पीएम की मुख्यमंत्रियों के साथ शुक्रवार को अहम बैठक, मिडिल ईस्ट संकट और आगे की तैयारियों पर होगी चर्चा
इस बैठक में सुरक्षा, सप्लाई चेन, ऊर्जा जरूरतों और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। चुनावी राज्यों के सीएम इस बैठक में शामिल नहीं होंगे।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (27 मार्च 2026) शाम 6.30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मिडिल ईस्ट जंग के संभावित प्रभावों को लेकर राज्यों की तैयारियों और आगे की प्लानिंग की समीक्षा करना है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में सुरक्षा, सप्लाई चेन, ऊर्जा जरूरतों और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत बनाने पर भी विशेष जोर रहेगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके। जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं वहां के मुख्यमंत्री आचार संहिता के कारण इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। चुनाव वाले राज्यों के मुख्य सचिवों के लिए एक अलग बैठक आयोजित की जाएगी, जो कैबिनेट सचिवालय के जरिए से होगी।
केंद्र सरकार बार-बार कह रही है कि देश में पेट्रोलियम और एलपीजी सप्लाई की स्थिति पूरी तरह से सुरक्षित और कंट्रोल में है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को लेकर बुधवार (25 मार्च 2026) को सरकार ने संसद भवन में सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'मैंने विपक्ष और सरकार की तरफ से दिए गए सभी सुझावों को डिटेल में सुना है। सभी सवाल और सभी कन्फ्यूजन, जो कुछ भी था, सरकार ने उन सभी को साफ-साफ समझाया और विपक्ष ने मीटिंग के आखिर में कहा, जो बहुत जरूरी है कि वे इस ऑल पार्टी मीटिंग को बुलाने के लिए सरकार को धन्यवाद देते हैं।'
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आगे कहा, 'कई सदस्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गैस और पेट्रोलियम सप्लाई की डिटेल्स जानना चाहते थे। वे सभी इस बात से संतुष्ट थे कि भारत पहले ही चार जहाज लाने में सफल रहा इसलिए विपक्षी सदस्य सरकार की कोशिशों से संतुष्ट थे।' बैठक के दौरान विदेश सचिव ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्थिति और भारत के हितों पर डिटेल प्रेजेंटेशन भी दिया. इससे विपक्ष को रणनीतिक और कूटनीतिक पहलुओं की जानकारी दी गई, ताकि राष्ट्रीय मुद्दों पर व्यापक सहमति बन सके।