हेमा मालिनी 25 अप्रैल से वृंदावन में लगवायेंगी कथक नृत्य की कार्यशाला

वृंदावन। ब्रज क्षेत्र के बालक-बालिकाओं और युवाओं को शास्त्रीय नृत्य 'कथक' सिखाने के लिए सांसद व नृत्यांगना हेमा मालिनी देश की प्रसिद्ध नृत्यांगना सुश्री उमा डोंगरे को तीन दिन के लिए मुम्बई से वृंदावन बुला रही हैं।

Apr 23, 2025 - 18:10
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हेमा मालिनी 25 अप्रैल से वृंदावन में लगवायेंगी कथक नृत्य की कार्यशाला
सांसद हेमा मालिनी द्वारा आयोजित कथक कार्यशाला की तैयारियों के बारे में चर्चा करते आयोजन समिति के सदस्य।

27 अप्रैल तक तीन दिन प्रसिद्ध नृत्यांगना सुश्री उमा डोंगरे सिखायेंगी कथक नृत्य

सांसद हेमा मालिनी के सांस्कृतिक प्रतिनिधि अनूप शर्मा ने गीता शोध संस्थान में जानकारी दी कि 25 से 27 अप्रैल तक वृंदावन स्थित गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी में मुंबई की वरिष्ठ कथक नृत्यांगना व प्रसिद्ध गुरू विदुषी उमा डोगरा द्वारा तीन दिवसीय निःशुल्क कथक प्रशिक्षण कार्यशाला 'नृत्य धारा’ की शुरुआत की जा रही है।

 

 

शर्मा ने बताया कि बच्चों को नृत्य सीखने अक्सर मथुरा जिले से बाहर जाना पड़ता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सांसद एवं विख्यात नृत्यांगना हेमा मालिनी ने अपने नाट्य विहार कला केंद्र मुम्बई के माध्यम से ब्रज में शास्त्रीय नृत्य की सुदृढ़ परंपरा को पुनर्जीवित करने की दिशा में कार्यशाला लगाने की अभिनव पहल की है। 

 

इस सांस्कृतिक प्रयास में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, वृंदावन बाल विकास मंच एवं हरे कृष्णा आर्किड होटल का विशेष सहयोग प्राप्त है, जबकि इस शिविर की समस्त व्यवस्था कान्हा अकादमी द्वारा की जा रही है। 'नृत्यधारा' कार्यशाला में कथक सीखने के उत्सुक बालिकाएं, युवक व युवती 12 साल से ऊपर के हों। वे सभी 25 अप्रैल को प्रातः नौ बजे पंजीयन व प्रशिक्षण के लिए गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी ( सौ सैया अस्पताल के बगल में, टीएफसी के सामने) पहुंचें। 

 

प्रशिक्षण कार्यशाला की समस्त व्यवस्थाएं गीता शोध संस्थान के निदेशक प्रो दिनेश खन्ना, ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. उमेश चंद्र शर्मा, समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार, कान्हा अकादमी के पदाधिकारी देवेन्द्र शर्मा, संजय शर्मा व भागवत प्रवक्ता सुश्री मोहिनी कृष्ण दासी व मेघश्याम वार्ष्णेय की देखरेख में पूर्ण कर ली गयी गयीं हैं।

 

ब्रज के सभी बालक-बालिकाएं, किशोर-किशोरियाँ एवं युवा इस विशिष्ट अवसर का लाभ लें और इस नृत्य शिक्षा यज्ञ में सहभागी बनें। कथक के बाद भरतनाट्यम, ओडिसी आदि शास्त्रीय नृत्य शैलियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।