उद्धव ठाकरे की शिवसेना में दूसरी बड़ी बगावत! नौ में से छह सांसद हुए अलग, स्पीकर के दरबार पहुंचा बागी खेमा

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) में दूसरी बार बड़ी टूट सामने आई है। पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसदों ने बगावत का बिगुल फूंकते हुए अलग संसदीय समूह बनाने का दावा पेश कर दिया है। बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अपना पत्र सौंप दिया है, जबकि पार्टी नेतृत्व इस टूट को रोकने के लिए अंतिम कोशिशों में जुटा हुआ है। इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।

Jun 17, 2026 - 12:35
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उद्धव ठाकरे की शिवसेना में दूसरी बड़ी बगावत! नौ में से छह सांसद हुए अलग, स्पीकर के दरबार पहुंचा बागी खेमा

नई दिल्ली। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के लिए बुधवार का दिन बड़ा राजनीतिक झटका लेकर आया। पार्टी की ओर से बुलाई गई बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल तीन सांसद ही मौजूद रहे, जबकि छह सांसद अलग रणनीति के तहत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने पहुंच गए। इन सांसदों ने अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अलग संसदीय गुट को मान्यता देने की मांग कर दी है।

बताया जा रहा है कि बागी सांसदों ने दिल्ली आने से पहले ही लोकसभा अध्यक्ष से मिलने के लिए पत्र भेजकर समय मांगा था। समय मिलने के बाद सभी सांसद महाराष्ट्र से दिल्ली पहुंचे और निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्पीकर के समक्ष अपना पक्ष रखा।

इन सांसदों ने किया बगावत का ऐलान

बागी सांसदों में संजय दीना पाटिल, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल आष्टीकर तथा राजाभाऊ वाजे के नाम सामने आए हैं। इन सांसदों ने अलग संसदीय समूह की मान्यता की मांग करते हुए अपना दावा पेश किया है।

संजय राउत का गंभीर आरोप

शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बगावत के पीछे बड़े राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि पार्टी के सांसदों को तोड़ने के लिए प्रत्येक सांसद को 15-15 करोड़ रुपये अग्रिम दिए गए हैं, जबकि पूरी डील इससे कहीं बड़ी बताई जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

टूट रोकने के लिए स्पीकर से मिले पार्टी नेता

उधर पार्टी की ओर से राज्यसभा सांसद संजय राउत, मुख्य सचेतक अनिल देसाई और संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिले। उन्होंने स्पीकर से आग्रह किया कि बागी सांसदों को अलग गुट की मान्यता न दी जाए। उनका कहना है कि यह मामला पार्टी की एकजुटता और कानूनी स्थिति से जुड़ा है तथा किसी भी निर्णय से पहले सभी संवैधानिक पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए।

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर बढ़ी हलचल

साल 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना को यह दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है। यदि छह सांसदों के अलग गुट को मान्यता मिलती है तो लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) की राजनीतिक स्थिति और कमजोर हो सकती है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं और अब लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम का इंतजार है।

SP_Singh AURGURU Editor