अनेक मरीजों को नया जीवन मिल सकता है।
दो तरह से किया जा सकता है अंगदान
विशेषज्ञों के अनुसार अंगदान मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है।
1. जीवित रहते हुए अंगदान:
व्यक्ति अपने जीवनकाल में निर्धारित चिकित्सकीय नियमों के तहत एक किडनी या लीवर का कुछ हिस्सा दान कर सकता है।
2. मृत्यु के बाद अंगदान:
मस्तिष्क मृत्यु यानी ब्रेन डेड होने की स्थिति में व्यक्ति के महत्वपूर्ण अंगों को चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत जरूरतमंद मरीजों के प्रत्यारोपण के लिए दान किया जा सकता है।
किडनी से लेकर हृदय तक कई अंग किए जा सकते हैं दान
अंगदान के जरिए कई मरीजों को जीवनदान दिया जा सकता है। प्रमुख दान किए जाने वाले अंगों में किडनी, लीवर, हृदय, फेफड़े, अग्न्याशय और आंतें शामिल हैं। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण ऊतक भी दान किए जा सकते हैं। इनमें कॉर्निया (आंखें), त्वचा, हड्डियां और हृदय के वाल्व प्रमुख हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज में जल्द शुरू होगा किडनी ट्रांसप्लांट
अंगदान और अंग प्रत्यारोपण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों में ट्रांसप्लांट की सुविधाएं शुरू कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा में जल्द किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू कराने की तैयारी है। इसके साथ ही अंगों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित करने पर भी काम किया जाएगा। इससे जरूरतमंद मरीजों के लिए उपलब्ध अंगों को सुरक्षित रखते हुए आवश्यकतानुसार प्रत्यारोपण केंद्रों तक भेजने में मदद मिलेगी।
‘अंगदान के प्रति भ्रम दूर करना सबसे बड़ी चुनौती’
चिकित्सकों का मानना है कि भारत में अंग प्रत्यारोपण की जरूरत वाले मरीजों की संख्या बड़ी है, लेकिन अंगदान करने वालों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। खासकर उत्तर भारत में सामाजिक और धार्मिक भ्रांतियों के कारण लोग अंगदान को लेकर खुलकर आगे नहीं आते। ऐसे में जागरूकता अभियान के जरिए लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि मृत्यु के बाद किया गया अंगदान किसी दूसरे परिवार के लिए जिंदगी की नई शुरुआत बन सकता है।