500 किलोमीटर की दौड़ ने जगाया हिमालय बचाने का संकल्प, बरेली में ‘रन फॉर द हिमालयाज’ का समापन

-आरके सिंह- बरेली। हिमालय की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश लेकर भारतीय सेना की 10 दिन की ‘रन फॉर द हिमालयाज’ का मंगलवार को बरेली स्थित उत्तर भारत मुख्यालय में समापन हुआ। उत्तराखंड के दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों से होकर करीब 500 किलोमीटर की अल्ट्रा स्टेज्ड रन पूरी करने वाली टीम ने 16,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित ओम पर्वत से अपनी यात्रा शुरू की थी। उत्तर भारत मुख्यालय में जीओसी उत्तर भारत लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा, एवीएसएम ने अभियान का समापन किया।

Sep 8, 2026 - 21:15
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500 किलोमीटर की दौड़ ने जगाया हिमालय बचाने का संकल्प, बरेली में ‘रन फॉर द हिमालयाज’ का समापन
‘रन फॉर द हिमालयाज’ के समापन के मौके पर तिरंगे को थामे उत्तर भारत मुख्यालय की ओर बढ़ते प्रतिभागी।

‘रन फॉर द हिमालयाज’ के समापन समारोह में मौजूद सैन्य अधिकारी और प्रतिभागी।

हिमालय के ऊबड़-खाबड़ और चुनौतीपूर्ण रास्तों से गुजरे इस अभियान में भारतीय सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिक, सेवारत अधिकारी, अल्ट्रा रनर्स, युवा स्वयंसेवक और पर्यावरण प्रेमी शामिल हुए। अभियान ने शारीरिक सहनशक्ति के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और नागरिक भागीदारी का संदेश भी दिया।

पूर्व सैनिकों और अधिकारियों की संयुक्त टीम ने पूरी की दौड़

अभियान को सशस्त्र बलों के पांच पूर्व सैनिकों और चार सेवारत अधिकारियों की संयुक्त टीम ने पूरा किया। टीम का नेतृत्व 10 पैरा स्पेशल फोर्स के सेवानिवृत्त कर्नल मनदीप सिंह मान ने किया। टीम में एयर मार्शल आरजे डकवर्थ, मेजर जनरल देवेंद्र कपूर, एयर कमोडोर सुरेश बड्याल और कैप्टन पूजा मेहरा समेत अन्य प्रतिभागी शामिल रहे।

फिटनेस के साथ हिमालय संरक्षण का संदेश

‘रन फॉर द हिमालयाज’ का उद्देश्य फिटनेस, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सक्रिय नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देना था। अभियान के जरिए हिमालय के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा की आवश्यकता को लेकर जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया। आयोजकों ने इसे केवल खेल गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय लोगों और समुदायों को टिकाऊ जीवनशैली अपनाने तथा स्वच्छ और हरित भारत के निर्माण में योगदान के लिए प्रेरित करने की पहल के रूप में आगे बढ़ाया।

स्कूल-कॉलेजों और युवाओं से जुड़ी टीम

यात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने स्थानीय समुदायों, स्कूलों, कॉलेजों, एनसीसी कैडेटों और युवा संगठनों के साथ संवाद किया। विभिन्न स्थानों पर जागरूकता सत्र और प्रेरक संवाद आयोजित किए गए। लोगों को स्वस्थ जीवनशैली और अभियान के उद्देश्यों से जोड़ने के लिए चुनिंदा स्थानों पर प्रतीकात्मक जागरूकता दौड़ भी कराई गईं।

शून्य कचरा अभियान पर रहा विशेष जोर

अभियान में पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘जीरो वेस्ट’ यानी शून्य कचरा दृष्टिकोण अपनाया गया। अभियान के दौरान उत्पन्न कचरे को वैज्ञानिक तरीके से अलग कर पुनर्चक्रण के लिए भेजा गया। स्वच्छ भारत मिशन के समर्थन में मार्ग में प्लास्टिक कचरा एकत्र करने और सफाई अभियान भी चलाए गए। इसके माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि हिमालय का संरक्षण केवल किसी एक संस्था की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।

अभियान ने सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने के साथ युवाओं को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों से जोड़ने का प्रयास किया। इसके माध्यम से देशभक्ति, फिटनेस, पर्यावरणीय चेतना और नागरिक जिम्मेदारी के मूल्यों को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।

SP_Singh AURGURU Editor