युद्ध नहीं समाधान का समय है: भारत की नीति स्पष्ट और संतुलित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीति स्पष्ट है। भारत युद्ध नहीं चाहता, लेकिन यदि युद्ध थोपा गया तो जवाब देने में सक्षम है। आतंकवाद पर सख्त रुख अपनाते हुए मोदी सरकार ने आतंकियों के ठिकानों को नष्ट किया और चेताया कि अगली आतंकी घटना को युद्ध विराम का उल्लंघन माना जाएगा। विपक्ष केवल आलोचना कर रहा है, जबकि सरकार ने संतुलित कूटनीति के साथ देशहित में निर्णय लिए। भारत का उद्देश्य समाधान और शांति है, न कि युद्ध।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भी कहा था- यह समय युद्ध का नहीं, आगे बढ़ने का है। कोई भी सभ्य देश युद्ध नहीं चाहता, जब तक कि युद्ध उस पर थोपा न जाए।
पहलगाम के आतंकी हमले पर भी प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा था कि आतंकी कहीं भी छिपे हों, उनका अंत होकर रहेगा। आतंकियों को ढूंढकर समाप्त किया जाएगा, लेकिन कभी भी युद्ध की बात नहीं की गई थी। जहां आतंकियों के अड्डे नष्ट करने की आवश्यकता थी, वहां कार्रवाई की गई। पाकिस्तान ने भी खानापूर्ति करते हुए ड्रोन अटैक किया और भारत ने उसका जवाब उसी भाषा में दिया।
युद्ध कभी किसी के हित में नहीं होता। पाकिस्तान पर विलुप्त हो जाने का भय था, और भारत का इतिहास साक्षी है कि भारत कभी आक्रमण नहीं करता। लेकिन यदि आक्रमण हुआ और युद्ध थोपा गया तो भारत इतना सशक्त है कि पाकिस्तान टिक नहीं पाएगा।
आज जो विपक्ष युद्ध विराम को लेकर विलाप कर रहा है, अगर युद्ध लंबा चलता तो चाहे दुश्मन कितना भी कमजोर होता, जनहानि होती। सैनिकों की हो या नागरिकों की, तब भी वही विलाप होता। शहादत तभी स्वीकार्य होती है जब कोई विकल्प न हो या फिर युद्ध थोपा गया हो।
मोदी सरकार ने यह स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर अब कोई आतंकी घटना होती है तो उसे 'युद्ध' ही माना जाएगा। यानी युद्ध विराम का उल्लंघन माना जाएगा और सीधी युद्ध-कार्रवाई की जाएगी। सिंधु जल संधि के स्थगन को भी सरकार ने पहले ही लागू किया हुआ है।
जहां तक विपक्ष की प्रतिक्रियाओं का सवाल है, भारत का अपरिपक्व विपक्ष युद्ध चलता तो भी विलाप करता, न होता तो भी। और अब रुका है तो भी विलाप जारी है। वर्तमान विपक्ष के हिस्से में फ़िलहाल केवल 'विलाप' ही है।
भारतीय सेना के शौर्य को सलाम और मोदी सरकार की कूटनीति व समयानुकूल निर्णय को प्रणाम। वर्तमान में राज्य की स्थिति स्थिर है। ईश्वर से प्रार्थना है कि पाकिस्तान को सद्बुद्धि दे। मोदी जी ने सत्ता संभालते ही कहा था, हम दोनों की लड़ाई गरीबी से होनी चाहिए, न कि आपस में। अगर पाकिस्तान इस नीति को माने, तो भारत से कहीं अधिक उसका खुद का हित है। अपनी दयनीय आर्थिक स्थिति से वह बाहर निकल सकता है। यद्यपि पाकिस्तान की फ़ितरती नीतियां ऐसा होने नहीं देंगी।
– पूरन डावर
चिंतक एवं विश्लेषक