गीता के ज्ञान से जीवन बदलने का संदेश, आगरा में दो दिवसीय सेमिनार शुरू, सैकड़ों साधकों ने चार सत्रों में समझे कर्म, ज्ञान, ध्यान और आत्मसंयम के सूत्र, युवाओं की भागीदारी रही खास
आगरा। श्रीमद्भगवद्गीता को केवल धार्मिक ग्रंथ के रूप में पढ़ने के बजाय उसके संदेशों को दैनिक जीवन में उतारने की जरूरत है। गीता के ज्ञान से व्यक्ति अपने आचरण, सोच और कर्म में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। इसी उद्देश्य से गीता परिचय अभियान, जयपुर के तत्वावधान में आगरा शाखा द्वारा आयोजित दो दिवसीय आगरा गीता सेमिनार का शनिवार को महाराजा अग्रसेन भवन, लोहामंडी में शुभारंभ हुआ। पहले दिन चार सत्रों में गीता के विभिन्न अध्यायों पर व्याख्यान हुए, जिनमें राजस्थान, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और एनसीआर समेत विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों साधकों ने सहभागिता की।
उद्घाटन श्रीकृष्ण की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद गीता के अध्यायों के माध्यम से जीवन में कर्म, ज्ञान, आत्मसंयम, ध्यान और आध्यात्मिक चेतना की भूमिका समझाई गई।
अर्जुन के द्वंद्व से स्थितप्रज्ञता तक
जयपुर से आए विशेषज्ञ सुधीर यादव ने प्रथम और द्वितीय अध्याय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अर्जुनविषाद योग मनुष्य के मानसिक द्वंद्व को सामने रखता है, जबकि सांख्य योग आत्मज्ञान, स्थितप्रज्ञता और कर्तव्यपालन की प्रेरणा देता है।
भीलवाड़ा से आए बीएस नाकलक ने तृतीय, चतुर्थ, सप्तम और अष्टम अध्यायों का विवेचन किया। उन्होंने कर्मयोग, ज्ञान, ईश्वर के स्वरूप और आध्यात्मिक जीवन के महत्व को समझाया।
कर्म से आत्मसंयम और ध्यान तक
आगरा एयरपोर्ट के जनरल मैनेजर अनूप श्रीवास्तव ने पांचवें और छठे अध्याय पर व्याख्यान देते हुए कर्मसंन्यास, आत्मसंयम और ध्यान के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि गीता का ज्ञान व्यक्ति को स्वयं के भीतर झांकने और अपने आचरण को शुद्ध करने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि गंगा में स्नान से पाप नष्ट होने की मान्यता है, लेकिन गीता के ज्ञान में स्नान करने से पाप करने की प्रवृत्ति समाप्त होने लगती है। संयम से अंतःकरण शुद्ध होता है और आसक्ति से मुक्ति मिलती है। श्रीमद्भगवद्गीता स्वयं के जीवन में परिवर्तन लाने का मार्ग है।
सहायक आयुक्त भविष्य निधि मिथिलेश चौधरी ने संकीर्तन के साथ श्रीमद्भगवद्गीता के महत्व पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान श्लोकों के सामूहिक उच्चारण और संकीर्तन से सभागार भक्तिमय बना रहा।
सेमिनार में प्रवेश के साथ सभी प्रतिभागियों को गीता अध्ययन सामग्री निःशुल्क प्रदान की गई। प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से श्लोकों का पाठ किया और गीता के संदेशों को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।
युवाओं को भी आकर्षित कर रहा गीता का संदेश
सेमिनार में युवाओं की सहभागिता विशेष आकर्षण रही। 23 वर्षीय शुभम चौहान ने बताया कि वे बचपन से गीता का पाठ कर रहे हैं। उनके अनुसार श्रीमद्भगवद्गीता जीवन प्रबंधन की संपूर्ण मार्गदर्शिका है।
अलीगढ़ से पहली बार आईं 13 वर्षीय छात्रा प्रीशा ने कहा कि गीता के बारे में जो भी सुनने को मिलता है, वह अच्छा लगता है। आगरा की 15 वर्षीय छात्रा भव्या भारती लगातार तीसरी बार सेमिनार में शामिल हुईं। उन्होंने बताया कि वे प्रतिदिन गीता के कुछ श्लोक याद करती हैं।
रविवार को होंगे नौवें से 18वें अध्याय तक के सत्र
सेमिनार के दूसरे दिन रविवार को नवम से अष्टादश अध्याय तक के पाठ और व्याख्यान होंगे। इनमें राजविद्याराजगुह्य योग, विभूतियोग, विश्वरूपदर्शन योग, भक्तियोग, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभाग योग, गुणत्रयविभाग योग, पुरुषोत्तम योग, दैवासुरसम्पद्विभाग योग, श्रद्धात्रयविभाग योग और मोक्षसंन्यास योग के माध्यम से भक्ति, आत्मज्ञान, गुणों, श्रद्धा, कर्म और मोक्ष के संदेशों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में आरएस गुप्ता, संजय वार्ष्णेय, पुष्पेंद्र पाल सिंह, साक्षी गोपाल, संजय यादव, पीके अग्रवाल, अजय जैन, महावीर सिंह, लक्ष्मी नारायण, संजय बघेल, जयप्रकाश, सीमा अग्रवाल, संतोष वर्मा, मीना गुप्ता और इंदु कुलश्रेष्ठ आदि उपस्थित रहे।