यूपी चुनाव से पहले महिलाओं को मिल सकती है खुशखबरी, 33 फीसदी आरक्षण को लागू करने की तैयारी, विपक्ष के साथ सहमति बनाने की कोशिश
केंद्र सरकार महिला आरक्षण को जल्द से जल्द लागू कराने की तैयारी में हर स्तर से जुट गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अगर विपक्ष के साथ सहमति बन जाती है तो यूपी चुनाव में इसे लागू करने की पूरी संभावना है। केंद्रीय मंत्री कि रेन रिजिजू ने इसे लेकर बड़ा अपडेट भी दिया है।
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार 33 फीसदी महिला आरक्षण अधिनियम ( नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को परिसीमन और जनगणना प्रक्रियाओं से अलग करने और उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले इसे लागू करने की संभावना तलाश रही है। अगर पूरे देश में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू हो जाता है तो यह केंद्र सरकार का ऐतिहासिक कदम माना जाएगा और आने वाले विधानसभा चुनावों में सरकार को फायदा मिल सकता है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण अधिनियम, 2023, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जाता है, में संशोधन करने के संबंध में मुख्य विपक्षी दल की राय जानने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से पहले ही दो बार बात कर ली है, ताकि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित की जा सकें।
किरेन रिजिजू ने अपनी बातचीत में जिक्र किया कि सरकार मौजूदा बजट सत्र में विधेयक में संशोधन लाना चाहती है, जो 2 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। सरकार इस कदम पर आम सहमति बनाने के लिए अन्य विपक्षी दलों से संपर्क करेगी।
कांग्रेस और कुछ अन्य पार्टियों ने परिसीमन और जनगणना पूरी होने का इंतजार किए बिना महिला आरक्षण अधिनियम को जल्द से जल्द लागू करने की मांग की है। खरगे जी ने सदन में यह बात कही है, डीएमके और टीएमसी ने भी ऐसी ही मांग की है। परिसीमन से इसे जोड़ना सरकार का विचार था। घटनाक्रम से परिचित एक कांग्रेस नेता ने बताया।
किरेन रिजिजू ने हाल ही में कहा था कि संसद सत्र में वित्त विधेयक सहित कई अन्य महत्वपूर्ण कानूनों के साथ-साथ एक "अत्यंत महत्वपूर्ण" विधेयक पर भी चर्चा हो सकती है। एक सरकारी सूत्र ने बताया कि सरकार विपक्षी दलों की राय मिलने के बाद ही कोई निर्णय ले सकती है। स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
इस बिल के माध्यम से आर्टिकल 339एए, 330ए, 332ए और 334ए में संशोधन किए गए। 339 एए के माध्यम से 33 फीसदी सीटें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
330ए के माध्यम से लोकसभा में प्रत्यक्ष निर्वाचन से भरी जाने वाली एक तिहाई सीटें (एससी और एसटी से संबंधित महिलाओं के लिए आरक्षित सीट सहित) महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
332ए के माध्यम से प्रत्येक राज्य की विधानसभा में महिलाओं के लिए स्थान आरक्षित होंगे। अनुच्छेद के खंड-3 में एससी और एसटी सहित एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
334ए में नया प्रावधान जोड़ा गया है जिसके तहत महिला आरक्षण की अवधि 15 साल के लिए होगी। भविष्य में जरूरत महसूस होने पर संसद को आरक्षण की अवधि बढ़ाने का अधिकार होगा।
लोकसभा में अभी सीटों की संख्या 543 है। जैसे ही कानून लागू होगा, महिला सदस्यों की संख्या 181 हो जाएगी जो वर्तमान में 82 है।