एसआईटी के खुलासे से हड़कंप संभव,  6 दिनों की पड़ताल,  15 पन्नों की रिपोर्ट और निशाने पर चंपत राय

एसआईटी रिपोर्ट में कुछ कर्मचारियों की संपत्ति में पिछले पांच वर्षों के दौरान तेजी से बढ़ोतरी का भी जिक्र किया गया है, जिसने संदेह को और गहरा कर दिया है।

Jun 24, 2026 - 21:27
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एसआईटी के खुलासे से हड़कंप संभव,  6 दिनों की पड़ताल,  15 पन्नों की रिपोर्ट और निशाने पर चंपत राय

लखनऊ। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के कथित मामले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। 6 दिनों तक चली गहन पड़ताल के बाद एसआईटी ने अपनी 15 पन्नों की शुरुआती जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। हालांकि इस रिपोर्ट को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है और इसकी आधिकारिक जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के हवाले से जो बातें निकलकर सामने आ रही हैं, वे आने वाले दिनों में बड़ा हड़कंप मचा सकती हैं।

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की इस प्राथमिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को संदिग्ध माना गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राम मंदिर में कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं। कई ऐसे कर्मचारी काम करते मिले, जिनकी नियुक्ति का कोई लिखित आदेश मौजूद नहीं था और न ही उनकी पृष्ठभूमि की ठीक से जांच की गई थी। यही नहीं, चढ़ावे की गिनती और उसकी निगरानी करने वाली प्रणाली में भी लापरवाही के संकेत मिले हैं, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे में असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बैंक स्टेटमेंट और श्रद्धालुओं की संख्या के आंकड़ों का मिलान करने पर कई बार ऐसा पाया गया कि भक्तों की संख्या बढ़ी, लेकिन चढ़ावे की रकम कम दिखाई गई। इस विसंगति को लेकर पूछताछ में यह तर्क दिया गया कि उस दौरान नोटों की बजाय सिक्कों का चढ़ावा ज्यादा था, लेकिन यह जवाब जांच एजेंसियों को संतुष्ट नहीं कर पाया।

एसआईटी रिपोर्ट में कुछ कर्मचारियों की संपत्ति में पिछले पांच वर्षों के दौरान तेजी से बढ़ोतरी का भी जिक्र किया गया है, जिसने संदेह को और गहरा कर दिया है। हालांकि सबसे बड़ी बात यह है कि जांच एजेंसी अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि कुल कितना चढ़ावा आया और उसमें से कितना कथित रूप से गायब हुआ। वजह यह है कि हर श्रद्धालु के चढ़ावे का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला, जिससे सटीक आंकड़ा तय करना मुश्किल हो गया है।

इधर, चढ़ावे के हिसाब को लेकर श्रद्धालुओं का गुस्सा भी बढ़ता जा रहा है। कई लोग सामने आकर अपने दिए गए दान का हिसाब मांग रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि एक महिला से चांदी की प्रतिमा जमा करवाई गई लेकिन उसे आज तक न तो रसीद मिली और न ही उस प्रतिमा का कोई हिसाब दिया गया। इसी तरह 200 किलो चांदी की ईंटों के गायब होने का मामला पहले ही चर्चा में है, जिससे विवाद और गहरा गया है।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला अब तेजी से तूल पकड़ रहा है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव लगातार इस मुद्दे को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इसे आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए आरोप लगाया है कि यह सिर्फ आर्थिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ धोखा है। वहीं विश्व हिंदू परिषद ने भी इस मामले में एफआईआर दर्ज करने, तेज जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग की है।