‘था’ नहीं, ‘थे’ बनकर जीना सीखें युवा: मुनि समत्व सागर ने जैन दर्शन से जोड़ा जीवन का मर्म

आगरा। छीपीटोला स्थित निर्मल सेवा सदन में आयोजित ‘वंडरफुल जैनिज्म-6’ के विशेष सत्र में मुनिश्री 108 समत्व सागर महाराज ने युवाओं को बाहरी चमक-दमक और भौतिक उपलब्धियों के बजाय चरित्र, संस्कार और जीवन-मूल्यों से अपनी पहचान बनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में मुनिश्री 108 शील सागर महाराज और मुनिश्री 108 सुप्रभात सागर महाराज भी मौजूद रहे।

Aug 23, 2026 - 20:16
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‘था’ नहीं, ‘थे’ बनकर जीना सीखें युवा: मुनि समत्व सागर ने जैन दर्शन से जोड़ा जीवन का मर्म
आगरा के छीपीटोला स्थित निर्मल सेवा सदन में वंडरफुल जैनिज्म-6 में युवाओं का मार्गदर्शन करते मुनिश्री समत्व सागर जी महाराज।

कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को जैन दर्शन, आध्यात्मिकता, जीवन-मूल्यों और आत्म-विकास की दिशा से जोड़ना रहा। मुनि श्री का श्रद्धालुओं ने पाद प्रक्षालन किया। संयुक्त धर्मसभा में मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज ने युवाओं को जीवन की वास्तविक सफलता और व्यक्तित्व निर्माण का संदेश दिया।

था’ नहीं, ‘थे’ बनकर जीने की सीख

मुनिश्री ने कहा कि सुबह और शाम का होना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन सुबह से शाम के बीच जीवन को सही ढंग से जीने की कला सीखना महत्वपूर्ण है। जीवन की हर सुबह उम्मीद और हर शाम खुशी लेकर आए, इसके लिए निरंतर पुरुषार्थ जरूरी है।

उन्होंने राम और रावण का उदाहरण देते हुए युवाओं से पूछा कि जीवन के बाद नाम के साथ ‘था’ जुड़ना है या ‘थे’। उन्होंने कहा कि राम जैसा जीवन जीने वालों के लिए सम्मान के साथ ‘थे’ शब्द का प्रयोग होता है, जबकि रावण के जीवन के संदर्भ में ‘था’ कहा जाता है। इसलिए यह तय करना जरूरी है कि पीठ पीछे लोगों की जुबान पर किस रूप में नाम लिया जाए।

मुनि श्री ने स्वतंत्रता और स्वच्छंदता के अंतर को समझाते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत में नागरिकों को स्वतंत्रता मिली है, लेकिन इसका अर्थ मनमानी करना नहीं है। उन्होंने युवाओं से बाहरी दिखावे, महंगे सामान और व्यक्तित्व की चमक के बजाय अपने भीतर के व्यक्तित्व को मजबूत बनाने का आह्वान किया।

बेटियों को सुरक्षित नहीं, सक्षम बनाने पर जोर

दिल्ली से आईं विशेष प्रशिक्षक श्रीमती प्रिया जैन और ट्रेनर अंजना जैन ने कार्यशाला के माध्यम से युवतियों को आत्मविश्वासी, खुशहाल, मजबूत, जागरूक, सकारात्मक और निर्णय लेने में सक्षम बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बेटियों को केवल सुरक्षित नहीं, बल्कि सक्षम और सशक्त बनाना जरूरी है, ताकि वे जीवन की हर चुनौती का मजबूती और प्रसन्नता के साथ सामना कर सकें।

कार्यक्रम का संचालन सतेंद्र जैन साहूला ने किया। इस अवसर पर भारतीय जैन संगठन उत्तर प्रदेश के राज्य महामंत्री सुरेंद्र कुमार जैन, राज्य चेयरमैन एवं कार्यक्रम संयोजक अंकेश जैन, जिला अध्यक्ष शैलेंद्र जैन और कुमार मंगलम सहित बीजेएस के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

श्रुत मंथन वर्षायोग समिति की ओर से मनोज जैन, रमेश जैन, प्रवीन जैन (पद्मावती), आनंद जैन, शैलेश जैन (लाला जी), मुकेश जैन, आशीष जैन, विवेक जैन, चक्रेश जैन, सतेंद्र जैन (साहुल), आशीष जैन (बाबा), सचिन जैन (तार), आशु (वी.के), रोहित जैन, नितिन, सनी, अनिकेत, दीपक जैन तथा मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित समस्त मंडल और सकल जैन समाज के लोग मौजूद रहे।

SP_Singh AURGURU Editor