बाह में सपा की रणनीतिक बैठक बनी अखाड़ा, चुनावी दावेदारी पर भिड़े नेता

बाह में चुनाव आयोग के घेराव की रणनीति बनाने के लिए हुई सपा की बैठक में नेताओं के बीच विवाद हो गया। सुधीर दुबे और मुकेश बरुआ के बीच तीखी बहस के बाद समर्थकों में धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। दोनों नेता आगामी विधानसभा चुनाव में दावेदारी कर रहे हैं। बैठक का वीडियो सामने आने के बाद सपा के स्थानीय संगठन और संभावित चुनावी दावेदारों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Oct 5, 2026 - 11:33
 0
बाह में सपा की रणनीतिक बैठक बनी अखाड़ा, चुनावी दावेदारी पर भिड़े नेता
आपस में भिड़ते सपा पदाधिकारी।

सुधीर दुबे-मुकेश बरुआ के बीच हाथापाई की नौबत, वीडियो वायरल

आगरा/बाह। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन की रणनीति बनाने के लिए बुलाई गई समाजवादी पार्टी की बैठक में ही पार्टी के भीतर की खींचतान खुलकर सामने आ गई। बाह के बिजौली गांव स्थित एसएस गार्डन में शनिवार को हुई बैठक में सपा नेताओं के बीच तीखी बहस के बाद विवाद इतना बढ़ गया कि हाथापाई की नौबत आ गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पार्टी के अंदरूनी राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

चुनाव आयोग के घेराव की रणनीति बनाने जुटे थे नेता

बैठक का घोषित उद्देश्य 7 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के घेराव प्रदर्शन की तैयारियों और रणनीति पर चर्चा करना था। बैठक में जिला उपाध्यक्ष सुधीर दुबे, राजेश यादव, जिला सचिव आलोक यादव, महेश गुप्ता, पूर्व जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण वर्मा, विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर खैर, महेश वर्मा और सुरेश यादव समेत कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे। लेकिन रणनीतिक चर्चा के दौरान ही पार्टी नेताओं के बीच पुराना विवाद सामने आ गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 11 सितंबर को जैतपुर में सपा के राष्ट्रीय महासचिव विशंभर प्रसाद की पीडीए चौपाल को लेकर आरोप-प्रत्यारोप से बहस शुरू हुई। देखते ही देखते बातचीत तीखी नोकझोंक में बदल गई।

सुधीर दुबे और मुकेश बरुआ आमने-सामने

विवाद का केंद्र सपा जिला उपाध्यक्ष सुधीर दुबे और मुकेश बरुआ रहे। दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। उनके समर्थक भी आमने-सामने आ गए और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। वीडियो में कार्यकर्ता दोनों नेताओं को अलग करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक तौर पर इस घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दोनों नेता आगामी विधानसभा चुनाव में दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में संगठनात्मक बैठक में आमने-सामने आया विवाद केवल व्यक्तिगत कहासुनी तक सीमित है या इसके पीछे टिकट को लेकर बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा है, इस पर पार्टी के भीतर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, किसी नेता की मंशा या विवाद के कारण को लेकर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

टिकट की दावेदारी ने बढ़ाई अंदरूनी प्रतिस्पर्धा?

विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन प्रमुख दलों में संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ने लगी है। बाह विधानसभा क्षेत्र में भी पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं की राजनीतिक सक्रियता दिखाई दे रही है। ऐसे में संगठन की बैठकों में दावेदारों के बीच शक्ति-संतुलन और समर्थकों की मौजूदगी राजनीतिक संदेश का हिस्सा बन सकती है। हालांकि, सिर्फ बैठक में हुए विवाद के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि पार्टी में व्यापक स्तर पर गुटबाजी है। यह भी संभव है कि तत्काल किसी मुद्दे पर हुई कहासुनी ने स्थिति को बिगाड़ दिया हो। खुद मुकेश बरुआ ने कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी और विवाद की बात स्वीकार की, लेकिन सुधीर दुबे के साथ किसी व्यक्तिगत विवाद से इनकार किया। वहीं सुधीर दुबे ने पार्टी में लोकतंत्र होने की बात कहते हुए ऐसी घटनाओं को सामान्य बताया।

विपक्ष के प्रदर्शन की तैयारी के बीच सामने आया संगठनात्मक विवाद

दिलचस्प यह है कि जिस बैठक में सपा को चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन की रणनीति तैयार करनी थी, उसी बैठक में पार्टी के नेता आपस में उलझते नजर आए। राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनाव आयोग और मतदाता सूची के मुद्दे पर विपक्षी दलों की गतिविधियां तेज हैं। 7 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर विपक्षी दलों ने कार्यक्रम तय किए हैं। बाह की घटना ऐसे समय सामने आई है जब सपा सहित विपक्षी दल आगामी चुनावों को लेकर संगठन को सक्रिय करने में जुटे हैं। लिहाजा बैठक का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर यह सवाल जरूर उठ रहा है कि क्या चुनावी तैयारियों के साथ-साथ टिकट की दावेदारी भी पार्टी के भीतर प्रतिस्पर्धा को तेज कर रही है? फिलहाल, बैठक में हुई कहासुनी और हाथापाई की नौबत के बाद मामला चर्चा में है। पार्टी नेताओं के बयान इसे सामान्य कार्यकर्ताओं के बीच विवाद बता रहे हैं, जबकि वायरल वीडियो ने घटनाक्रम को राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया है।