गीता के सुरों से गूंज रहा वृंदावन: ‘गीता गान’ कार्यशाला में सिखाई जा रही शुद्ध श्लोक गायन की कला
वृंदावन। आध्यात्म और संगीत के संगम का अद्भुत आयोजन वृंदावन में शुरू हो गया है, जहां गीता के श्लोक अब केवल पढ़े नहीं, बल्कि सुरों में गाए भी जाएंगे। उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा संचालित गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी, वृंदावन में 26 मार्च से 1 अप्रैल तक एक सप्ताह की गीता गान प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ गुरुवार को हुआ।

इस विशेष कार्यशाला का उद्देश्य गीता के श्लोकों के शुद्ध उच्चारण, भावपूर्ण प्रस्तुति और उन्हें संगीतबद्ध तरीके से गाने की कला का प्रशिक्षण देना है। प्रशिक्षण के दौरान अक्षर ज्ञान, व्यंजन, उच्चारण, संभाषण और ध्वनि विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी जा रही है, ताकि प्रतिभागी श्लोकों को सही स्वर और भाव के साथ प्रस्तुत कर सकें।
यह प्रशिक्षण प्रतिदिन सायं 3:00 बजे से 4:30 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें प्रमुख प्रशिक्षक के रूप में भक्ति वेदांत इंस्टीट्यूट के निदेशक दीना अनुकंपन दास सहित अन्य विद्वान प्रतिभागियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
गीता शोध संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश खन्ना ने बताया कि यह कार्यशाला गीता को सरल और सहज रूप में जन-जन तक पहुंचाने का अभिनव प्रयास है। इसके माध्यम से वे लोग भी, जिन्हें संस्कृत का ज्ञान नहीं है, शुद्ध उच्चारण के साथ गीता के श्लोकों का गायन सीख सकेंगे। प्रशिक्षण में गायन, संकीर्तन, कीर्तन शैली, भजन प्रस्तुति और उपदेश की विधाओं को भी शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि यह पहला प्रशिक्षण वर्ग है, जिसके बाद क्रमबद्ध रूप से अन्य साप्ताहिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में गीता के मूल तत्वों, संधि, ध्वनि, अक्षर ज्ञान और गायन शैली का गहन अभ्यास कराया जाएगा। विशेष रूप से स्वर साधना के माध्यम से श्लोकों को गीत के रूप में प्रस्तुत करने की कला विकसित की जाएगी।
कार्यशाला का संचालन संस्थान एवं रासलीला अकादमी के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार की देखरेख में किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण पूर्णतः निःशुल्क है, और विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं से इसमें अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की गई है।
यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत करेगा, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बनेगा।