आईवीएफ की नई तकनीकों का ज्ञान लेकर लौटे विशेषज्ञ चिकित्सक, 97 शोध पत्रों के साथ एसीई 2026 का समापन
आगरा। अत्याधुनिक आईवीएफ तकनीकों, एम्ब्रियोलॉजी और सहायक प्रजनन चिकित्सा में हो रहे नए शोध पर तीन दिन तक चले व्यापक मंथन के बाद एसीई 2026 का समापन हो गया। सम्मेलन में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने उपचार को अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी बनाने वाली तकनीकों पर विचार साझा किए। आयोजन के दौरान 97 रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए गए, जबकि अंतिम दिन पोस्ट कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप्स में विशेषज्ञों ने आधुनिक लैब तकनीकों, एम्ब्रियो विजुअलाइजेशन, स्पर्म रिट्रीवल और भ्रूण के विकास से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। लाइव डेमो और इंटरएक्टिव सत्रों के जरिए प्रतिभागियों को नई तकनीकों की बारीकियां समझाई गईं।

यादेः एसीई -2026 में भाग लेने आगरा पहुंचे चिकित्सक ताजमहल के पार्श्व में।
आधुनिक तकनीकों और शोध पर हुआ मंथन
एसीई 2026 के तीन दिवसीय आयोजन में आईवीएफ, एम्ब्रियोलॉजी और एडवांस्ड प्रजनन तकनीकों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और शोध साझा किए। सम्मेलन का उद्देश्य चिकित्सा विशेषज्ञों और एम्ब्रियोलॉजिस्ट्स को नवीन तकनीकों से अपडेट करने के साथ उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना रहा।
विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से बांझपन के उपचार में सफलता की संभावनाएं लगातार बेहतर हो रही हैं। सटीक निदान, उन्नत लैब प्रक्रियाएं और भ्रूण की बेहतर निगरानी जैसी तकनीकें सहायक प्रजनन चिकित्सा में नई संभावनाएं खोल रही हैं।
पोस्ट कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप में लाइव डेमो
समापन दिवस पर आयोजित पोस्ट कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप्स में प्रतिभागियों को आधुनिक प्रजनन प्रयोगशाला से जुड़ी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। एम्ब्रियो विजुअलाइजेशन, स्पर्म रिट्रीवल और भ्रूण के विकास से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।
विशेषज्ञों ने लाइव डेमो और इंटरएक्टिव सेशन्स के माध्यम से प्रतिभागियों को तकनीकों के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया। प्रशिक्षण का मुख्य जोर उपचार की सटीकता बढ़ाने, लैब प्रक्रियाओं में गुणवत्ता बनाए रखने और मरीजों के लिए बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने पर रहा।
97 रिसर्च पेपर बने सम्मेलन का महत्वपूर्ण हिस्सा
सम्मेलन के दौरान 97 रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए गए। इन शोध पत्रों के माध्यम से आईवीएफ और एम्ब्रियोलॉजी के क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोगों, तकनीकी बदलावों और उपचार की संभावनाओं पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि अनुसंधान और प्रशिक्षण को एक साथ आगे बढ़ाना प्रजनन चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर परिणामों के लिए जरूरी है।
आयोजन समिति को किया सम्मानित
समापन अवसर पर आयोजन समिति के सदस्यों को बधाई देने के साथ सम्मानित किया गया। आयोजन सचिव डॉ. केशव मल्होत्रा ने अपनी पूरी टीम को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं और स्मृति चिह्न प्रदान किए।
एकेडमी ऑफ क्लीनिकल एम्ब्रियोलॉजिस्ट के अध्यक्ष डॉ. गौरव मजूमदार और पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुनीता रामकृष्णन ने भी आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
उपचार को सुरक्षित और प्रभावी बनाने पर जोर
सम्मेलन के तीसरे दिन का मुख्य फोकस आईवीएफ और सहायक प्रजनन उपचार को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाने पर रहा। विशेषज्ञों ने कहा कि नई तकनीकों के साथ बेहतर प्रशिक्षण और सटीक लैब प्रक्रियाओं का समन्वय मरीजों के उपचार परिणामों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति ने सम्मेलन में शामिल सभी विशेषज्ञों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। साथ ही भविष्य में भी ऐसे वैज्ञानिक मंचों के माध्यम से ज्ञान, अनुसंधान और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया।
समापन अवसर पर यह संदेश भी प्रमुखता से दिया गया कि चिकित्सा विज्ञान की प्रगति का अंतिम उद्देश्य केवल तकनीकी उपलब्धियां हासिल करना नहीं, बल्कि इन तकनीकों के माध्यम से मानव जीवन को बेहतर बनाना है।
ये रहे प्रमुख रूप से मौजूद
समापन अवसर पर डॉ. जयदीप मल्होत्रा, डॉ. नरेन्द्र मल्होत्रा, डॉ. परुषराम गोपीनाथ, डॉ. रीता वासेना, डॉ. अनुपम गुप्ता, डॉ. निहारिका, अम्बर गुप्ता, किया पाराशर, रजनी पचौरी, मीनल जैन, डॉ. सुधा बंसल, रिचा सिंह, डॉ. नीरजा सचदेव और डॉ. कृष्णा चैतन्य सहित अन्य विशेषज्ञ एवं आयोजन से जुड़े सदस्य उपस्थित रहे।