यूट्यूबर्स ने आलू किसानों को संकट के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया

बिना तथ्यों के आलू में तेजी का प्रचार ने किसानों को भ्रमित कर रखा है। देश में 10-12% ज्यादा आलू उत्पादन हुआ है, लेकिन 20 अप्रैल तक भी स्टोर का आलू नहीं निकल पाया है। कोल्ड स्टोरेज निकासी के तीन चरण होते हैं और इस बार शुरुआती भाव कमजोर रहे। सब्जियां भी सस्ती हैं, जिससे बाजार दबाव में है। किसानों को अब अच्छे भावों के लिए मौसम के चमत्कार और लंबी प्रतीक्षा करनी होगी।

Apr 20, 2025 - 11:39
 0
यूट्यूबर्स ने आलू किसानों को संकट के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया

-गिरधारीलाल गोयल-

खंदौली/आगरा। आलू के बारे में कहा जाता है कि इसके आकार की तरह इसकी चाल के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकता। यही वजह है कि आलू के आंकलनकर्ताओं को बहुत होमवर्क करने के बाद ही कुछ कहना पड़ता है। इस बार आलू उत्पादक किसानों के सामने इस बार संकट की आंधी सी नजर आ रही है। इसके पीछे एक अनचाहा नया कारण सामने आ रहा है। यह है सोशल मीडिया के तथाकथित यूट्यूबर्स और फेसबुकिये पत्रकार। बिना ठोस आंकड़ों और विश्लेषण के इनके द्वारा वायरल की जा रही आलू में तेजी की रिपोर्टिंग किसानों को भ्रमित कर रही है।

बिना होमवर्क के तेजी के दावे

आलू की कीमतें हमेशा से अनिश्चित रही हैं, जिसका कारण इसके उत्पादन, भंडारण और मौसम से जुड़ी जटिलताएं हैं। सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक तथ्य पेश करने वाले यूट्यूबर हर दिन “आलू में तेजी” के दावे कर किसानों को जल्दबाजी में बेचने या रोककर रखने के लिए उकसा रहे हैं। इससे बाज़ार बिगड़ रहा है और इसी से वास्तविक सप्लाई-डिमांड समीकरण प्रभावित हो जाता है।

 निकासी के तीन चरण और हकीकत

आगरा समेत समूचे उत्तर प्रदेश में आलू को कोल्ड स्टोरेज से बाहर निकालने की प्रक्रिया तीन चरणों में होती है। पहला चरण अप्रैल-जुलाई अवधि में होता है।  इसकी इबारत कोल्ड स्टोरेज से बाहर आ रहा आलू लिखता है। इस चैप्टर में तो इस साल आलू किसानों के लिए निराशाजनक कहानी लिखी नजर आ रही है, क्योंकि इसमें शुरुआती रुख ही पहली तिमाही भर चलता है। इस अवधि में अगर शुरुआत में अच्छे भाव खुलते हैं तो तो आगे भी भाव बढ़ने की ओर अग्रसर रहते हैं, अन्यथा अप्रैल के भाव जुलाई तक नहीं आते।

आलू निकासी का दूसरा चरण अगस्त-सितंबर का होता है। इस चरण में यूपी के आलू का भाव कर्नाटक और दक्षिण भारत की फसलों और जुलाई के भावों से प्रभावित होता है। अक्टूबर-दिसंबर में आलू निकासी के तीसरे दौर का लेखा-जोखा सितंबर के दूसरे पखवाड़े की बारिश तय करती है। आलू कितना भी कम पैदा हुआ हो, अगर सितम्बर-अक्तूबर में बारिश न हो तो फिर आलू के भाव ढलान पर चल देते हैं। इस दौरान होने वाली बारिश आलू के भावों को आसमान पर पहुंचा देती है।

20 अप्रैल तक आलू का डंप तक खत्म नहीं हुआ

इस साल देश भर में 10-12% अधिक आलू का उत्पादन हुआ है। उम्मीद थी कि अप्रैल से ही मांग बढ़ेगी और स्टोरेज से निकासी तेज़ होगी, लेकिन 20 अप्रैल तक आलू का डंप ही खत्म नहीं हो पाया है। अप्रैल में आलू की निकासी तो शुरू हुई, लेकिन बहुत मरे हुए भावों के साथ। इसके साथ ही इस साल सब्जियों की कीमतें भी सामान्य से बेहद कम चल रही हैं, जो बीते साल इस साल के मुकाबले महंगी थीं।

लम्बा इंतजार करना पड़ सकता है किसानों को

आलू किसानों को अब लम्बा इंतजार करना पड़ सकता है और प्राकृतिक चमत्कार की उम्मीद रखनी होगी। जब तक मौसम का कोई बड़ा बदलाव नहीं आता, भावों में उछाल मुश्किल लग रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार आलू के इच्छित भाव के लिए इंतजार लंबा खिंच सकता है।

SP_Singh AURGURU Editor