पीएमओ ने विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार की शिकायत पर यूपी मुख्य सचिव को जांच कर कार्रवाई के लिए कहा
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में कथित भ्रष्टाचार की जांच अब उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव के स्तर पर होगी। यह कार्रवाई प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा की गई है, जिसने अधिवक्ता और विश्वविद्यालय के विधिक सलाहकार डॉ. अरुण दीक्षित की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए यथोचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कुलपति सहित अन्य विश्वविद्यालय अधिकारियों पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।
-अधिवक्ता और विश्वविद्यालय के विधिक सलाहकार डाॊ. अरुण दीक्षित ने कुलपति सहित कई अधिकारियों पर लगाए हैं गंभीर आरोप
डॉ. दीक्षित ने अपनी शिकायत में लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर अपने भाषणों में भ्रष्टाचार मुक्त भारत का संकल्प दोहराते हैं और कहा करते हैं कि जब तक भ्रष्टाचार नहीं मिटेगा, भारत विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता। इसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने पीएमओ और राज्यपाल को सीधे शिकायत भेजी।
शिकायत में डॉ. दीक्षित ने उल्लेख किया है कि विश्वविद्यालय में उनके कार्यों के लिए भुगतान रोककर रिश्वत मांगी जा रही है। उन्होंने साफ कहा है कि भुगतान हो या न हो, रिश्वत नहीं दूंगा। मैं ऐसे परिवार से हूं जहां मूल्यों की कीमत होती है। उनके पिता जज रह चुके हैं और परिवार से हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश व यूपी के पूर्व डीजीपी भी रहे हैं।
उन्होंने अपने कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि अरबों की सुल्तानगंज जमीन को भू-माफिया से मुक्त कराया। विश्वविद्यालय का खाता जब्त कर सेल टैक्स विभाग ने 8.5 करोड़ रुये निकाल लिया था, जिसे उन्होंने वापस कराया। बिजली विभाग की 1.58 करोड़ रुपये की रिकवरी कोर्ट से खत्म कराई। कई केसों में विश्वविद्यालय का पक्ष रखते हुए करोड़ों का वित्तीय लाभ दिलाया।
डॉ. दीक्षित ने कहा कि यदि उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाई जाती है, तो वह भ्रष्टाचार के अनगिनत सबूत देने को तैयार हैं। साथ ही कई कर्मचारी और प्रोफेसर भी शपथ पत्र देने को तैयार हैं।
पीएमओ से अनुभाग अधिकारी माधव कुमार सिंह द्वारा जांच के लिए पत्र यूपी के मुख्य सचिव को भेजा गया है। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन में खलबली है, क्योंकि पहले भी कुलाधिपति की जांच में डॉ. दीक्षित के भुगतान रोका जाना विधि विरुद्ध पाया गया था, फिर भी तीन साल से उन्हें भुगतान नहीं मिला। कुलपति सहित कुलसचिव और उप कुलसचिव को उन्होंने नौ पत्र भी भेजे, लेकिन सभी अनसुने रह गए।