एसएन में 15 साल के किशोर की कॉलर बोन के पास फटी प्रमुख रक्तवाहिनी का हुआ सफल ऑपरेशन

आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में 15 वर्षीय किशोर की दाहिनी सबक्लेवियन और एक्सिलरी आर्टरी में बने गंभीर एन्यूरिज्म की सफल सर्जरी की गई। करीब डेढ़ वर्ष पहले टेनिस बॉल से लगी चोट के बाद किशोर को धीरे-धीरे दर्द और सूजन की समस्या हुई थी। सीटी एंजियोग्राफी में रक्तवाहिनी में डिसेक्शन के साथ बड़ा एन्यूरिज्म सामने आया। 8 अगस्त को CTVS विशेषज्ञों ने क्षतिग्रस्त रक्तवाहिनी का हिस्सा हटाकर कृत्रिम ग्राफ्ट लगाया। जटिल ऑपरेशन के बाद किशोर की हालत स्थिर है और जल्द छुट्टी मिलने की उम्मीद है।

Aug 12, 2026 - 21:32
Aug 12, 2026 - 21:42
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एसएन में 15 साल के किशोर की कॉलर बोन के पास फटी प्रमुख रक्तवाहिनी का हुआ सफल ऑपरेशन
मरीज के साथ सर्जरी करने वाली टीम के सदस्य।

टेनिस बॉल की चोट के डेढ़ साल बाद बना खतरनाक एन्यूरिज्म, सीटी एंजियोग्राफी में सामने आई गंभीर बीमारी, सीटीवीएस  विशेषज्ञों ने क्षतिग्रस्त धमनी हटाकर लगाया कृत्रिम ग्राफ्ट

आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग में डॉक्टरों ने 15 वर्षीय किशोर की एक बेहद जटिल और दुर्लभ रक्तवाहिनी संबंधी बीमारी की सफल सर्जरी कर नया उदाहरण पेश किया है। किशोर की दाहिनी कॉलर बोन के पास स्थित प्रमुख रक्तवाहिनी में डिसेक्शन के साथ बड़ा एन्यूरिज्म विकसित हो गया था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि रक्तवाहिनी के फटने पर किशोर की जान को खतरा हो सकता था।

कक्षा 9 के छात्र नीतीश पिछले करीब एक वर्ष से दाहिने कंधे के नीचे दर्द और सूजन से परेशान थे। करीब डेढ़ वर्ष पहले उन्हें टेनिस बॉल से चोट लगी थी। चोट के बाद धीरे-धीरे कंधे के नीचे सूजन और दर्द की समस्या बढ़ती चली गई। करीब डेढ़ महीने पहले उन्होंने दूसरे अस्पताल में उपचार भी कराया, लेकिन अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज के CTVS विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. सुशील सिंघल के पास रेफर किया गया।

सीटी एंजियोग्राफी में सामने आई खतरनाक स्थिति

एसएन मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों ने आवश्यक जांच कराई। सीटी एंजियोग्राफी में पता चला कि दाहिनी ओर कॉलर बोन के पास स्थित सबक्लेवियन और एक्सिलरी आर्टरी में गंभीर डिसेक्शन के साथ बड़ा एन्यूरिज्म बन गया है। यानी रक्तवाहिनी की अंदरूनी दीवार क्षतिग्रस्त होकर अलग हो गई थी और प्रभावित हिस्सा असामान्य रूप से फैल चुका था। डॉक्टरों के मुताबिक, यह स्थिति बेहद गंभीर थी। एन्यूरिज्म के फटने से अचानक अत्यधिक रक्तस्राव हो सकता था और यह किशोर के लिए जानलेवा साबित हो सकता था। वहीं, प्रभावित रक्तवाहिनी हाथ में रक्त की आपूर्ति करने वाली प्रमुख धमनी से जुड़ी होने के कारण ऑपरेशन में अतिरिक्त सावधानी की जरूरत थी।

15 साल की उम्र में बेहद चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन

किशोर की कम उम्र, रक्तवाहिनियों की जटिल स्थिति और एन्यूरिज्म के आकार को देखते हुए सर्जरी को बेहद जोखिमपूर्ण माना गया। 8 अगस्त 2026 को सीटीवीएस विभाग की विशेषज्ञ टीम ने ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान क्षतिग्रस्त रक्तवाहिनी के हिस्से को हटाया गया। इसके बाद उसकी जगह कृत्रिम ग्राफ्ट लगाया गया, जिसे कॉलर बोन के पास की मुख्य धमनी से हाथ की धमनी तक जोड़ा गया। इस पूरी प्रक्रिया में चिकित्सकों ने विशेष सावधानी बरती, ताकि हाथ की महत्वपूर्ण नसों के समूह ब्रैकियल प्लेक्सस को किसी तरह की क्षति न पहुंचे। ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती एन्यूरिज्म के फटने से बचाना और हाथ तक रक्त का प्रवाह सुरक्षित बनाए रखना था। विशेषज्ञों की टीम ने सफलतापूर्वक दोनों चुनौतियों का सामना किया।

अब पूरी तरह स्थिर, जल्द मिलेगी अस्पताल से छुट्टी

सर्जरी के बाद किशोर की हालत स्थिर है। चिकित्सकों के अनुसार वह उपचार के बाद अच्छी तरह रिकवर कर रहा है और जल्द ही उसे अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की तैयारी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस प्रकार की बीमारी बच्चों और किशोरों में बेहद दुर्लभ है। मामूली चोट लगने के लंबे समय बाद प्रमुख रक्तवाहिनी में इस तरह का गंभीर डिसेक्शन और एन्यूरिज्म विकसित होना इस केस को और भी विशेष बनाता है।

कई विशेषज्ञ विभागों ने मिलकर संभाला जटिल केस

इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में सीटीवीएस, रेडियोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग की संयुक्त टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीटीवीएस टीम में डॉ. सुशील सिंघल, डॉ. विमलेश यादव, शशि प्रजापति और पूरी सीटीवीएस टीम शामिल रही। रेडियोलॉजी टीम में डॉ. हरि सिंह और डॉ. निखिल शर्मा ने जांच, सीटी एंजियोग्राफी और सर्जरी की योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं एनेस्थीसिया टीम में डॉ. योगिता द्विवेदी, डॉ. दीपिका चौबे, डॉ. दीपक दनौरिया, डॉ. प्रभा, डॉ. मनीष, डॉ. वैभव, डॉ. शाहिद, डॉ. रजत और डॉ. सिमरन सहित पूरी टीम ने ऑपरेशन के दौरान सहयोग किया।

प्राचार्य बोले—जटिल सर्जरी के लिए बड़े शहर जाने की जरूरत नहीं

एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने सफल सर्जरी के लिए चिकित्सकीय टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कॉलेज में लगातार अत्यंत जटिल और उन्नत स्तर की सर्जरी सफलतापूर्वक की जा रही हैं। इससे आगरा और आसपास के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दिल्ली जैसे बड़े शहरों का रुख करने की आवश्यकता कम हो रही है।