एसआईआर का यूपी की मुस्लिम बहुल सीटों पर खासा असर,  लाखों वोटर्स घटे,  अंतिम सूची में बड़ी गिरावट

यूपी एसआईआर का मुस्लिम बहुल सीटों पर भी असर दिखा है। यहां लाखों की संख्या में वोटर्स की संख्या कम हुई है। 

Apr 10, 2026 - 20:58
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एसआईआर का यूपी की मुस्लिम बहुल सीटों पर खासा असर,  लाखों वोटर्स घटे,  अंतिम सूची में बड़ी गिरावट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की कई मुस्लिम-बहुल विधानसभा सीटों पर मतदाता सूची में काफी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 10 अप्रैल 2026 की अंतिम मतदाता सूची की तुलना 27 अक्टूबर 2025 की प्री-एसआईआर सूची से करने पर पाया गया कि इन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या औसत से ज्यादा घटी है। खासकर सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर और लखनऊ के कुछ इलाकों में यह गिरावट 15 से 29 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

सबसे ज्यादा गिरावट लखनऊ सेंट्रल में 28.88 प्रतिशत, मेरठ कैंट में 27.79 प्रतिशत, बरेली कैंट में 25.95 प्रतिशत, आर्य नगर कानपुर में 25.80 प्रतिशत, बरेली में 25.10 प्रतिशत और शाहजहांपुर में 24.32 प्रतिशत रही। इनके अलावा मेरठ साउथ में 23.19 प्रतिशत, अलीगढ़ में 21.81 प्रतिशत, बहराइच में 21.87 प्रतिशत, मुरादाबाद रूरल में 18.73 प्रतिशत, चंदौसी में 18.86 प्रतिशत, रामपुर में 18.54 प्रतिशत और बदायूं में 18.10 प्रतिशत की कमी देखी गई। लखनऊ वेस्ट में भी 18.60 प्रतिशत और सहारनपुर नगर में 15.99 प्रतिशत मतदाता कम हुए। मुजफ्फरनगर में 16.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। संभल में 14.47 फीसदी वोटर्स कम हुए।

स्वार में 29270, कुंदरकी में 19,146, अमरोहा में 1,22,263 वोट कम हुए हैं। खलीलाबाद 61,496, टांडा 30,692, सीसामऊ में 50558 वोट कम हुए हैं।  पीलीभीत में 35880, शाहजहांपुर में 106061 मतदाता कम हुए हैं। नगीना में 29678, असमोली में 27319 वोटर्स कम हुए हैं। इसके साथ ही गंगोह 46072, मेरठ दक्षिण 118280 मतदाता कम हुए हैं। इसके अलावा नौगंवा सदात में 22574, कैराना में 24541, ठाकुरद्वारा में 24181 मत कम हुए हैं।

ये सभी सीटें उन इलाकों में आती हैं, जहां मुस्लिम आबादी राज्य के औसत से काफी ज्यादा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, रुहेलखंड और कुछ अन्य क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 30 से 50 प्रतिशत तक है। इन क्षेत्रों में कई सीटों पर मुस्लिम वोटर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। कुल मिलाकर पूरे उत्तर प्रदेश में औसत गिरावट 13.24 प्रतिशत रही, लेकिन इन मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों पर यह काफी ऊंची दिख रही है।