आप नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन गिरफ्तार, दिल्ली जल बोर्ड एसटीपी टेंडर मामले में एसीबी की बड़ी कार्रवाई; आईएएस उदित प्रकाश राय समेत चार अन्य भी पकड़े गए

नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सत्येंद्र कुमार जैन को भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जुड़े टेंडर में कथित अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया है। जैन के अलावा पांच अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद सभी आरोपियों से मामले में कथित भ्रष्टाचार और टेंडर प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों को लेकर पूछताछ की जा रही है।

Aug 18, 2026 - 21:27
 0
आप नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन गिरफ्तार, दिल्ली जल बोर्ड एसटीपी टेंडर मामले में एसीबी की बड़ी कार्रवाई; आईएएस उदित प्रकाश राय समेत चार अन्य भी पकड़े गए

गिरफ्तार आरोपियों में सत्येंद्र जैन के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और आईएएस अधिकारी उदित प्रकाश राय, तत्कालीन संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव, यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राज कुमार कुर्रा, एएन एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर नागेंद्र यादव और सृजनहार के प्रोपराइटर पंकज वर्मा शामिल हैं।

टेंडर की शर्तों में बदलाव का आरोप

मामला दिल्ली जल बोर्ड के विभिन्न सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों के उन्नयन और क्षमता बढ़ाने से संबंधित टेंडरों का है। जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में ऐसी तकनीकी शर्तें शामिल की गईं, जिनसे एक विशेष तकनीक और उससे जुड़ी कंपनी को फायदा पहुंचाया जा सके।

जांच में टेंडर की शर्तों को सीमित करने, आवश्यक पायलट अध्ययन नहीं कराने और प्रक्रिया में बदलाव किए जाने समेत कई बिंदुओं की पड़ताल की गई। एजेंसी का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में कुछ निजी कंपनियों, बिचौलियों और संबंधित अधिकारियों के बीच कथित सांठगांठ रही।

अधिकारियों और निजी पक्षों के बीच लेनदेन की जांच

जांच एजेंसी के मुताबिक मामले में तत्कालीन दिल्ली जल बोर्ड सीईओ उदित प्रकाश राय और उनके रिश्तेदारों से जुड़े बैंक खातों में एएन एंटरप्राइजेज के माध्यम से करीब 1.52 करोड़ रुपये पहुंचने की जांच की गई है। एजेंसी का आरोप है कि इस धनराशि का इस्तेमाल संपत्ति खरीदने में किया गया।

हालांकि, ये सभी जांच एजेंसी के आरोप हैं और मामले में आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।

1,546 करोड़ से बढ़कर करीब 1,943 करोड़ के हुए टेंडर

जांच के केंद्र में दिल्ली जल बोर्ड के मौजूदा एसटीपी के उन्नयन और क्षमता विस्तार से संबंधित चार टेंडर हैं। इनकी शुरुआती अनुमानित लागत करीब 1,546 करोड़ रुपये बताई गई थी। बाद में इसकी लागत बढ़कर करीब 1,943 करोड़ रुपये होने का आरोप है।

इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय भी अलग से जांच कर चुका है। ईडी ने दिसंबर 2025 में सत्येंद्र जैन समेत 14 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। ईडी के मुताबिक मामले में कथित अपराध से संबंधित धनराशि करीब 17.70 करोड़ रुपये थी। जांच एजेंसी ने टेंडर की शर्तों में कथित हेरफेर और करीब 6.73 करोड़ रुपये के कथित अवैध कमीशन का भी आरोप लगाया था।

एसीबी की प्राथमिकी के बाद ईडी की भी जांच

दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े इस मामले में पहले एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। इसके आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने भी धन शोधन से संबंधित पहलुओं की जांच की। जांच आगे बढ़ने के साथ दोनों एजेंसियों ने अलग-अलग स्तर पर मामले में दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की।

2022 में भी ईडी ने जैन को किया था गिरफ्तार

सत्येंद्र जैन इससे पहले भी प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। मई 2022 में ईडी ने कथित धन शोधन मामले में उन्हें गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद भी तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उन्हें मंत्री पद से नहीं हटाया था। जेल में रहते हुए वह कई महीने तक तक दिल्ली सरकार में मंत्री बने रहे। उनके कई विभाग दूसरे मंत्रियों को सौंपे गए थे। फरवरी 2023 में उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

सत्येंद्र जैन के पास दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य, उद्योग, बिजली, लोक निर्माण विभाग और जेल सहित कई महत्वपूर्ण विभाग रहे थे।

तिहाड़ जेल के वीडियो से भी हुआ था राजनीतिक विवाद

ईडी की गिरफ्तारी के बाद तिहाड़ जेल में रहने के दौरान सत्येंद्र जैन के कुछ वीडियो सामने आए थे। इन वीडियो को लेकर भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक विवाद हुआ था। भाजपा ने जैन को जेल में विशेष सुविधाएं मिलने के आरोप लगाए थे। इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच काफी समय तक आरोप-प्रत्यारोप चलता रहा।

फिलहाल एसटीपी टेंडर मामले में एसीबी की कार्रवाई के बाद जांच आगे बढ़ रही है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगा। केवल गिरफ्तारी के आधार पर किसी आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता।

SP_Singh AURGURU Editor