बच्चों में टीबी है खतरनाक संकेत, लक्षणों को न करें नज़रअंदाज़, सीएमओ बोले- बीसीजी टीका बेहद प्रभावी
आगरा। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए क्षय रोग (टीबी) की जल्दी पहचान और समय पर इलाज बेहद जरूरी है। बच्चों में टीबी को अक्सर सामान्य खांसी-बुखार समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने कहा है कि बच्चों को स्वस्थ रखना है तो टीबी की रोकथाम पर विशेष ध्यान देना होगा। जागरूकता, टीकाकरण और त्वरित इलाज ही बचाव के मुख्य उपाय हैं।
बीसीजी टीका है बेहद प्रभावी
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चों को जन्म के बाद लगाया जाने वाला बीसीजी टीका टीबी की रोकथाम में अत्यंत कारगर है। यह टीका बच्चों को गंभीर प्रकार के टीबी संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है।
टीबी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि बच्चों में टीबी के लक्षण अक्सर वयस्कों से अलग होते हैं और कम स्पष्ट दिखाई देते हैं। इनमें शामिल हैं-
-लगातार 2 सप्ताह से अधिक खांसी।
-बुखार।
-वजन कम होना।
-भूख में कमी।
-गर्दन या अन्य भागों में गांठ।
-खांसी में खून आना।
यदि इन लक्षणों में से कोई भी दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
जांच और इलाज अब सुलभ
उन्होंने बताया कि जनपद में जीनएक्सपर्ट, सीबी-नेट टेस्ट, एक्स-रे और सीटी स्कैन जैसी आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। टीबी का इलाज 6 महीने तक चलने वाली एंटी-ट्यूबरक्यूलर दवाओं से किया जाता है।
रोकथाम के उपाय
-बच्चों को स्वच्छ वातावरण दें।
टीबी संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें।
बच्चों को संतुलित आहार और व्यायाम का अभ्यास कराएं।
समय पर टीकाकरण कराना न भूलें।
डॉ. सुखेश गुप्ता ने कहा कि समय पर इलाज मिलने से बच्चों की जान बचाई जा सकती है और उनका भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है। समुदाय को बच्चों में क्षय रोग के प्रति सतर्क रहना चाहिए और हर संदिग्ध लक्षण पर चिकित्सा सलाह जरूर लेनी चाहिए।
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