स्वदेशी नस्लों में वैज्ञानिक क्रांति: आईवीआरआई ने उन्नत तकनीक से साहीवाल के पांच उत्कृष्ट बछड़े तैयार कर रचा इतिहास

-आरके सिंह- बरेली। देश के पशुधन और डेयरी क्षेत्र के लिए बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि सामने आई है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान ने स्वदेशी दुधारू पशु प्रजनन के क्षेत्र में उन्नत सहायक प्रजनन तकनीकों का सफल प्रयोग करते हुए साहीवाल नस्ल के पांच उत्कृष्ट बछड़ों (चार नर एवं एक मादा) का उत्पादन कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

Mar 26, 2026 - 20:09
Mar 26, 2026 - 20:10
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स्वदेशी नस्लों में वैज्ञानिक क्रांति: आईवीआरआई ने उन्नत तकनीक से साहीवाल के पांच उत्कृष्ट बछड़े तैयार कर रचा इतिहास
आईवीआरआई बरेली में उन्नत तकनीक से तैयार किये साहीवाल बछड़ों के साथ संस्थान के वैज्ञानिक।

यह सफलता अल्ट्रासाउंड-मार्गदर्शित ट्रांसवेजाइनल ओसाइट एस्पिरेशन (ओपीयू), इन-विट्रो भ्रूण उत्पादन (आईवीएफ) और एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक के संयोजन से प्राप्त हुई है। इस उपलब्धि के तहत पहला बछड़ा ‘गौरी’ नामक मादा के रूप में 28 फरवरी 2026 को जन्मा, जिसके बाद अगले चार दिनों में चार स्वस्थ नर बछड़ों का जन्म हुआ।

इस महत्वपूर्ण शोध कार्य का नेतृत्व पशु प्रजनन विभाग के डॉ. बृजेश कुमार ने किया, जिसमें डॉ. विक्रांत सिंह चौहान, डॉ. विकास चंद्र (दैहिकी एवं जलवायु विज्ञान विभाग) तथा डॉ. एम. के. पात्रा (पशुधन उत्पादन प्रबंधन अनुभाग) का सहयोग रहा। पिछले ढाई वर्षों में टीम ने साहीवाल, थारपारकर एवं मुर्रा भैंस जैसी स्वदेशी नस्लों में ओपीयू-आईवीएफ तकनीकों का सफल मानकीकरण भी किया है।

यह उपलब्धि संयुक्त निदेशक (शोध) डॉ. एस. के. सिंह के मार्गदर्शन में प्राप्त हुई, जिसमें डॉ. मुकेश सिंह, डॉ. एम. एच. खान, डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह और डॉ. अनुज चौहान सहित शोधार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आईसीएआर के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) एवं संस्थान के निदेशक डॉ. राघवेंद्र भट्टा ने कहा कि यह उपलब्धि सहायक प्रजनन तकनीकों के क्षेत्र में नवाचार को नई दिशा देगी और देश में आनुवंशिक सुधार कार्यक्रमों को गति प्रदान करेगी। वहीं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने इसे भारतीय पशुधन क्षेत्र के लिए परिवर्तनकारी कदम बताया और कहा कि इससे किसानों की आय वृद्धि और सतत कृषि विकास को बल मिलेगा।

विशेष बात यह है कि इन बछड़ों का उत्पादन उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले जर्मप्लाज्म से किया गया है। दाता साहीवाल गाय प्रतिदिन 12 लीटर से अधिक दूध देने वाली उत्कृष्ट नस्ल की थी, जबकि प्रयुक्त वीर्य ऐसे प्रमाणित सांड से लिया गया था, जिसकी माता का दुग्ध उत्पादन लगभग 3320 किलोग्राम प्रति दुग्धावधि रहा है। यह चयनित प्रजनन दृष्टिकोण स्वदेशी नस्लों की उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

गौरतलब है कि संस्थान ने वर्ष 2018 में एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक के माध्यम से स्वदेशी गोवंश प्रजनन कार्यक्रम की शुरुआत की थी, जिसके तहत इन-विवो तकनीकों से लगभग 30 बछड़ों का उत्पादन किया गया। बाद में वर्ष 2022-23 में उच्च लागत और सीमाओं को देखते हुए ओपीयू-आईवीएफ तकनीक को अपनाया गया, जो अधिक प्रभावी और व्यावहारिक साबित हुई।

आईवीआरआई भविष्य में इन अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से उत्कृष्ट स्वदेशी गोवंश और भैंसों के उत्पादन को और बढ़ाने के साथ-साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी विशेष ध्यान देगा।

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SP_Singh AURGURU Editor