तीसरा वाटर वर्क्स बनने के बाद आगरा को मिल रहा गंगाजल क्या शहर के लिए पर्याप्त होगा?
आगरा। गंगाजल परियोजना के तहत आगरा को मिलने वाली जलराशि क्या आने वाले दिनों में आगरा की जरूरत के हिसाब से कम पड़ जाएगी। ये सवाल इसलिए उठा है क्योंकि आगरा में यमुना पार क्षेत्र में बनने जा रहे तीसरे वाटर वर्क्स के लिए इसी जलराशि में से 55 एमएलडी पानी दिए जाने की तैयारी है। जल निगम द्वारा आगरा जलापूर्ति पुनर्गठन योजना के तहत ट्रांस यमुना क्षेत्र ही नहीं, एत्मादपुर कस्बे और वहां तक के गांवों को सप्लाई देने की तैयारी की जा रही है।
-55 एमएलडी पानी नये जलकल को दिए जाने की तैयारी, पुराने जलकलों के लिए 91 एमएलडी पानी बचेगा
फिलहाल, सिकंदरा स्थित जलकल परिसर में 144 एमएलडी क्षमता वाला जल शोधन संयंत्र कार्यरत है। यहीं से नगर क्षेत्र के बड़े हिस्से को गंगाजल की आपूर्ति की जा रही है। जब 55 एमएलडी जलराशि ट्रांस यमुना क्षेत्र में बनने वाले नये जलकल को दे दी जाएगी, तब आगरा के दोनों वर्तमान जलकलों के लिए महज 91 एमएलडी गंगाजल ही मिल पाएगा।
सिविल सोसायटी ने जताई गहरी आपत्ति
सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के महासचिव अनिल शर्मा ने भविष्य में आने वाले संकट के लिए अभी से चेताया है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में ही शहर के कई वार्डों में नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। आगरा महानगर का जिस तरह से मथुरा रोड, ग्वालियर रोड, जयपुर रोड और फतेहाबाद रोड की ओर विस्तार हो रहा है, उसे देखते हुए 91 एमएलडी जलराशि साफ तौर पर अपर्याप्त है।
अनिल शर्मा ने जल निगम के चीफ इंजीनियर और गंगाजल प्रोजेक्ट यूनिट के जनरल मैनेजर से आग्रह किया है कि इस कटौती से महानगर की जल आपूर्ति पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह सार्वजनिक किया जाए।
नगर निगम सदन में चर्चा की मांग
श्री शर्मा ने यह भी कहा कि नगर निगम सदन में पार्षदों के समक्ष जल निगम के अधिकारी इस योजना का विस्तृत प्रजेंटेशन दें और स्पष्ट करें कि एत्मादपुर कस्बे के साथ ही तहसील के जिन गांवों को पानी दिया जाना है, उनके लिए अलग जल स्रोत क्यों नहीं खोजा गया।
महानगर पहले से ही जल संकट के कगार पर
वर्तमान में भी शहर के अनेक इलाकों में नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। अभी मिल रहे गंगाजल से यदि 55 एमएलडी नये वाटर वर्क्स को जाएगा तो पानी की कमी और भी गंभीर रूप ले सकती है। यह मुद्दा सिर्फ प्रबंधन का नहीं, बल्कि नागरिक जीवन से जुड़ी एक बुनियादी जरूरत का है। उन्होंने कहा कि यह सही है कि यमुना पार का आबादी क्षेत्र भी शहर का ही हिस्सा है, लेकिन इसके लिए जितने अतिरिक्त पानी की जरूरत पडेगी, उसके इंतजाम के बारे में भी तो अभी से सोचकर चलना चाहिए।