सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर लगाई संवैधानिक मुहर, वोटर लिस्ट शुद्ध करना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार, शक्तियों का किसी प्रकार से उल्लंघन नहीं, काटे गये नामों की नागरिकता का फैसला गृह मंत्रालय लेगा, वोटर लिस्ट शुद्धिकरण अभियान में अडंगे डाल रही कांग्रेस, टीएमसी और राजद को लगा बड़ा झटका  

नई दिल्ली। देश भर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर जारी राजनीतिक और कानूनी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि मतदाता सूची को सही, अद्यतन और पारदर्शी बनाए रखना चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व और अधिकार दोनों है। अदालत ने आयोग की कार्रवाई को वैध और कानून के अनुरूप बताते हुए एसआईआर प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दे दी।

May 27, 2026 - 15:28
 0
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर लगाई संवैधानिक मुहर, वोटर लिस्ट शुद्ध करना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार, शक्तियों का किसी प्रकार से उल्लंघन नहीं, काटे गये नामों की नागरिकता का फैसला गृह मंत्रालय लेगा, वोटर लिस्ट शुद्धिकरण अभियान में अडंगे डाल रही कांग्रेस, टीएमसी और राजद को लगा बड़ा झटका   

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि चुनाव आयोग देश भर में विशेष पुनरीक्षण अभियान चला सकता है और मतदाता सूची में गड़बड़ियों, फर्जी नामों तथा संदिग्ध प्रविष्टियों की जांच करने का अधिकार रखता है।

लोकतंत्र की शुद्धता के लिए जरूरी है एसआईआर

सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि निष्पक्ष चुनाव की सबसे मजबूत नींव सही मतदाता सूची होती है। अदालत ने माना कि एसआईआर सामान्य पुनरीक्षण प्रक्रिया से अलग जरूर है, लेकिन इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना और चुनावी पारदर्शिता बनाए रखना है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने अपनी वैधानिक सीमाओं का उल्लंघन नहीं किया और न ही अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है। अदालत की टिप्पणी को चुनाव सुधार की दिशा में बड़ा संदेश माना जा रहा है।

गैर-नागरिक संदेह वाले मामलों पर भी स्पष्ट आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हट जाने मात्र से उसकी नागरिकता स्वतः समाप्त नहीं मानी जा सकती। अदालत ने निर्देश दिया कि जिन लोगों के नाम गैर-नागरिक होने के संदेह में हटाए गए हैं, उनकी सूची चार सप्ताह के भीतर गृह मंत्रालय और विदेशी मामलों से जुड़े सक्षम ट्रिब्यूनलों को भेजी जाए।

इसके बाद संबंधित एजेंसियां दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर नागरिकता को लेकर अंतिम निर्णय लेंगी। अदालत ने साफ किया कि इस पूरी प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य होगा।

विपक्षी दलों ने लगाया था मतदाता उत्पीड़न का आरोप

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे थे। राजद सांसद मनोज झा, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, राजद नेता सुधाकर सिंह, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल समेत कई नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर आरोप लगाया था कि एसआईआर के नाम पर वास्तविक मतदाताओं को सूची से बाहर किया जा सकता है। समाजवादी पार्टी भी शुरू से ही एसआईआर पर सवाल उठाती आ रही थी।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की मंशा और प्रक्रिया दोनों को सही ठहराते हुए इन आशंकाओं को स्वीकार नहीं किया।

देशभर में तेज होगा वोटर लिस्ट अभियान

फैसले के बाद अब चुनाव आयोग को देशभर में मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान तेज करने का रास्ता साफ मिल गया है। कई राज्यों में पहले से चल रहे पुनरीक्षण अभियान को और व्यापक बनाया जाएगा। आयोग का मानना है कि इससे फर्जी मतदान, डुप्लीकेट नाम और अवैध प्रविष्टियों पर रोक लगेगी।

चुनाव आयोग को मिली बड़ी कानूनी ताकत

राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह फैसला चुनाव आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बाद अब आयोग भविष्य में भी विशेष परिस्थितियों में व्यापक पुनरीक्षण अभियान चला सकेगा।

SP_Singh AURGURU Editor