लंदन में टेम्स के किनारे गंगा आरती, आगरा से दुनिया को संदेश—नदियां बचेंगी, तभी सभ्यताएं बचेंगी
लंदन। क्या गंगा की आरती टेम्स के किनारे हो सकती है? रविवार को लंदन में इसका सुंदर जवाब देखने को मिलेगा। ग्रीनविच के ऐतिहासिक ओल्ड रॉयल नेवल कॉलेज में गंगा आरती का विशेष आयोजन किया जा रहा है।
चिन्मय मिशन यूके द्वारा टोटली टेम्स के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम रविवार को शाम चार बजे से रात आठ बजे तक चलेगा। इसका मुख्य आकर्षण शाम 7:15 बजे रॉयल स्टेप्स पर होने वाली गंगा आरती होगी।
आगरा के रिवर कनेक्ट कैंपेन के संयोजक बृज खंडेलवाल ने इस आयोजन का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि दुनिया की नदियों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का संदेश भी है।
उन्होंने कहा कि “गंगा की आरती टेम्स के किनारे होना भारतीय नदी संस्कृति और ब्रिटेन की ऐतिहासिक नदी संस्कृति का सुंदर संगम है। यमुना से टेम्स तक हमारा संदेश एक ही है—नदियां केवल पानी की धाराएं नहीं, बल्कि जीवन की रेखाएं हैं।”
रिवर कनेक्ट कैंपेन पिछले एक दशक से यमुना को स्वच्छ, अविरल और जीवंत बनाने की मुहिम चला रहा है। अभियान का मानना है कि नदी को केवल पूजा की वस्तु नहीं, बल्कि जीवित पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में देखना होगा।
बृज खंडेलवाल ने कहा कि भारत में गंगा और यमुना के किनारे आरती की परंपरा सदियों पुरानी है। अब टेम्स के किनारे यह परंपरा पहुंचना दुनिया को यह याद दिलाने का अवसर है कि नदियों की सीमाएं नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि दीप जलाना आस्था है, लेकिन नदी को स्वच्छ और अविरल रखना हमारी जिम्मेदारी है। अगर नदी में गंदा पानी गिरता रहे और हम केवल आरती करते रहें, तो नदी एक दिन हमसे सवाल जरूर पूछेगी।
रिवर कनेक्ट कैंपेन इस अवसर को अपने संदेश “केयरिंग फॉर लाइफ लाइन्स—फ्रॉम यमुना टू टेम्स” से जोड़ता है। अभियान का कहना है कि दुनिया की नदियां अलग-अलग नामों से जानी जाती हैं, लेकिन उनकी चुनौतियां लगभग एक जैसी हैं—प्रदूषण, अतिक्रमण, घटता प्रवाह और बढ़ता मानवीय दबाव।
टेम्स के किनारे जब दीप जलेंगे और गंगा आरती की धुन गूंजेगी, तब यह दृश्य केवल भारतीय संस्कृति का प्रदर्शन नहीं होगा। यह उस साझा जिम्मेदारी की याद भी दिलाएगा, जो हर समाज की अपनी नदी के प्रति है। गंगा से टेम्स और यमुना से दुनिया तक संदेश साफ है—नदियां बचेंगी, तभी सभ्यताएं बचेंगी।