पॊलीथिन मुक्त आगरा: नगर निगम के संकल्प पर भारी दिखावा, एक दशक बाद भी हाल जस का तस
आगरा। विश्व पर्यावरण दिवस सिर्फ औपचारिकताओं का दिन बनकर रह गया है, खासकर उस शहर में जहां नगर निगम ने ‘पालीथिन मुक्त आगरा’ का संकल्प वर्षों पहले लिया था। निगम मुख्यालय की इमारत पर बड़े गर्व से यह वाक्य अंकित है- ‘हमारा संकल्प, पालीथिन मुक्त आगरा’, पर अब यही वाक्य पर्यावरण प्रेमियों के लिए चिढ़ का विषय बन गया है।
कारण स्पष्ट है, यह संकल्प केवल कागजों और दीवारों पर रह गया है, ज़मीनी स्तर पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। एक दशक से अधिक समय बीत गया, लेकिन सिंगल यूज़ प्लास्टिक और पॊलीथिन की बिक्री व उपयोग शहर में बदस्तूर जारी है।
बाजार हों, मोहल्ले हों या सड़क किनारे की दुकानें, हर जगह पॊलीथिन का खुलेआम प्रयोग हो रहा है। सब्ज़ी वाले, दुकानदार, यहां तक कि बड़े रिटेल स्टोर भी बेखौफ पॊलीथिन का उपयोग कर रहे हैं। जिन पॊलीथिनों पर रोक की बात है, वे हर घर से निकलकर कूड़ाघरों तक पहुंच रही हैं, जिससे साफ जाहिर होता है कि नगर निगम सिर्फ रस्म अदायगी कर रहा है।
नगर निगम ने प्रवर्तन दल बना रखा है, जो औपचारिकता निभाते हुए दुकानदारों पर जुर्माना लगाता है, परंतु असली स्रोत थोक विक्रेताओं तक कार्रवाई नहीं पहुंच पाती। ये वही कारोबारी हैं जो ट्रकों में भर-भरकर पालीथिन मंगाते हैं और शहरभर में सप्लाई करते हैं।
हाईकोर्ट ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, शासन ने भी अपना आदेश पारित कर दिया। लेकिन जो विभाग इसकी वास्तविक ज़िम्मेदारी निभाने वाला है, वह सिर्फ कार्रवाई का दिखावा कर रहा है। यह जनजागरूकता नहीं, प्रशासनिक निष्क्रियता की मिसाल है।
शहर में सवाल उठने लगे हैं कि जब एक दशक बाद भी निगम पॊलीथिन मुक्त शहर का सपना पूरा नहीं कर पाया, तो क्या नगर निगम के अधिकारियों के लिए यह सिर्फ प्रचार की स्कीम थी?