आंबेडकर विवि में दिनदहाड़े खूनी बवाल, बाहरी दबंग कैंपस में घुसे, दो छात्रों पर धारदार हथियार से हमला

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर में सोमवार को मामूली कहासुनी के बाद विवाद हिंसक हो गया। आरोप है कि एक छात्र ने फोन कर 20 से अधिक बाहरी युवकों को बुलाया, जिन्होंने बीएससी के दो छात्रों को घेरकर धारदार हथियार से हमला कर दिया। दोनों छात्र गंभीर रूप से घायल हुए। घटना के दौरान सुरक्षा गार्डों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। न्यू आगरा पुलिस मौके पर पहुंची और घायल छात्रों की तहरीर पर जांच शुरू की। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुख्य गेट पर आईडी चेकिंग और प्रवेश व्यवस्था सख्त कर दी है।

Oct 5, 2026 - 14:28
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आंबेडकर विवि में दिनदहाड़े खूनी बवाल, बाहरी दबंग कैंपस में घुसे, दो छात्रों पर धारदार हथियार से हमला
आपस में मारपीट करते दो गुटों के छात्र।

गाली-गलौज से शुरू हुआ विवाद बना हिंसक संघर्ष; दोनों छात्रों के सिर फोड़े, सुरक्षा गार्ड देखते रहे तमाशा—बाहरी युवकों की कैंपस में एंट्री पर उठे गंभीर सवाल

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर में सोमवार को दिनदहाड़े हुई मारपीट की घटना ने विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मामूली कहासुनी से शुरू हुआ विवाद कुछ ही देर में खूनी संघर्ष में बदल गया। आरोप है कि एक छात्र ने फोन कर अपने भाई और साथियों को बुला लिया और देखते ही देखते 20 से अधिक बाहरी युवक कैंपस के बाहर जुट गए। इसके बाद बीएससी के दो छात्रों को घेरकर धारदार हथियार से हमला कर दिया गया।

हमले में दोनों छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके सिर में चोटें आईं और खून बहने लगा। घटना के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्य गेट पर सुरक्षा गार्ड तैनात होने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में बाहरी युवक परिसर के भीतर कैसे दाखिल हो गए।

क्लास में कहासुनी, बाहर निकले तो तैयार थी भीड़

जानकारी के मुताबिक, खंदारी परिसर में बीएससी के छात्र आलोक और दिनेश पढ़ते हैं। उनकी ही कक्षा में अमित नाम का छात्र भी अध्ययनरत है। बताया जा रहा है कि सोमवार सुबह किसी बात को लेकर आलोक और अमित के बीच कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने पर दोनों के बीच गाली-गलौज हुई। आरोप है कि इसी दौरान अमित ने आलोक को थप्पड़ मार दिया। उस समय मामला किसी तरह शांत हो गया, लेकिन इसके बाद विवाद ने खतरनाक मोड़ ले लिया। बताया जा रहा है कि अमित ने फोन कर अपने भाई और दोस्तों को बुला लिया। कुछ ही देर में करीब 20 से अधिक युवक कैंपस के बाहर पहुंच गए। छात्रों के मुताबिक, जिस तरह से युवक एकत्र हुए, उससे पहले से मारपीट की तैयारी होने की आशंका पैदा हुई।

क्लास से बाहर आते ही घेर लिया, धारदार हथियार से हमला

आलोक और दिनेश जैसे ही क्लास से बाहर निकले, आरोप है कि बाहर से आए युवकों ने दोनों को घेर लिया। दोनों छात्रों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी गई। आरोप है कि हमलावरों ने धारदार हथियार से दोनों छात्रों के सिर पर वार किए, जिससे दोनों लहूलुहान हो गए। अचानक हुए हमले से परिसर में मौजूद दूसरे छात्रों में भी दहशत फैल गई। घटना के दौरान चीख-पुकार सुनकर कुछ प्रोफेसर मौके पर पहुंचे। उन्होंने बीच-बचाव कर किसी तरह छात्रों को हमलावरों से बचाया और स्थिति को शांत कराया।

सुरक्षा गार्ड तैनात थे, फिर बाहरी युवक कैंपस में कैसे पहुंचे?

घटना ने विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। छात्रों का आरोप है कि मुख्य गेट पर तीन से चार सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं, इसके बावजूद बाहरी युवकों की इतनी बड़ी भीड़ कैंपस के अंदर पहुंच गई। घटना के दौरान सुरक्षा गार्डों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। छात्रों का कहना है कि यदि मुख्य प्रवेश द्वार पर सख्ती से आईडी चेकिंग और निगरानी होती, तो बाहरी युवकों को परिसर में प्रवेश करने से रोका जा सकता था। छात्रों का यह भी दावा है कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी बाहरी लोगों के कैंपस में घुसकर छात्रों के साथ मारपीट करने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में सोमवार की घटना ने सुरक्षा इंतजामों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

न्यू आगरा पुलिस पहुंची, छात्रों ने दी तहरीर

घटना की सूचना मिलते ही न्यू आगरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस दोनों घायल छात्रों को थाने ले गई। पीड़ित छात्रों ने आरोपियों के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। विवाद की शुरुआत किस बात को लेकर हुई, कितने लोग घटना में शामिल थे और धारदार हथियार कहां से आए, इन सभी बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।

घटना के बाद जागा विश्वविद्यालय प्रशासन, गेट पर सख्ती

मारपीट की घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन भी हरकत में आया। मुख्य गेट पर अब छात्र-छात्राओं के आई कार्ड की जांच शुरू कर दी गई है। पहचान और पूछताछ के बाद ही परिसर में प्रवेश दिया जा रहा है। हालांकि सवाल यह है कि यह सख्ती घटना से पहले क्यों नहीं थी? यदि सुरक्षा व्यवस्था पहले से प्रभावी थी तो बाहरी युवकों का समूह परिसर तक कैसे पहुंचा? छात्रों और अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता अब यही है कि विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थान में पढ़ने वाले छात्र कितने सुरक्षित हैं।

कैंपस की सुरक्षा बनी बड़ा सवाल, अभिभावकों में भी चिंता

विश्वविद्यालय परिसर में दिनदहाड़े छात्रों पर धारदार हथियार से हमला होना केवल मारपीट की घटना नहीं, बल्कि कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। ऐसे में बाहरी युवकों की आसानी से एंट्री और उसके बाद हिंसक घटना ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन प्रवेश व्यवस्था को सख्त करे, बाहरी लोगों की आवाजाही पर निगरानी बढ़ाए, सुरक्षा गार्डों की जवाबदेही तय करे और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे। अब देखना यह होगा कि पुलिस जांच में इस हमले में शामिल कितने लोगों की पहचान होती है और विश्वविद्यालय प्रशासन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था में कितने प्रभावी बदलाव करता है।