एसएन मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, काउंटरों की कमी, जांच में देरी और दवाओं की व्यवस्था खस्ताहाल
आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर स्वतंत्र चिंतक एवं समाजसेवी पं. दिलीप पाठक ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये के संसाधनों वाले सरकारी चिकित्सा संस्थान में मरीजों को पर्चा बनवाने, चिकित्सक को दिखाने, जांच कराने और दवा लेने तक के लिए लंबी कतारों और अव्यवस्थाओं से गुजरना पड़ता है। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा मरीजों को बेहतर और निशुल्क चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
पर्चा बनवाने में घंटों इंतजार
पं. दिलीप पाठक के अनुसार इमरजेंसी के रिसेप्शन पर एक रुपये के पर्चे के लिए महिला और पुरुषों के लिए दो काउंटर हैं। प्रत्येक काउंटर पर तीन-तीन खिड़कियां होने के बावजूद उनके अनुसार अक्सर एक-एक खिड़की ही संचालित होती है। इससे मरीजों और तीमारदारों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने काउंटरों की संख्या बढ़ाने और सभी उपलब्ध खिड़कियां संचालित कराने की मांग की।
चिकित्सकीय परामर्श पर भी सवाल
उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित विभागों में मरीजों को पर्चे पर मोहर लगवाने के बाद कतार में खड़ा होना पड़ता है और चिकित्सक तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। उनका कहना है कि मरीजों को पर्याप्त समय देकर उनकी समस्या समझने के बजाय कई बार जल्दबाजी में दवा और जांच लिख दी जाती है। उन्होंने चिकित्सकों की कार्यप्रणाली की निगरानी और मरीजों की संतुष्टि को प्राथमिकता देने की मांग की।
जांच व्यवस्था पर उठाई आपत्ति
पाठक ने बताया कि जांच के लिए भी सीमित काउंटर होने के कारण मरीजों को कतार में लगना पड़ता है। उनका आरोप है कि आईसीयू जैसे गंभीर मरीजों के तीमारदारों को भी पंजीकरण, नमूना देने और रिपोर्ट के लिए कई चरणों से गुजरना पड़ता है तथा रिपोर्ट मिलने में समय लग जाता है। उन्होंने गंभीर मरीजों की जांच की तत्काल व्यवस्था और सभी आवश्यक जांच अस्पताल परिसर में निशुल्क उपलब्ध कराने की मांग की।
एक्स-रे और दवाओं की व्यवस्था पर सवाल
उन्होंने विभिन्न विभागों में एक्स-रे मशीनों के खराब होने और मरीजों को बाहर से जांच कराने के लिए भेजे जाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार दवा काउंटरों पर भी लंबी कतारें रहती हैं और कुछ दवाएं मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। उन्होंने सभी आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा दवा वितरण व्यवस्था की नियमित निगरानी की मांग की।
निजी अस्पतालों में रेफर करने के आरोप
पाठक ने कुछ मरीजों के अनुभवों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल में उपचार के बावजूद कुछ मरीजों को निजी अस्पतालों या चिकित्सकों के पास जाने की सलाह दी जाती है। उन्होंने रामबाग क्षेत्र के एक दंपती का उदाहरण देते हुए कहा कि महिला के हाथ में फ्रैक्चर और सीने में गांठ की समस्या थी। उनके अनुसार निजी अस्पताल में ऑपरेशन के लिए 36 हजार रुपये और एसएन मेडिकल कॉलेज में 30 हजार रुपये मांगे जाने की बात सामने आई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग
पं. दिलीप पाठक ने मांग की कि पंजीकरण, जांच और दवा वितरण के काउंटर बढ़ाए जाएं, सभी आवश्यक जांच और एक्स-रे अस्पताल परिसर में उपलब्ध कराए जाएं तथा पात्र मरीजों को निशुल्क सुविधा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने विभागाध्यक्षों की नियमित उपलब्धता, चिकित्सकों और कर्मचारियों के व्यवहार की निगरानी तथा निर्माण एवं चिकित्सा व्यवस्थाओं का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत आंखों देखी स्थिति और मरीजों से मिली शिकायतों पर आधारित चिंता है। साथ ही उन्होंने शासन और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।