खेरागढ़ः अंधेरे में जागी थी दरिंदगी और अब सिस्टम ने किया विश्वास का रेप

आगरा। जिस देश में ‘बेटी बचाओ’ नारा दिया जाता है, उसी देश के खेरागढ़ में एक 12 साल की मासूम की चीखों पर सिस्टम बेहद असंवेदनशील दिख रहा है। दो दिन पहले जब एक दरिंदा उसे घर के बाहर से उठाकर देवस्थान के पास ले गया और हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं, तब सिर्फ एक शख्स दोषी था। इसके बाद की प्रक्रिया में पूरा सिस्टम इस पाप का भागीदार नजर आ रहा है।

Apr 21, 2025 - 12:34
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खेरागढ़ः अंधेरे में जागी थी दरिंदगी और अब सिस्टम ने किया विश्वास का रेप

अब पुलिसिया सिस्टम ने लूटा भरोसा

घटना के बाद खेरागढ़ पुलिस ने शुरुआत में तो तत्परता दिखाई थी, लेकिन इसके बाद वही पुराना पुलिसिया ढर्रा शुरू हो गया। पीड़िता का मेडिकल कराने के लिए थाने ने खुद गाड़ी नहीं दी, बल्कि पिता से खुद वाहन मंगवाने को कहा गया। पुलिस ने यह रवैया उस पीड़िता के पिता को दिखाया जो बेहद गरीब है। मेडिकल के नाम पर इस मासूम और उसके टूटे पिता को थाने में 5 घंटे तक बिठाया गया। यह पुलिस की असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा थी।

अस्पताल में तीन घंटे बैठाकर लौटा दिया

पिता से किराए की गाड़ी मंगाकर पुलिस बालिका को लेकर मेडिकल के लिए अस्पताल पहुंची तो वहां भी तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा। फिर भी मेडिकल नहीं हो सका और अगले दिन आने के लिए कह दिया गया। सवाल यह है कि क्या यही है संवेदनशील पुलिस तंत्र, जिसकी दुहाई दी जाती है? खेरागढ़ पुलिस का यह विकृत चेहरा तब दिखा है जबकि हाल ही में स्थानांतरित हुए पुलिस कमिश्नर जे रविंद्र् गौड़ ने पुलिस को शिष्टाचार का निरंतर पाठ पढ़ाया था।

प्रधानमंत्री आवासः जहां घर है, लेकिन बिजली नहीं

पीड़िता का परिवार बेहद गरीब है। उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक घर मिला है, लेकिन उसमें बिजली कनेक्शन नहीं है। गर्मी और अंधेरे की वजह से परिवार घर के बाहर सोने को मजबूर था। और उसी अंधेरे ने उनकी बेटी को निगल लिया। ये सवाल सिर्फ बिजली विभाग से नहीं है। ये सवाल प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन से भी है। उस विभाग से भी है, जिसने घर तो बनाया पर बिजली का कनेक्शन नहीं दिया। उन अधिकारियों से भी है, जिन पर इस काम के सुपरविजन की जिम्मेदारी थी। जब घर में रहने की बुनियादी सुविधा नहीं तो वह किस काम का घर?

कब तक मासूमों की सुरक्षा फाइलों में दबी रहेगी?

हर साल भारी भरकम राशि पुलिस सुधार, महिला सुरक्षा और ग्रामीण विकास योजनाओं पर खर्च होते हैं, लेकिन खेरागढ़ जैसी जगहों पर फिर भी ऐसे हादसे हो जाते हैं। सवाल यह है कि कब तक हमारा सिस्टम सोती बच्चियों को हवस का शिकार बनने देगा?

जनता पूछ रही है- क्या सिर्फ दरिंदा दोषी है?

इस घटना का जिम्मेदार सिर्फ वो युवक ही नहीं है जिसने यह दरिंदगी की। वो पुलिस भी दोषी है जिसने संवेदना से नहीं, कागज़ी प्रक्रिया और पुलिसिया हथकंडों से केस हैंडल किया। वो अस्पताल भी दोषी है जो रेप पीड़िता को जांच के लिए डॉक्टर नहीं दे सका और वो सिस्टम भी दोषी है जिसने एक गरीब परिवार को ऐसा घर दिया, जहां रोशनी की जगह अंधेरा बसा है।

सवाल एक का नहीं, पूरी व्यवस्था का है

खेरागढ़ की यह बेटी आज भी दहशत के साए में है और उसके पिता बेबसी की थकान से लड़े जा रहे हैं। सवाल सिर्फ एक का नहीं, सवाल पूरी व्यवस्था का है। क्या हम फिर किसी नई वारदात का इंतजार करेंगे, या अब सच में कुछ बदलने का वक्त आ गया है? क्षेत्रीय सांसद राज कुमार चाहर ने जरूर इस पीड़ित परिवार के जख्मों पर मरहम लगाया है। सांसद ने इस परिवार को एक लाख रुपये की मदद देने के साथ ही इस परिवार की बेबसी का मजाक उड़ाने वाली पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के पेंच कसे हैं।

SP_Singh AURGURU Editor