झुग्गी-बस्तियों में टीबी पर वार: 30 जून तक चलेगा विशेष स्क्रीनिंग अभियान, बुजुर्गों और नशा करने वालों पर खास नजर
आगरा। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले में झुग्गी, मलिन बस्तियों व बेसहारा लोगों के बीच टीबी की पहचान के लिए 30 जून तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों, मधुमेह रोगियों, धूम्रपान व अन्य नशा करने वालों पर विशेष फोकस किया जाएगा।
स्वास्थ्य टीमों को दिया गया प्रशिक्षण, माइक्रोप्लान भी तैयार
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुकेश गुप्ता ने बताया कि यह अभियान केंद्र सरकार के 100 दिवसीय सघन टीबी अभियान के विस्तारीकरण के तहत संचालित हो रहा है। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव के निर्देशन में जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों के अधिकारियों व स्टाफ को जूम मीटिंग के जरिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए माइक्रोप्लान भी साझा किया गया है।
इन क्षेत्रों में होगी स्क्रीनिंग
स्वास्थ्य विभाग की टीमें झुग्गी, मलिन बस्तियां, अनाथालय, वृद्धाश्रम, नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, मदरसे, नवोदय विद्यालय, जेल, सब्जी-फल मंडियां, लेबर मार्केट, निर्माण स्थल, ईंट भट्टे, स्टोन क्रेशर व खदानों में जाकर संभावित टीबी मरीजों की स्क्रीनिंग करेंगी।
इन लोगों को रखा गया प्राथमिकता में
अभियान में विशेष रूप से कुपोषित, मधुमेह से पीड़ित, धूम्रपान, शराब व नशा करने वाले, एचआईवी संक्रमित, पूर्व टीबी रोगी, तथा टीबी मरीजों के संपर्क में रहने वाले लोगों की जांच की जाएगी।
टीबी के लक्षण हों तो तुरंत बताएं
डॉ. गुप्ता ने अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय से खांसी, बुखार, रात में पसीना, मुंह से खून, वजन कम होना, भूख न लगना, थकान, सीने में दर्द, गर्दन में गांठें जैसे लक्षण हों तो वह स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करे और टीबी स्क्रीनिंग कराए।
आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सहयोग, सोशल मीडिया पर भी जागरूकता
अभियान को सफल बनाने के लिए आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वयंसेवी संस्थाएं, जनप्रतिनिधि, धर्मगुरु, टीबी विजेता, निक्षय मित्र, आईएमए व आईएपी के डॉक्टर आदि वीडियो संदेशों और सोशल मीडिया के माध्यम से आमजन को जागरूक कर रहे हैं।
जांच व इलाज पूरी तरह निशुल्क
अभियान में एक्स-रे व नैट टेस्ट के जरिए संभावित रोगियों की पुष्टि की जाएगी और टीबी मिलने पर निशुल्क उपचार भी किया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी मरीज पहचान से वंचित न रह जाए।