मोबाइल की स्क्रीन से शुरू हुआ बदलाव हार्मोन तक पहुंचा, देर रात की रील्स और बिगड़ी नींद बढ़ा रही महिलाओं में बांझपन का खतरा
आगरा। देर रात तक मोबाइल पर रील्स देखना, सुबह देर से उठना और लगातार बिगड़ती दिनचर्या अब सिर्फ थकान और तनाव की वजह नहीं रह गई है। डिजिटल जीवनशैली से बिगड़ रहा नींद का चक्र महिलाओं के हार्मोनल और प्रजनन स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा है। आधुनिक जीवनशैली, असंतुलित खानपान, रसायनों के बढ़ते संपर्क और नशे की प्रवृत्ति के साथ यह समस्या अब पीसीओएस से आगे पीएमओएस के व्यापक स्वरूप में सामने आ रही है, जिससे महिलाओं में बांझपन का खतरा बढ़ रहा है।
पीसीओएस को केवल ओवरी की समस्या मानना गलत
एसीई-2026 कार्यशाला में डॉ. निहारिका मल्होत्रा ने बताया कि पहले पीसीओएस को मुख्य रूप से ओवरी से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन अब यह स्पष्ट हो रहा है कि इसका प्रभाव पूरे शरीर के हार्मोनल संतुलन पर पड़ सकता है। इसमें मेटाबॉलिक सिस्टम और मस्तिष्क से जुड़े बदलाव भी भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि इसे व्यापक रूप से पीएमओएस के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन बढ़ने के पीछे केवल एक कारण जिम्मेदार नहीं है। बदलती जीवनशैली, खानपान, पर्यावरणीय रसायनों का संपर्क और नींद की खराब आदतें मिलकर समस्या को गंभीर बना सकती हैं।
रात की रील्स बिगाड़ रही जैविक घड़ी
डॉ. निहारिका ने डिजिटल जीवनशैली को महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बताया। देर रात तक मोबाइल पर सोशल मीडिया, विशेषकर इंस्टाग्राम पर रील्स देखने की आदत से नींद का समय लगातार पीछे खिसक रहा है। इसके बाद सुबह देर से उठने और दिनभर अनियमित दिनचर्या के कारण शरीर की जैविक घड़ी प्रभावित होती है।
विशेषज्ञ के अनुसार नींद और जागने का नियमित चक्र शरीर के हार्मोनल संतुलन से जुड़ा है। लंबे समय तक अनियमित नींद और दिनचर्या का असर प्रजनन क्षमता पर भी पड़ सकता है। इसलिए केवल भोजन और व्यायाम ही नहीं, बल्कि डिजिटल आदतों में सुधार भी महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
सब्जियों और फलों में रसायनों का असर भी चिंता
उन्होंने बताया कि पर्यावरणीय कारण भी हार्मोनल समस्याओं को बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं। सब्जियों, अनाज और फलों में पेस्टीसाइड और इन्सेक्टिसाइड के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण शरीर में विभिन्न रसायनों का संपर्क बढ़ रहा है। इनका प्रभाव हार्मोनल संतुलन पर पड़ने की आशंका को लेकर भी विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
नशे की बढ़ती आदत भी नुकसानदायक
महिलाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को भी चिंता का विषय बताते हुए डॉ. निहारिका ने कहा कि तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थ हार्मोनल सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे प्रजनन स्वास्थ्य प्रभावित होने के साथ बांझपन का खतरा बढ़ सकता है।
जीवनशैली में बदलाव से काफी हद तक नियंत्रण संभव
डॉ. निहारिका ने कहा कि समय रहते जीवनशैली में सुधार किया जाए तो समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए रात में समय पर सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत विकसित करनी चाहिए। मोबाइल और सोशल मीडिया के अनावश्यक इस्तेमाल, खासकर देर रात तक रील्स देखने से बचना चाहिए।
उन्होंने प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने, पैक्ड खाद्य पदार्थों से दूरी बनाने और घर से पानी की बोतल साथ रखने की सलाह दी। प्लास्टिक के कप या थैली में रखी चाय से भी परहेज करने को कहा। इसके अलावा नशे से दूर रहने और तनाव को नियंत्रित रखने पर जोर दिया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए दवाओं और उपचार के साथ जीवनशैली के इन पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है। डिजिटल युग में स्वस्थ नींद, नियमित दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली हार्मोनल स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।