सावन के मेले: सिमटती जगहों के बीच आज भी जिंदा है उल्लास, झूलों, मल्हार और परंपराओं से गुलजार रहता है आगरा
आगरा में सावन के मेले भले ही बदलते समय के साथ अपने पुराने स्वरूप से दूर हो गए हों, लेकिन इनसे जुड़ा उल्लास और परंपराएं आज भी जीवित हैं। झूले, सावन गीत, मेहंदी और भुजरियों जैसे आयोजन भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं को संजोने के साथ आपसी सद्भाव का संदेश भी दे रहे हैं।
रिमझिम-रिमझिम बरसती बूंदें। ठंडी हवा के झोंके। गीत मल्हारों के बीच झूलों पर पैग बढ़ाकर आसमान को छूने की ललक। भले ही यह माहौल अब नहीं दिखता, लेकिन मस्ती अभी भी जिंदा है। सावन के मेलों में उमड़ता सैलाब आज भी संदेश देता है कि हमारे शहर में भले ही जगह सिमटती जा रही है। झूलों के लिए जगह नहीं हो, लेकिन उल्लास में कमी नहीं आ रही है। रूप-स्वरूप में अवश्य बदलाव आ गया है।
आगरा शिव की नगरी है। यहां भगवान शंकर के चार कोनों पर चार शिवालय कैलाश महादेव मंदिर, बल्केश्वर महादेव मंदिर, राजेश्वर महादेव मंदिर, पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर हैं। इन मंदिरों पर अलग-अलग सोमवारों को मेले लगते हैं। श्रीमनःकामेश्वर महादेव मंदिर और रावली महादेव मंदिर पर तो पूरे सावन में मेले जैसा माहौल होता हैं।
बेलनगंज स्थित फाटक ‘सूरजभान‘ में हर वर्ष हरियाली तीज के मेले का आयोजन होता है। यह मेला कब से होता आ रहा है, किसी को पता नहीं, लेकिन माना जाता है कि इसकी विधिवत शुरुआत सन् 1964 में स्व. लाला नत्थीलाल एवं स्व. लाला सन्नो मल के द्वारा की गई थी। इस मेले पर फाटक की बारहदरी स्थित हनुमान मंदिर में फूल बंगला एवं छप्पन भोग का आयोजन भी किया जाता है। मेले का उद्घाटन किसी प्रतिष्ठित महिला द्वारा कराया जाता है।
इस मेले की खास बात यह है कि यहाँ आज भी पेड़ों की डालियों पर झूले डाले जाते हैं। मेहंदी प्रतियोगिता भी होती है। पूरा क्षेत्र सावन के गीतों से गूंज उठता है। इस मेले का आयोजन ‘श्री बजरंग मेला समिति‘ द्वारा किया जाता है। जिसकी व्यवस्था पूर्व पार्षद दीपक ढल, पूर्व पार्षद दीपक खरे और उनकी 11 लोगों की टीम देखती है।
भुजरियों का मेला यमुना के घाटों पर शताब्दियों से रक्षाबंधन पर्व पर होता आ रहा है। मिट्टी के पात्रों में रक्षाबंधन से एक सप्ताह पूर्व गेंहू की बालियों को बोया जाता है। रक्षाबंधन पर्व की संध्या पर घर की बहन-बेटियों के द्वारा भुजरियों के पात्रों को यमुना में प्रवाहित कर दिया जाता है।
भुजरियों का यह मेला जीवनी मण्डी पर विशेष रूप से होता है। अन्य घाटों पर भी मेला जैसा माहौल रहता है।
इसके अलावा जगदीशपुरा, बोदला, बिचपुरी में मेला होता है। पचकुइयां चौराहा पर क्षेत्रीय बाजार कमेटी द्वारा दो दिवसीय मेले का आयोजन होता है, जिसमें काफी भीड़ उमड़ती है। इसमें मुनेंद्र जादौन का विशेष योगदान रहता है। ये मेले आज भी परस्पर सद्भावना का संदेश दे रहे हैं। भारतीय संस्कृति और परंपराओं का भी संरक्षण कर रहे हैं।
-आदर्श नंदन गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार। सीताराम कॉलोनी बल्केश्वर आगरा। मोबाइलः 9837069255