‘फिर एक के बाद एक पांच गोलियों की आवाज आई…’—‘सो एंड सो’ ने झकझोरा, किस्सा कहानी-8 में कथाकार शक्ति प्रकाश का कहानी पाठ

आगरा। पहले दरोगा ने सिपाहियों की तरफ मुस्कुराकर देखा, फिर एक के बाद एक पांच गोलियों की आवाज़ आई। जो पांच किलोमीटर तक सबने सुनी। अगले दिन उसी हाईवे पर एक पच्चीस साल का युवक मोबाइल देख रहा था, एक और एनकाउंटर, कहते हुए उसने मुस्कुराकर अपने सहयात्री पर निगाह डाली। सहयात्री ने मोबाइल पर निगाह डाली, और कौतुहलवश हाथ से मोबाइल लेकर पिक्चर जूम करने लगा। जैसे किसी को पहचानना चाहता हो।

Aug 16, 2026 - 20:10
 0
‘फिर एक के बाद एक पांच गोलियों की आवाज आई…’—‘सो एंड सो’ ने झकझोरा, किस्सा कहानी-8 में कथाकार शक्ति प्रकाश का कहानी पाठ
रंगलीला और पत्रिका कथादेश द्वारा शीरोज़ हैंगआउट कैफे में रविवार को कहानी पाठ के दौरान मौजूद कथाकार शक्ति प्रकाश और स्थानीय साहित्यसेवी।

ये अंश है वरिष्ठ कथाकार शक्ति प्रकाश की कहानी "सो एंड सो" का, जो आज यहां किस्सा कहानी -8 में अपनी कहानी का पाठ कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन रंगलीला और नई दिल्ली की कहानी पत्रिका कथादेश द्वारा शीरोज़ हैंगआउट कैफे में किया गया था। रंगलीला के निर्देशक अनिल शुक्ल ने इस कार्यक्रम की प्रगति और इसके उद्देशों पर प्रकाश डाला।

कहानी और समाज के सच पर हुआ विमर्श

कथा पाठ से पहले ‘कहानी और समाज का सच’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। विषय प्रवर्तन केंद्रीय हिंदी संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. रामवीर सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि भारतीय कहानी में जीवन के सच को सामने रखने की शुरुआत मुंशी प्रेमचंद ने की। उन्होंने मेरी और आपकी कहानी कहनी शुरू की और बाद के कहानीकारों ने भी प्रेमचंद की इसी धारा को आगे बढ़ाया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कथाकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता रामनाथ शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि शक्ति प्रकाश की कहानी में यथार्थ पूरी तरह मौजूद है। उन्होंने कहा कि अस्सी के दशक में लेखक राजनीति से दूरी बनाए रखता था, लेकिन आज लेखक राजनीति पर अपनी प्रभावी प्रतिक्रिया देता है।

कहानी ने उठाए लोकतंत्र और आम आदमी के सवाल

कहानी पाठ के बाद मौजूद सुधी श्रोताओं ने कथाकार शक्ति प्रकाश से सवाल किए और कहानी से जुड़ी अपनी जिज्ञासाओं को सामने रखा। संवाद के दौरान कहानी में उठाए गए समकालीन विषयों और उसके सामाजिक प्रभाव पर चर्चा हुई।

आरबीएस कॉलेज के प्रो. इंद्र कुमार यादव ने कहा कि कहानी में मौजूदा विषयों को उठाया गया है। श्री कृष्ण ने कहा कि कहानी मौजूदा लोकतंत्र की चुनौतियों को रेखांकित करती है। सीमान्त साहू ने कहानी में जन-जन की आवाज को व्यक्त किए जाने की सराहना की।

ब्रिगेडियर विनोद दत्ता ने कहा कि आज उपभोक्तावादी संस्कृति ने हर चीज तुरंत हासिल करने की चाह बढ़ा दी है। रमेश पंडित ने कहा कि कहानी सुनने के बाद महसूस हुआ कि इसकी भाषा देसज है, जो साहित्य को आम आदमी तक पहुंचाने के लिए बेहद जरूरी है।

विशाल रियाज ने कहा कि आवाज दबाए जाने के दौर में यह कहानी आम आदमी की आवाज को उठाती हुई दिखाई देती है।

कहानी पाठ के बाद श्रोताओं और कथाकार के बीच हुए सवाल-जवाब ने कार्यक्रम को संवाद का स्वरूप दिया। कहानी के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक यथार्थ पर हुई चर्चा देर तक जारी रही।

कार्यक्रम में आकाशवाणी आगरा के पूर्व निदेशक नीरज जैन, शीरोज़ हैंग आउट के अजय तोमर, रामभरत उपाध्याय, डॉ. महेश धाकड़, डॉ. मधु भारद्वाज, वंदना तिवारी, मालती कुशवाह, अमरजीत सिंह, ज्योति खंडेलवाल, विशाल झा, मनु भाई पंड्या, दिनेश, सिद्धेश अरोरा, मोहम्मद आरिफ, हिना, शिव नारायण सिंह, अजय पचौरी और रोमी चौहान सहित अन्य साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

रमेश पंडित ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन अर्जुन सवेदिया ने किया।

SP_Singh AURGURU Editor