जी रहे हैं लोग जब केवल निवालों के लिए, चंद ही हैं जो खड़े हैं तब सवालों के लिए’, ‘स्वराग्नि’ में गूंजे सवालों से लेकर राष्ट्र तक के स्वर, कवियों ने बांधा समां
‘आगरा। धरा चेतना फाउंडेशन की ओर से शनिवार को धरा चेतना सांस्कृतिक सभागार, अनुपम बाग, दयालबाग में ‘स्वराग्नि’ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। देश के विभिन्न स्थानों से आए कवियों ने गीत, हास्य, वीर रस और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर किया। देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंजता रहा।
दिल्ली के प्रख्यात कवि विनोद पांडेय ने सामाजिक सरोकारों से जुड़ी पंक्तियां सुनाईं—
“जी रहे हैं लोग जब केवल निवालों के लिए, चंद ही हैं जो खड़े हैं तब सवालों के लिए, कर दिया जाए अगर चिंगारियों को आज तो, तीलियां भी न बचेंगी कल मशालों के लिए।”
प्रयागराज के मशहूर कवि डॉ. शैलेश गौतम ने प्रेम और जीवन के रिश्तों को अपनी रचनाओं में पिरोया। उन्होंने सुनाया—
“ना तो सौदा है ना वचन बाबू, मन से मन का है बस मिलन बाबू, कुछ भी पाने की आस मत रखना, इश्क खेती है ना खनन बाबू।”
उन्होंने अपनी एक अन्य रचना में कहा—
“पुरखों ने जो निभाई हमें चाहिए, त्याग की वो कमाई हमें चाहिए, राम घर-घर में हों प्रार्थना है मगर, एक भरत जैसा भाई हमें चाहिए।”
आगरा के वरिष्ठ कवि रमेश मुस्कान ने जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का संदेश देते हुए कहा—
“कर पाओ तो यूं करो जीवन का सम्मान, आंखों में सपने रखो, अधरों पर मुस्कान।”
आगरा के युवा कवि ईशान देव ने हिंदी और राष्ट्रभावना से ओतप्रोत रचना प्रस्तुत की—
“हां भले हमारे कदमों में ही ये संपूर्ण जहान रहे, लेकिन मन मंदिर में केवल हिंदी हिंदुस्तान रहे।”
कवि सम्मेलन में डॉ. शैलेश गौतम, रमेश मुस्कान, विनोद पांडेय एवं ईशान देव की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को खूब प्रभावित किया। गीत, हास्य और वीर रस की कविताओं पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने किया। विशिष्ट अतिथि स्वामीबाग नगर पंचायत के चेयरमैन सतीश चौहान रहे। शिक्षाविद रोहित दीक्षित, पार्षद अशोक जैसवानी, पार्षद भरत शर्मा, डॉ. अरुण उपाध्याय और सुलेखा अग्रवाल सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।
धरा चेतना फाउंडेशन की दीपाली सिंह ने बताया कि संस्था साहित्य, कला, शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र में लगातार विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रही है। ‘स्वराग्नि’ इसी श्रृंखला की महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य साहित्य के माध्यम से सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना है।
वक्ताओं ने कहा कि साहित्य समाज की आत्मा और संस्कृति उसकी पहचान है। साहित्यिक आयोजन सकारात्मक चेतना का संचार करने के साथ नई पीढ़ी को भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आयोजन में संरक्षक शेखर दीक्षित, संयोजक अक्षय प्रताप सिंह एवं समन्वयक गति सिंह सहित धरा चेतना फाउंडेशन की टीम का योगदान रहा। मंच संचालन श्रुति सिन्हा ने किया। कार्यक्रम में डॉ. रंजना बंसल, सुरेश चंद गर्ग और नरेश जैन का विशेष सहयोग रहा।