रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और सुपर कंप्यूटर लैब से लैस होगी शारदा यूनिवर्सिटी आगरा

शारदा यूनिवर्सिटी आगरा में आयोजित प्रेस वार्ता में कुलपति प्रो. (डॉ.) परमानंद ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय स्किल बेस्ड एजुकेशन, रिसर्च, स्टार्टअप और इंडस्ट्री रेडी ट्रेनिंग पर विशेष फोकस कर रहा है। भारतीय संस्कृति आधारित शिक्षा, आधुनिक लैब्स, विदेशी विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या और स्टार्टअप सहायता जैसी पहलें विश्वविद्यालय को नई पहचान दे रही हैं।

May 12, 2026 - 19:26
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रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और सुपर कंप्यूटर लैब से लैस होगी  शारदा यूनिवर्सिटी आगरा
शारदा यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. (डॉ.) परमानंद।

आगरा। शारदा यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. (डॉ.) परमानंद ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, रिसर्च गतिविधियों, भविष्य की योजनाओं और आधुनिक शिक्षा प्रणाली को लेकर विस्तारपूर्वक जानकारी मीडिया से साझा की।

कुलपति प्रो. (डॉ.) परमानंद ने कहा कि उनके पास इंडस्ट्री, टीचिंग और रिसर्च के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने बताया कि वे एनएएसी असेसर, एनबीए इवैल्यूएटर तथा क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के अंतर्गत नैबेट असेसर के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और रिसर्च संस्कृति को मजबूत करना है।

उन्होंने बताया कि अब तक उनके 155 से अधिक रिसर्च पेपर्स और 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा 125 से अधिक पेटेंट्स प्रकाशित किए गए हैं, जिनमें से 48 पेटेंट्स को ग्रांट भी मिल चुका है।

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें इंडस्ट्री रेडी, स्किलफुल और रिसर्च ओरिएंटेड बनाना है। इसके लिए विश्वविद्यालय में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग, स्किल डेवलपमेंट, इंडस्ट्री कोलैबोरेशन और रिसर्च आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता के अनुसार आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि शारदा यूनिवर्सिटी आगरा में शिक्षा को भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ा गया है। फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों को इंडियन नॉलेज सिस्टम से परिचित कराया जाता है, ताकि वे भारतीय संस्कारों और जीवन मूल्यों को समझ सकें।

प्रो. (डॉ.) परमानंद ने बताया कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में लगभग 15 प्रतिशत विद्यार्थी विदेशों से शिक्षा प्राप्त करने के लिए आ रहे हैं। विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक एजुकेशनल मॉडल्स तैयार किए जा रहे हैं और स्टार्टअप व प्लेसमेंट सिस्टम को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।

युवा पीढ़ी में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कुलपति ने कहा कि गलत संगति और नशे के कारण कई विद्यार्थी अपने करियर को सही दिशा नहीं दे पाते। इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय द्वारा कम्युनिटी कनेक्ट प्रोग्राम संचालित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों और उनके परिवारों की समस्याओं को समझकर समाधान निकालने का प्रयास किया जाता है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में कंपनियां केवल डिग्रीधारी युवाओं को नहीं, बल्कि स्किलफुल और प्रशिक्षित युवाओं को प्राथमिकता देती हैं। इसी सोच के साथ विद्यार्थियों को इनोवेशन और स्टार्टअप के माध्यम से समाज की समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय ऐसे युवाओं को तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है, जो नौकरी मांगने वाले नहीं बल्कि रोजगार उपलब्ध कराने वाले बनें।

कुलपति ने बताया कि यदि कोई विद्यार्थी बड़े स्तर पर इनोवेशन या स्टार्टअप पर कार्य करना चाहता है, तो विश्वविद्यालय एमएसएमई के माध्यम से लगभग 15 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा। उन्होंने कोविड काल का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय में स्थापित वायरस डिटेक्शन लैब उत्तर प्रदेश की अग्रणी लैब्स में शामिल रही। इसके अलावा सुपर कंप्यूटर लैब, रोबोटिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित आधुनिक लैब्स भी विकसित की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि यदि भारत को दोबारा “विश्व गुरु” बनाना है तो “मेक इन इंडिया” की भावना को अपनाते हुए मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन को बढ़ावा देना होगा। इंपोर्ट की तुलना में एक्सपोर्ट को मजबूत करना समय की आवश्यकता है, जिससे देश आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बन सके।

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और क्वालिटी एजुकेशन, रिसर्च, इनोवेशन तथा संस्कार आधारित शिक्षण के माध्यम से शारदा यूनिवर्सिटी आगरा को देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों में शामिल करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।