मानदेय बढ़ाने की मांग पर जूता फैक्टरियों में हड़ताल, दोपहर बाद बनी सहमति
मिढ़ाकुर स्थित दो जूता फैक्टरियों में मंगलवार सुबह कारीगरों ने मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल कर दी, जिससे कामकाज पूरी तरह ठप हो गया। सूचना पर प्रशासन और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। कई घंटे चली वार्ता के बाद फैक्टरी प्रबंधन ने मजदूरों को मानदेय बढ़ाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद दोपहर करीब दो बजे कारीगर वापस काम पर लौट आए।
मिढ़ाकुर की दो फैक्टरियों में ठप रहा कामकाज, भारी पुलिस बल तैनात
आगरा। आगरा के थाना किरावली और ब्लॉक बिचपुरी क्षेत्र के कस्बा मिढ़ाकुर स्थित दो जूता फैक्टरियों में मंगलवार सुबह उस समय खलबली मच गई, जब बड़ी संख्या में कारीगरों ने मानदेय बढ़ाने और अन्य मांगों को लेकर अचानक हड़ताल कर दी। सुबह करीब नौ बजे शुरू हुई इस हड़ताल के चलते फैक्टरियों का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया और परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया।
कारीगरों का कहना था कि वे लंबे समय से मेहनताना बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रबंधन की ओर से लगातार अनदेखी की जा रही थी। नाराज मजदूरों ने मशीनें बंद कर फैक्टरी परिसर में ही प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते दोनों फैक्टरियों में उत्पादन कार्य रुक गया और स्थिति बिगड़ने की आशंका बढ़ गई।
हड़ताल की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस महकमे में हलचल मच गई। मौके पर एसडीएम सदर सचिन राजपूत, एडीसीपी क्राइम हिमांशु गौरव, एसीपी अछनेरा शैलेंद्र सिंह, एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह और एसीपी सैंया डॉ. सुकन्या शर्मा भारी पुलिस बल के साथ पहुंच गए। कई थानों की पुलिस भी एहतियातन मौके पर तैनात की गई।
अधिकारियों ने पहले मजदूरों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं, इसके बाद फैक्टरी प्रबंधन के साथ लंबी वार्ता की गई। करीब पांच घंटे तक चले गतिरोध के बाद प्रबंधन की ओर से मजदूरों को मानदेय बढ़ाने का आश्वासन दिया गया। आश्वासन मिलने के बाद कारीगर शांत हुए और दोपहर करीब दो बजे दोबारा काम पर लौट आए।
पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए रहा, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। सहायक पुलिस आयुक्त अछनेरा शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह सामान्य है और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी जारी है।
इस हड़ताल ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की वेतन संबंधी समस्याओं को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार यदि समय रहते मजदूरों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में ऐसे विवाद और बढ़ सकते हैं।