आगरा के पं. योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ और आचार्य हरिओम समेत 28 विभूतियों को मिलेगा ‘रामायणी सम्मान’, सूची में अनूप जलोटा और अनुराधा पौडवाल के भी नाम, 19 अगस्त को बीएचयू वाराणसी में होगा राष्ट्रीय समारोह

आगरा। रामायण, भारतीय संस्कृति, साहित्य, अध्यात्म और रामकथा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली देशभर की 28 विभूतियों को ‘रामायणी सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा। इनमें आगरा के वरिष्ठ कवि, साहित्यकार और राम काव्य मर्मज्ञ पं. योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ के साथ प्रख्यात भजन गायक अनूप जलोटा और सुप्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल भी शामिल हैं। रामायण रिसर्च काउंसिल की ओर से गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर 19 अगस्त 2026 को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी स्थित मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में भारतीय अध्ययन केंद्र के सहयोग से राष्ट्रीय ‘रामायणी सम्मान’ समारोह आयोजित किया जाएगा।

Aug 10, 2026 - 19:48
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आगरा के पं. योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ और आचार्य हरिओम समेत 28 विभूतियों को मिलेगा ‘रामायणी सम्मान’, सूची में अनूप जलोटा और अनुराधा पौडवाल के भी नाम, 19 अगस्त को बीएचयू वाराणसी में होगा राष्ट्रीय समारोह
पं. योगेश चंद्र शर्मा और आचार्य हरिओम।

रामायणी सम्मान के संयोजक एवं रामायण रिसर्च काउंसिल के ट्रस्टी तथा आगरा निवासी सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. देव दत्त शर्मा ने बताया कि इस वर्ष सम्मान के लिए सात श्रेणियां निर्धारित की गई थीं। इनमें रामायण शोध सम्मान, रामकथा वाचन सम्मान, रामायण साहित्य सम्मान, रामायण संगीत सम्मान, बाल रामायणी सम्मान, राष्ट्रसेवा रामायणी सम्मान तथा श्रीसीताराम-पथिक सम्मान शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि 9 जुलाई से 26 जुलाई तक चली नामांकन प्रक्रिया में गूगल फॉर्म, ई-मेल और कूरियर के माध्यम से देशभर से 250 से अधिक नामांकन प्राप्त हुए। चयन समिति ने निर्धारित मानकों के आधार पर सभी नामांकनों का परीक्षण और विस्तृत विचार-विमर्श किया। इसके बाद 28 विभूतियों का चयन किया गया है।

आगरा के पं. योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ भी सम्मानित

सम्मान पाने वालों में आगरा के लॉयर्स कॉलोनी निवासी पं. योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ का चयन विशेष रूप से उल्लेखनीय है। भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त पं. शर्मा वरिष्ठ कवि, साहित्यकार और राम काव्य मर्मज्ञ हैं। इसके अलावा आचार्य हरिओम (हाथरस) का भी कार्यक्षेत्र आगरा रहा है।

चयनित 28 विभूतियों में अनूप जलोटा, अनुराधा पौडवाल, आर.के. सिन्हा (बिहार), स्व. किशोर कुणाल (पटना, बिहार) मरणोपरांत, जिनका सम्मान उनके सुपुत्र सायन कुणाल प्राप्त करेंगे, डॉ. अर्चना प्रकाश (लखनऊ), भगवान दास (दिल्ली), डॉ. उदय प्रताप सिंह (वाराणसी), डॉ. अवधि हरि (लखनऊ), योगेश्वर प्रसाद देवरानी (नैनीताल), आदित्य जैन (नीमच), अभय माणके (इंदौर), संत श्री हरिओम (हाथरस), नरेंद्रनाथ गगन (बिहार), पं. योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ (आगरा), संजीव (बिहार), डॉ. आशा ओझा (बिहार), मदगुल्ला प्रफुल्ला (आंध्र प्रदेश), बिनोद कुमार तिवारी (झारखंड), डॉ. चंद्र प्रभा मदान (हरियाणा), आचार्य संतोष पांडेय (राजस्थान), अजय याग्निक (दिल्ली), विंध्याचल मणि त्रिपाठी (उत्तर प्रदेश), राजराधे कृष्ण शर्मा (महाराष्ट्र), प्रेम प्रकाश दुबे (महाराष्ट्र), त्रिलोकी नाथ पांडेय (उत्तर प्रदेश), रामधनी द्विवेदी (उत्तर प्रदेश), डॉ. रविशंकर पांडेय (उत्तर प्रदेश) और रेखा मेहरा (नई दिल्ली) शामिल हैं।

रामायण परंपरा को राष्ट्रीय मंच देने का उद्देश्य

रामायण रिसर्च काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी अध्यक्ष एवं नैनीताल-उधमसिंहनगर से सांसद अजय भट्ट ने कहा कि ‘रामायणी सम्मान’ का उद्देश्य रामायण आधारित उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तित्वों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करना है। इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, साहित्य, शोध, रामकथा, संगीत और सामाजिक जागरण से जुड़े योगदान को प्रोत्साहित करने के साथ नई पीढ़ी को रामायण साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

काशी में आयोजन को बताया गौरव का अवसर

साध्वी प्रज्ञा भारती ने कहा कि तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस का लेखन मुख्य रूप से काशी की पवित्र धरती पर किया। ऐसे में काशी में रामायणी सम्मान का आयोजन गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि सावन के पवित्र महीने में बाबा विश्वनाथ की धरती, मां गंगा के तट और श्रीहनुमानजी की कृपा के बीच होने वाला यह आयोजन रामायण परंपरा को नई ऊर्जा देगा।

रामायण रिसर्च काउंसिल के अनुसार, काउंसिल ने कोरोनाकाल में देशभर में डिजिटल रामलीला का आयोजन किया था। अयोध्या में श्रीराम मंदिर संघर्ष पर आधारित 1250 पृष्ठों का ग्रंथ ‘श्रीरामलला-मन से मंदिर तक’ तैयार किया गया है। संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए पाक्षिक पत्रिका ‘रामायण वार्ता’ का प्रकाशन भी किया जा रहा है।

काउंसिल की ओर से सीतामढ़ी में भी धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद की ओर से श्रीरामजानकी स्थान पर 12 एकड़ भूमि आवंटित किए जाने के बाद यहां 51 शक्तिपीठों की मिट्टी और ज्योत से अखंड ज्योत स्थापित करने तथा चतुर्भुजा महालक्ष्मी की स्थापना की योजना है। 29 जुलाई 2026 से प्राचीन मठ के जीर्णोद्धार का कार्य भी शुरू होने की जानकारी दी गई है।

काउंसिल के महासचिव कुमार सुशांत और सचिव पिताम्बर मिश्र ने संत-महात्माओं, विद्वानों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, साहित्यकारों, रामकथाकारों, कलाकारों और प्रबुद्ध नागरिकों से 19 अगस्त को बीएचयू, वाराणसी में होने वाले राष्ट्रीय सम्मान समारोह में सहभागिता का आग्रह किया है।

SP_Singh AURGURU Editor