वंदे मातरम् पर उलमा-ए-अहले सुन्नत का दो टूक रुख, बरेली की बैठक में कहा- मुसलमानों को इससे छूट मिले

-आरके सिंह- बरेली। वंदे मातरम् को लेकर देश में जारी चर्चा के बीच उलेमा-ए-अहले सुन्नत ने मुसलमानों को इससे स्पष्ट रूप से छूट देने की मांग उठाई है। बरेली में सोमवार को हुई उलमा-ए-अहले सुन्नत की महत्वपूर्ण बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कई उलमाओं ने हिस्सा लिया। बैठक में वंदे मातरम् को लेकर सरकार की नीति पर नाराजगी जताते हुए कहा गया कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है और किसी भी समुदाय को उसकी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत कोई कार्य करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।

Aug 10, 2026 - 19:10
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वंदे मातरम् पर उलमा-ए-अहले सुन्नत का दो टूक रुख, बरेली की बैठक में कहा- मुसलमानों को इससे छूट मिले
बरेली में सोमवार को हुई उलमा-ए-अहले सुन्नत की बैठक में विचार रखते रजा अकादमी के प्रमुख हाजी मोहम्मद सईद नूरी और अन्य।

बैठक की अध्यक्षता रजा अकादमी के प्रमुख हाजी मोहम्मद सईद नूरी ने की। उलमा ने कहा कि वंदे मातरम् के कुछ हिस्से मुस्लिम धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं हैं। ऐसे में मुसलमानों को इसे गाने के लिए बाध्य करना उनकी धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के विपरीत होगा। बैठक में सरकार से मांग की गई कि मुसलमानों को वंदे मातरम् से स्पष्ट रूप से छूट देने की व्यवस्था की जाए।

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार सुरक्षित रखने पर जोर

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि भारत अनेक धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं वाला देश है। देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था सभी नागरिकों को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता प्रदान करती है। इसलिए किसी भी व्यक्ति या समुदाय पर उसकी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ कोई कार्य करने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।

उलेमा का कहना था कि राष्ट्र के प्रति सम्मान और धार्मिक आस्था दोनों अपने-अपने स्थान पर महत्वपूर्ण हैं। सरकार को ऐसी नीति अपनानी चाहिए जिससे किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत न हों और देश में आपसी सद्भाव कायम रहे।

हाजी मोहम्मद सईद नूरी ने कहा—सभी धर्मों का समान सम्मान जरूरी

रजा अकादमी के प्रमुख हाजी मोहम्मद सईद नूरी ने कहा कि भारत विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं वाला देश है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी धर्मों और समुदायों की धार्मिक भावनाओं का समान रूप से सम्मान करे। उन्होंने कहा कि किसी एक वर्ग को खुश करने के लिए दूसरे वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए।

उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि मुसलमानों को वंदे मातरम् पढ़ने से स्पष्ट रूप से छूट दी जानी चाहिए। उनका कहना था कि संविधान में मिले अधिकारों की भावना के अनुरूप सभी समुदायों के विश्वास और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान किया जाना आवश्यक है।

देशभर से पहुंचे उलमा

बैठक में मौलाना मुफ्ती फैज़ अहमद मिस्बाही नागपुर, मौलाना इजाज़ अहमद कश्मीरी, मौलाना अमानुल्लाह, मौलाना अब्बास रज़वी, मौलाना आमिर मिशाही, मौलाना इमरान मज़हर बरकाती और मौलाना सादिर सक़ाफी समेत कई उलमा मौजूद रहे।

SP_Singh AURGURU Editor