शादी का बाजार बदला: बैंक्वेट से लग्जरी मार्की और फोटो से सिनेमैटिक फिल्म तक पहुंची डिमांड, ग्राहक की पसंद के हिसाब से पैकेज और डिजाइन कस्टमाइज करने पर जोर
आगरा। भारतीय शादी अब सिर्फ रस्मों और समारोह तक सीमित नहीं रह गई है। ग्राहक शादी को ऐसा अनुभव बनाना चाहता है, जो भव्य होने के साथ सोशल मीडिया पर भी आकर्षक दिखे। बैंक्वेट हॉल की जगह लग्जरी मार्की, पारंपरिक फोटोग्राफी की जगह सिनेमैटिक शूट और सामान्य सजावट की जगह थीम बेस्ड व फोटो-जेनिक डेकोर की बढ़ती मांग ने वेडिंग इंडस्ट्री का स्वरूप बदल दिया है। विशेषज्ञों ने कहा कि ग्राहक की बदलती पसंद के अनुसार पैकेज और डिजाइन कस्टमाइज करना अब जरूरी हो गया है।
वेडिंग इंडस्ट्री एसोसिएशन यूपी की ओर से शनिवार को होटल ताजव्यू, आगरा में ‘द फ्यूचर ऑफ वेडिंग इंडस्ट्री’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें वेडिंग इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों ने नए ट्रेंड, ग्राहक की मांग और भविष्य की संभावनाओं पर मंथन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
दीप प्रज्वलन में अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, महासचिव संदीप उपाध्याय, पर्यटन एवं वेडिंग सेक्टर विशेषज्ञ तथा होटल ताजव्यू के महाप्रबंधक शांतनु घोष, डायरेक्टर सेल्स शोहिव खान, होटल सेल्स मैनेजर देव चौधरी, शुभम स्वरूप, संरक्षक संजय अग्रवाल, राजेश गोयल, उपाध्यक्ष सौरभ सिंगल और पंकज गोयल प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
बैंक्वेट से लग्जरी मार्की की ओर बढ़ी मांग
पहले सत्र में विमल गोयल, दिलीप गुप्ता, विपिन गुप्ता, सचिन अग्रवाल और अमरीश भारद्वाज ने लग्जरी मार्की के बढ़ते ट्रेंड पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि ग्राहक अब बैंक्वेट हॉल की अपेक्षा लग्जरी मार्की को प्राथमिकता दे रहा है। पांच सितारा जैसी सुविधाओं, ओपन एयर माहौल, पूरी तरह एसी व्यवस्था और बड़े स्पान वाली मार्की की मांग बढ़ी है। भारतीय शादियों में 800 से 1500 मेहमानों के कारण यह नया मानक बनती जा रही है। ग्राहक चाहता है कि शादी महल जैसी नहीं, बल्कि निजी लग्जरी डेस्टिनेशन जैसी महसूस हो।
डेकोरेटर की भूमिका बदली
डेकोरेटर एवं डेकोर डिजाइन सत्र का मॉडरेशन सौरभ सिंघल ने किया। इसमें तरुन अग्रवाल जॉनी, विमल गोयल (बिजी क्राफ्ट), रिया शर्मा और अरुण सक्सेना प्रमुख रूप से शामिल रहे। वक्ताओं ने कहा कि ग्राहक Pinterest और Instagram से डिजाइन के आइडिया लेकर आता है। डेकोर में थीम बेस्ड डिजाइन के साथ साउथ इंडियन, राजवाड़ा और बॉलीवुड थीम की मांग बढ़ रही है। फोटो और रील्स में आकर्षक दिखने वाले डेकोर की चाहत ने डेकोरेटर की भूमिका को वेडिंग डिजाइनर में बदल दिया है।
रील्स और इंस्टाग्राम तय कर रहे शादी का अंदाज
सोशल मीडिया के प्रभाव पर हुए सत्र में देवेश पूरी और यश शिवहरे मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने कहा कि दूल्हा-दुल्हन अब ऐसी शादी चाहते हैं, जिसकी रील आकर्षक और वायरल होने लायक हो। वेन्यू, डेकोर और फोटोग्राफी का चयन भी इस आधार पर होने लगा है कि वह Instagram पर कैसा दिखाई देगा। इसलिए वेडिंग इंडस्ट्री को सोशल मीडिया फ्रेंडली काम पर जोर देना होगा।
फोटोग्राफी में एल्बम नहीं, पूरी फिल्म की मांग
वेडिंग फोटोग्राफी सत्र में पुनीत भोजवानी, अमित जैन और सिमर सिंह ने बदलते रुझानों पर विचार रखे। उन्होंने बताया कि पारंपरिक फोटो-वीडियो के बजाय अब सिनेमैटिक शूट, कैंडिड फोटोग्राफी, ड्रोन शॉट, सेम-डे एडिट और रील एडिट की मांग है। भारतीय शादियों की भावनाओं को देखते हुए फोटोग्राफर को स्टोरीटेलर की भूमिका निभानी पड़ रही है। ग्राहक अब केवल एल्बम नहीं, बल्कि शादी की पूरी फिल्म चाहता है।
उत्तर प्रदेश को वेडिंग डेस्टिनेशन बनाने पर जोर
अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने कहा कि संगठन का प्रयास है—‘उत्तर प्रदेश शादियों के लिए उत्तर प्रदेश’। ग्राहक की बदलती मांग और लेटेस्ट ट्रेंड के साथ चलना जरूरी है, वरना भारतीय शादियों का बाजार दूसरे स्थानों की ओर चला जाएगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश को वेडिंग डेस्टिनेशन स्टेट बनाने पर जोर दिया।
महासचिव संदीप उपाध्याय ने कहा कि आने वाला समय कोलेबोरेशन का है। सभी वेंडर्स को मिलकर ग्राहक को 360 डिग्री एक्सपीरियंस देना होगा। कार्यक्रम का समापन एडमिनिस्ट्रेटर अनिल सविता के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। व्यवस्था एक्सपर्ट इवेंट के शिरीष सिन्हा, विनीत गोयल आदि ने संभाली।