समोगर घाट पुल और नुनिहाई आरओबी पर सीईसी की ‘ना’ से फंसा मामला

आगरा में समोगर घाट पर करीब 93 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित यमुना पुल और नुनिहाई-प्रकाश नगर दो लेन आरओबी को केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने मौजूदा परिस्थितियों में जरूरी नहीं माना है। समोगर घाट पुल के निरीक्षण में कम यातायात और पास में मौजूद इनर रिंग रोड के पुल को आधार बनाया गया, जबकि नुनिहाई आरओबी के मामले में कम ट्रैफिक, दो अंडरपास और औद्योगिक इकाइयों की आपत्तियों का हवाला दिया गया। एत्मादपुर विधायक धर्मपाल सिंह ने दोनों परियोजनाओं को जनहित से जुड़ा बताते हुए कानूनी राय लेने और प्रस्ताव को दोबारा सीईसी के समक्ष रखने की बात कही है।

Aug 20, 2026 - 08:54
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समोगर घाट पुल और नुनिहाई आरओबी पर सीईसी की ‘ना’ से फंसा मामला
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सीईसी ने मौजूदा हालात में दोनों परियोजनाओं को बताया गैरजरूरी, विधायक धर्मपाल बोले -जनहित में फिर उठाएंगे आवाज 

आगरा। ग्रामीण संपर्क और औद्योगिक क्षेत्र में आवागमन को बेहतर बनाने के लिए शासन से मंजूर की गईं आगरा की दो अहम पुल परियोजनाएं अब केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की निरीक्षण रिपोर्ट के बाद सवालों के घेरे में आ गई हैं। रहनकलां-रायपुर-बमरौली कटारा मार्ग पर समोगर घाट में यमुना पर प्रस्तावित दो लेन पुल और नुनिहाई इंडस्ट्रियल एरिया-प्रकाश नगर के बीच प्रस्तावित दो लेन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) को सीईसी ने मौजूदा परिस्थितियों में जरूरी नहीं माना है। समिति ने दोनों परियोजनाओं पर आगे काम नहीं बढ़ाने की राय दी है।

इन परियोजनाओं को लेकर अब मामला केवल तकनीकी जरूरत और यातायात के आंकड़ों तक सीमित नहीं रह गया है। एक ओर सीईसी ने कम यातायात, आसपास की आबादी और पहले से मौजूद वैकल्पिक मार्गों को आधार बनाया है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय जनप्रतिनिधि इन परियोजनाओं को भविष्य की जरूरत और जनहित से जोड़ रहे हैं। ऐसे में शासन की मंजूरी के बावजूद परियोजनाओं का रुकना क्षेत्र के विकास को लेकर नई बहस खड़ी कर रहा है।

93 करोड़ की परियोजना, लेकिन मौके पर नहीं मिला अपेक्षित यातायात

रहनकलां-रायपुर-बमरौली कटारा मार्ग पर समोगर घाट में यमुना नदी पर दो लेन पुल का प्रस्ताव क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। करीब 93 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को शासन से मंजूरी भी मिल चुकी है। उम्मीद थी कि पुल बनने के बाद आसपास के गांवों के लोगों को सीधा संपर्क मार्ग मिलेगा और उन्हें लंबी दूरी तय करने से राहत मिलेगी।

सीईसी ने 29 जुलाई 2026 को प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया। समिति ने करीब 40 मिनट तक मौके पर स्थिति का जायजा लिया। रिपोर्ट के अनुसार निरीक्षण के दौरान समिति को मौके पर एक भी चार पहिया वाहन दिखाई नहीं दिया।

सीईसी ने यह भी उल्लेख किया कि प्रस्तावित पुल स्थल से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर इनर रिंग रोड पर पहले से ही यमुना पर पुल मौजूद है। समिति के अनुसार मौजूदा पुल से क्षेत्र की जरूरत काफी हद तक पूरी हो सकती है। आसपास की आबादी और वर्तमान यातायात को देखते हुए सीईसी ने नए पुल की तत्काल जरूरत पर सवाल खड़े किए।

सीईसी की नजर में कम आबादी और कम ट्रैफिक सबसे बड़ा आधार

समिति की रिपोर्ट में प्रस्तावित पुल क्षेत्र में यातायात का दबाव कम होने और आबादी अपेक्षाकृत कम होने को अहम आधार माना गया है। सीईसी की राय है कि जब नजदीक ही मौजूदा पुल उपलब्ध है और वर्तमान में यातायात भी बहुत कम है तो इतनी बड़ी धनराशि खर्च कर नया पुल बनाने की उपयोगिता पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, स्थानीय स्तर पर सवाल यह उठ रहा है कि किसी क्षेत्र में वर्तमान यातायात कम होने के आधार पर ही भविष्य की कनेक्टिविटी परियोजना की जरूरत को तय किया जाना कितना उचित है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल बनने के बाद ही कई बार यातायात और आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं। यही तर्क अब इस परियोजना के समर्थकों की ओर से सामने आ रहा है।

नुनिहाई आरओबी पर भी सीईसी ने जताई आपत्ति

दूसरी बड़ी परियोजना नुनिहाई इंडस्ट्रियल एरिया और प्रकाश नगर के बीच प्रस्तावित दो लेन आरओबी की है। इस परियोजना को भी शासन से प्रशासकीय और वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। इसका उद्देश्य रेलवे फाटक और आसपास के क्षेत्र में आवागमन को सुगम बनाना था।

प्रकाश नगर आरओबी से करीब ढाई से तीन लाख लोगों को लाभ मिलने का अनुमान लगाया गया था। परियोजना को क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुधारने और रेलवे फाटक के कारण होने वाली दिक्कतों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा था। लेकिन 30 जुलाई 2026 को निरीक्षण के बाद सीईसी ने इस परियोजना को भी मौजूदा परिस्थितियों में उचित नहीं माना। समिति ने क्षेत्र में कम यातायात, पहले से मौजूद दो अंडरपास और औद्योगिक क्षेत्र की वर्तमान स्थिति को रिपोर्ट में प्रमुख आधार बनाया।

भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने का तर्क

नुनिहाई आरओबी के प्रस्ताव को लेकर औद्योगिक इकाइयों की आपत्ति भी सामने आई है। सीईसी की रिपोर्ट में इकाई संचालकों के पक्ष का उल्लेख किया गया है। उनका कहना है कि आरओबी बनने के बाद क्षेत्र की सड़क व्यवस्था में बदलाव से कच्चा माल लेकर आने वाले और तैयार माल को बाहर ले जाने वाले भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। नुनिहाई क्षेत्र में बड़ी संख्या में फाउंड्री और अन्य औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। इनके लिए भारी वाहनों की आवाजाही रोजमर्रा के कारोबार का अहम हिस्सा है। उद्योग संचालकों को आशंका है कि प्रस्तावित निर्माण के बाद रास्ते में बदलाव या सीमित आवागमन से उत्पादन और माल की ढुलाई प्रभावित हो सकती है।

जनहित बनाम औद्योगिक हित ने खड़ा किया बड़ा सवाल

दोनों परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति ने विकास योजनाओं में जनहित और औद्योगिक हित के संतुलन का सवाल खड़ा कर दिया है। शासन ने जिन परियोजनाओं को क्षेत्रीय संपर्क और लोगों की सुविधा के लिहाज से मंजूरी दी थी, वहीं सीईसी के निरीक्षण के बाद उनकी उपयोगिता पर सवाल उठ गया है। समोगर घाट पुल के मामले में जहां ग्रामीण कनेक्टिविटी और भविष्य की जरूरत का मुद्दा है, वहीं नुनिहाई आरओबी के मामले में आम लोगों की सुविधा के साथ औद्योगिक इकाइयों की जरूरतें भी जुड़ी हैं। ऐसे में किसी एक पक्ष को आधार बनाकर फैसला करना आसान नहीं होगा।

विधायक बोले-जनहित में फिर सीईसी के सामने रखेंगे प्रस्ताव

एत्मादपुर क्षेत्र के विधायक धर्मपाल सिंह ने कहा है कि वह पूरे मामले में कानूनी राय ले रहे हैं। उनके अनुसार दोनों परियोजनाएं क्षेत्र की जनता के हित से जुड़ी हैं और इन्हें केवल मौजूदा यातायात के आधार पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। विधायक का कहना है कि जनहित और क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव को दोबारा सीईसी के समक्ष रखा जाएगा। इसके लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

अब भविष्य की जरूरत बनाम मौजूदा आंकड़ों पर होगा फैसला

सीईसी की रिपोर्ट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि किसी विकास परियोजना की उपयोगिता तय करने में केवल वर्तमान यातायात और मौजूदा सुविधाओं को आधार बनाया जाए या आने वाले वर्षों की आबादी, संभावित यातायात वृद्धि, ग्रामीण संपर्क, औद्योगिक विस्तार और जाम की स्थिति को भी समान महत्व दिया जाए।

समोगर घाट में नया पुल बनने से ग्रामीण क्षेत्रों को वैकल्पिक और सीधा मार्ग मिलने की संभावना थी। वहीं नुनिहाई आरओबी का उद्देश्य रेलवे क्रॉसिंग से जुड़ी आवागमन की समस्याओं को कम करना था। अब दोनों परियोजनाओं पर सीईसी की आपत्ति के बाद इनके भविष्य पर अंतिम तस्वीर विधायक की ओर से अपनाए जाने वाले कानूनी रास्ते और दोबारा होने वाली समीक्षा के बाद ही साफ होगी।

अब आगे क्या?

शासन से मंजूरी मिलने के बाद दोनों परियोजनाओं पर सीईसी की रिपोर्ट ने फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। विधायक की ओर से कानूनी राय लेने और प्रस्ताव को दोबारा सीईसी के समक्ष रखने की तैयारी के बीच अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या समिति मौजूदा परिस्थितियों के साथ भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखकर अपने निर्णय पर पुनर्विचार करती है।