पेड़ों को हटाने की अनुमति से पहले ही आगरा में एमजी रोड पर सूरसदन से हरीपर्वत तक मेट्रो की बैरिकेडिंग क्यों? छात्र-छात्राओं, मरीजों और कारोबारियों की बढ़ी परेशानी, मानवाधिकार कार्यकर्ता पारस ने मंडलायुक्त-डीएम से मांगा हस्तक्षेप
आगरा। आगरा मेट्रो के द्वितीय चरण के तहत सूरसदन से हरीपर्वत चौराहे के बीच की गई बैरिकेडिंग ने शहर की प्रमुख यातायात धमनियों में शामिल एमजी रोड की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। सड़क की चौड़ाई कम होने से रोजाना हजारों छात्र-छात्राओं के साथ मरीजों, एंबुलेंस, व्यापारियों और आम नागरिकों को जाम तथा यातायात अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। इसको लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता नरेश पारस, अध्यक्ष-कोशिश फाउंडेशन ने मंडलायुक्त, आगरा मंडल तथा जिलाधिकारी एवं जिला मजिस्ट्रेट, आगरा को विस्तृत विधिक एवं सामाजिक प्रतिवेदन भेजकर बैरिकेडिंग तत्काल हटाने और यातायात व्यवस्था सामान्य करने की मांग की है।
नरेश पारस का कहना है कि प्रभावित क्षेत्र में पेड़ों की कटाई अथवा ट्रांसप्लांटेशन से संबंधित आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी की अंतिम अनुमति मिलने तक सार्वजनिक मार्ग को इतने बड़े हिस्से में बैरिकेड कर नागरिकों को परेशानी में डालना गंभीर प्रशासनिक प्रश्न खड़ा करता है।
सीईसी के निरीक्षण और अंतिम अनुमति पर उठाए सवाल
प्रतिवेदन में दावा किया गया है कि आगरा मेट्रो के इस हिस्से में प्रभावित पेड़ों से संबंधित मामला सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) के समक्ष है और समिति द्वारा प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण प्रस्तावित अथवा अपेक्षित है। ऐसे में अंतिम वैधानिक निर्णय से पहले ही सार्वजनिक सड़क पर बड़े पैमाने पर बैरिकेडिंग कर यातायात बाधित किए जाने पर सवाल उठाया गया है।
नरेश पारस ने प्रशासन से बैरिकेडिंग की अनुमति, यातायात डायवर्जन योजना, निर्माण कार्य से संबंधित वैधानिक स्वीकृतियां तथा विभिन्न विभागों से प्राप्त एनओसी को सार्वजनिक करने की मांग की है।
हजारों विद्यार्थियों की आवाजाही प्रभावित
एमजी रोड के आसपास आगरा कॉलेज, सेंट जॉन्स कॉलेज, एमडी जैन इंटर कॉलेज, क्वीन विक्टोरिया गर्ल्स इंटर कॉलेज सहित कई प्रमुख शिक्षण संस्थान स्थित हैं। प्रतिवेदन के अनुसार सड़क की उपलब्ध चौड़ाई कम होने के कारण सुबह और दोपहर के समय छात्र-छात्राओं को जाम, भीषण गर्मी, उमस और असुरक्षित यातायात परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है। छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है।
नरेश पारस ने कहा कि सार्वजनिक मार्ग पर ऐसी यातायात व्यवस्था नहीं होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को नियमित रूप से लंबे समय तक जाम में फंसना पड़े। उन्होंने इस समस्या को नागरिकों के जीवन, आवागमन और गरिमापूर्ण जीवन के संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए प्रशासन से तत्काल राहत की मांग की है।
एंबुलेंस के लिए भी बढ़ी मुश्किल
प्रतिवेदन में एमजी रोड को प्रमुख अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचने वाले मरीजों तथा एंबुलेंस के लिए महत्वपूर्ण मार्ग बताया गया है। बैरिकेडिंग और बढ़ते यातायात दबाव के कारण आपातकालीन मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी की आशंका जताई गई है।
नरेश पारस ने कहा कि चिकित्सा आपात स्थिति में कुछ मिनटों की देरी भी गंभीर परिणाम दे सकती है। इसलिए सामान्य यातायात के साथ-साथ एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
संजय प्लेस के कारोबार पर असर का दावा
एमजी रोड से जुड़ा संजय प्लेस शहर का प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में व्यापारी, कर्मचारी, ग्राहक और आम नागरिक पहुंचते हैं। प्रतिवेदन में दावा किया गया है कि लंबे समय से चल रही बैरिकेडिंग और यातायात अव्यवस्था से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। लोगों को अतिरिक्त समय के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
सूरसदन सभागार में आने-जाने वाले लोगों पर भी यातायात अव्यवस्था का असर पड़ने की बात कही गई है।
प्रशासन से तत्काल राहत की मांग
नरेश पारस ने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से दो प्रमुख मांगें की हैं। पहली, जब तक संबंधित वैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और सक्षम प्राधिकारी की अंतिम अनुमति प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक सूरसदन से हरीपर्वत चौराहे के बीच सार्वजनिक मार्ग पर लगाई गई बैरिकेडिंग हटाकर यातायात को यथासंभव सामान्य किया जाए।
दूसरी, तत्काल अंतरिम यातायात व्यवस्था लागू की जाए। इसके तहत शिक्षण संस्थानों के खुलने और छुट्टी होने के समय भारी वाहनों के आवागमन को नियंत्रित करने, अस्पतालों की एंबुलेंस के लिए निर्बाध कॉरिडोर बनाने तथा छात्राओं वाले शिक्षण संस्थानों के आसपास अतिरिक्त यातायात पुलिस की तैनाती की मांग की गई है।
‘विकास जरूरी है, लेकिन नागरिकों की कीमत पर नहीं’
नरेश पारस ने कहा कि वह आगरा में मेट्रो जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन विकास कार्य कानून, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और नागरिकों के अधिकारों के अनुरूप होने चाहिए।
उन्होंने कहा, “सार्वजनिक परियोजना के नाम पर शहर की मुख्य लाइफलाइन को लंबे समय तक इस तरह बाधित नहीं किया जा सकता कि विद्यार्थी, मरीज, एंबुलेंस, व्यापारी और आम नागरिक रोजाना परेशान हों। प्रशासन को विकास और जनहित के बीच संतुलन बनाना होगा।”
उन्होंने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से पूरे मामले की तत्काल उच्चस्तरीय समीक्षा कराने, बैरिकेडिंग की वैधानिकता की जांच करने और नागरिकों को तत्काल अंतरिम राहत देने की मांग की है।