तीन दिन चलेंगी बकरीद की कुर्बानियां, हिंदुस्तानी बिरादरी ने लिया एकजुटता का संकल्प
आगरा। मुस्लिम समाज का बड़ा त्योहार ईद-उल-अजहा आगामी सात जून को है। इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मीरा हुसैनी चौराहा से सदर भट्ठी तक बकरा मंडी लग चुकी है, जहां सुबह से देर शाम तक बकरों की खरीद चल रही है। बकरा मंडी मंटोला थाने इलाके में लग रही है, इसलिए वहां पुलिस बराबर निगरानी कर रही है। इसी क्रम में आज मंटोला थाने में शांति समिति की बैठक भी हुई।
बकरीद यूं तो सात जून को है, लेकिन कुर्बानियां आठ और नौ जून को भी होंगी। आगरा शहर ही नहीं, पूरे जिले के सभी थाना क्षेत्रों में कुर्बानियां होंगी। मंटोला में हुई बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता डॊ. शिराज कुरैशी ने सुझाव दिया कि कुर्बानियों के बाद जानवरों की जो खालें बिकने के लिए मंटोला इलाके में आती हैं, उन्हें खुले में न बेचा जाए।
बकरीद के अवसर पर शहर में साम्प्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहज़ीब को कायम रखने का संकल्प हिंदुस्तानी बिरादरी संस्था ने लिया है। सदर भट्टी स्थित कार्यालय पर आयोजित विचार गोष्ठी में संस्था अध्यक्ष और भारत सरकार से कबीर पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सिराज कुरैशी की अध्यक्षता में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया।
डॉ. कुरैशी ने कहा कि आगरा केवल ताजमहल का शहर नहीं, बल्कि मोहब्बत और सौहार्द की राजधानी है। बकरीद पर यहां एक बार फिर भाईचारे की वो खूबसूरत तस्वीर नजर आएगी जो आगरा की पहचान है। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि कुर्बानी सार्वजनिक स्थलों पर न हो और साफ-सफाई तथा शालीनता का विशेष ध्यान रखा जाए। गोश्त या अंग खुले में न ले जाएं। खून को नालियों में न बहने दें, पानी डालकर तुरंत साफ करें।
सामाजिक समरसता की आवाज
वरिष्ठ पत्रकार विशाल शर्मा, संस्था के उपाध्यक्ष ने कहा, बकरीद सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भाईचारे और एकता की मिसाल पेश करने का अवसर है। हमें यह दिखाना है कि आगरा से उठी यह रौशनी पूरे देश में फैले। महासचिव विजय उपाध्याय और सचिव ज़ियाउद्दीन ने भी समाज से शांति और सजगता बनाए रखने की अपील की। कोई अफवाह फैले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें, लेकिन कानून को अपने हाथ में न लें।
प्रतिनिधिमंडल करेगा प्रशासन से संवाद
बैठक में यह तय किया गया कि त्योहार के दौरान शहर की स्वच्छता, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल प्रशासन से मिलेगा।गोष्ठी में राजकुमार नागरथ, मोहम्मद शरीफ ‘काले’, इमरान सहित अनेक नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। एक स्वर में प्रस्ताव पारित हुआ कि कोई भी सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की गई तो उसका डटकर विरोध किया जाएगा।