नेता नहीं, कार्यकर्ता बनकर जीते रहे राजकुमार सामा, पुण्यतिथि पर नम हुईं आंखें

आगरा में स्व. राजकुमार सामा की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने कहा कि सामा जी का पूरा जीवन राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए गुरुकुल के समान है। उन्होंने 1956 में जूता कारोबारियों को संगठित कर द आगरा शू फैक्टर्स फैडरेशन की स्थापना की और विभाजन के बाद आगरा पहुंचे परिवारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फैडरेशन अध्यक्ष विजय सामा ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि आगरा के जूता उद्योग की मजबूत नींव रखने वालों में सामा जी का योगदान अविस्मरणीय है।

Oct 5, 2026 - 21:12
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नेता नहीं, कार्यकर्ता बनकर जीते रहे राजकुमार सामा, पुण्यतिथि पर नम हुईं आंखें
हींग की मंडी स्थित द आगरा शू फैक्टर्स फैडरेशन कार्यालय में स्व. राजकुमार सामा की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में स्व. सामा की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते विजय सामा, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल आदि।

जूता कारोबार को पहचान दिलाने से लेकर समाजसेवा तक छोड़ी अमिट छाप

आगरा। राजनीति में पद और प्रतिष्ठा हासिल करने की होड़ के बीच ऐसे व्यक्तित्व कम ही देखने को मिलते हैं, जिन्होंने पूरी जिंदगी खुद को नेता नहीं बल्कि पार्टी का कार्यकर्ता माना। स्व. राजकुमार सामा ऐसे ही व्यक्तित्व थे, जिन्होंने जीवनपर्यंत भाजपा से जुड़े रहकर राजनीति के साथ सामाजिक, धार्मिक और औद्योगिक क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई। जूता कारोबारियों को एकजुट कर उन्होंने न केवल आगरा के फुटवियर उद्योग को संगठित स्वरूप दिया, बल्कि समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के रास्ते भी खोले।

हींग की मंडी स्थित द आगरा शू फैक्टर्स फैडरेशन कार्यालय में स्व. राजकुमार सामा की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने कहा कि राजकुमार सामा का जीवन राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए एक आदर्श है।

‘सामा जी का व्यक्तित्व राजनेता के लिए गुरुकुल के समान’

विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने कहा कि स्व. राजकुमार सामा ने कभी खुद को बड़ा नेता नहीं माना, बल्कि हमेशा एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में संगठन और समाज के लिए काम किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जहां लोग राजनीतिक लाभ के लिए दल बदलकर अपनी वरिष्ठता तलाशते हैं, वहीं सामा जी ने जीवनभर एक ही विचारधारा और एक ही पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी। उन्होंने कहा, “मुझे सामा जी का साथ और आशीर्वाद दोनों प्राप्त हुआ। उनका व्यक्तित्व किसी भी राजनेता के लिए गुरुकुल के समान था। उनके जीवन से संगठन के प्रति निष्ठा, समाजसेवा और लोगों को साथ लेकर चलने की प्रेरणा मिलती है।” खंडेलवाल ने कहा कि सामा जी ने राजनीति को केवल चुनाव और पद तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने सामाजिक सरोकारों और धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाई तथा अपने व्यवहार और कार्यशैली से लोगों के बीच विश्वास कायम किया।

1956 में रखी जूता कारोबार को संगठित करने की नींव

फैडरेशन अध्यक्ष एवं स्व. राजकुमार सामा के प्रपौत्र विजय सामा ने अपने संबोधन में उनके साथ बिताए संस्मरणों को साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1956 में राजकुमार सामा ने जूता कारोबारियों को एकजुट कर द आगरा शू फैक्टर्स फैडरेशन की स्थापना की थी। उस समय जूते के कारोबार को समाज में अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता था और कई लोग इसे हीन भावना से देखते थे। ऐसे समय में सामा जी ने जूता कारोबारियों को संगठित किया और उन्हें एक साझा मंच उपलब्ध कराया। उन्होंने कारोबारियों की समस्याओं को उठाने के साथ ही आगरा के जूता उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए। विजय सामा ने कहा कि आज आगरा और देश के जूता उद्योग ने जो मुकाम हासिल किया है, उसकी मजबूत नींव रखने वालों में राजकुमार सामा का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आज घरेलू जूता उत्पादन का बाजार करीब 30 से 35 हजार करोड़ रुपये सालाना तक पहुंच चुका है। जिस क्षेत्र को कभी हीन भावना से देखा जाता था, वही आज हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार बन चुका है।

विभाजन के बाद आगरा पहुंचे परिवारों के लिए रोजगार का सहारा

विजय सामा ने बताया कि भारत विभाजन के बाद जब बड़ी संख्या में सिख, सिंधी, पंजाबी और खत्री समाज के परिवार विस्थापित होकर आगरा पहुंचे, तब उनके सामने रोजी-रोटी का संकट था। ऐसे समय में राजकुमार सामा ने इन परिवारों को रोजगार और कारोबार से जोड़ने के लिए प्रयास किए। उन्होंने जरूरतमंद परिवारों के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के अवसर दिए। यही वजह है कि उनका योगदान केवल जूता कारोबार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक पुनर्वास और समाज को आत्मनिर्भर बनाने तक विस्तृत रहा।

संजय प्लेस की मार्केट को विकसित करने में भी योगदान

विजय सामा ने कहा कि आगरा के व्यावसायिक विकास में भी स्व. राजकुमार सामा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संजय प्लेस की मार्केट को विकसित करने में उनके योगदान को भी याद किया गया। उन्होंने कहा कि आगरा के व्यापारिक स्वरूप को विस्तार देने और कारोबारियों के लिए बेहतर अवसर तैयार करने की दिशा में सामा जी लगातार सक्रिय रहे। उनका पूरा जीवन संगठन, व्यापार, समाजसेवा और जनसरोकारों के लिए समर्पित रहा। द आगरा शू फैक्टर्स फैडरेशन के साथ उनका रिश्ता इतना मजबूत रहा कि वह जीवनपर्यंत इसके निर्विरोध अध्यक्ष रहे।

पुण्यतिथि पर नम आंखों से किया नमन

पुण्यतिथि के अवसर पर उपस्थित लोगों ने स्व. राजकुमार सामा के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि उनके द्वारा लगाए गए पौधे ने आज एक विशाल वृक्ष का रूप ले लिया है। आगरा का जूता उद्योग, व्यापारिक संगठन और सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाता रहेगा।

कार्यक्रम में स्व. सामाजी के पुत्र रंजीत सामा, फैडरेशन के महासचिव नरेंद्र पुरसनानी, कोषाध्यक्ष दिलप्रीत सचदेवा, संरक्षक अनिल अरोरा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता, घनश्याम रोहरा, दिलीप खूबचनदानी, संजय अरोरा, रवि कांत महाजन, अजय महाजन, टेक चंद, प्रमोद जैन, प्रदीप सरीन, प्रदीप मेहरा, राकेश महाजन, धर्मपाल कश्यप, राकेश अरोरा, भूपेश महाजन, ज्योति दीवान, हरीश वनजानी, सुनील विज, नारी पहलीजानी, राजेश लालवानी, मुरलीधर पंजवानी, यश गांधी, हर्ष कपूर, रवि महाजन, सुनील बजाज, परमानंद, संजय दुबे सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में स्व. राजकुमार सामा के जीवन, उनके संघर्ष और समाज के लिए किए गए कार्यों को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया।