आगरा कॉलेज के छात्रों ने सीखा जीवन बचाने का हुनर, सीपीआर प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने सिखाई आपातकालीन तकनीक

आगरा। अचानक हृदयाघात जैसी आपात स्थिति में किसी की जान बचाने के लिए समय पर सही कदम उठाना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से एनसीसी आर्मी विंग आगरा कॉलेज और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP), आगरा शाखा के संयुक्त तत्वावधान में आगरा कॉलेज के ऑडिटोरियम में छात्रों के लिए कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) पर एक दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन बचाने वाली तकनीकों से प्रशिक्षित किया गया, ताकि वे किसी भी आपात स्थिति में प्राथमिक सहायता देकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

Jul 23, 2026 - 19:56
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आगरा कॉलेज के छात्रों ने सीखा जीवन बचाने का हुनर, सीपीआर प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने सिखाई आपातकालीन तकनीक
आगरा कॊलेज एनसीसी विंग के कैडेट गुरुवार को कॊलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में सीपीआर प्रशिक्षण लेते हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को आकस्मिक हृदयाघात (कार्डियक अरेस्ट) के समय सही सीपीआर तकनीक का प्रयोग करने के लिए शारीरिक कौशल और आत्मविश्वास प्रदान करना था।

मुख्य चिकित्सा प्रशिक्षक एवं प्रतिष्ठित बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील अग्रवाल ने विद्यार्थियों को सीपीआर का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय 90 मिनट के व्यावहारिक सत्र में लाइव प्रदर्शन कर छात्रों से अभ्यास कराया। विशेष सीपीआर प्रशिक्षण पुतलों (मिनीकिन्स) पर विद्यार्थियों को छाती दबाने (चेस्ट कंप्रेशन) और कृत्रिम सांस देने की तकनीक का अभ्यास कराया गया, जिससे वे वास्तविक आपात स्थिति में सही तरीके से मदद कर सकें।

आईएपी सीपीआर की स्टेट कॉर्डिनेटर डॉ. सोनिया भट्ट ने सार्वजनिक स्तर पर सीपीआर प्रशिक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत में अभी भी 2 प्रतिशत से कम लोग सीपीआर करना जानते हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 80 से 82 प्रतिशत हृदयाघात अस्पताल के बाहर होते हैं, ऐसे में आसपास मौजूद सामान्य नागरिक ही पहले मददगार साबित होते हैं।

डॉ. सोनिया भट्ट ने बताया कि हृदयाघात के बाद बिना सहायता के गुजरने वाला प्रत्येक मिनट पीड़ित के बचने की संभावना को 7 से 10 प्रतिशत तक कम कर देता है और मस्तिष्क को स्थायी नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि एम्बुलेंस के पहुंचने में लगने वाले समय के दौरान आसपास मौजूद लोगों द्वारा दिया गया तत्काल सीपीआर जीवन बचाने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होता है। जिन देशों में सार्वजनिक सीपीआर प्रशिक्षण व्यापक है, वहां तत्काल सहायता से 40 से 60 प्रतिशत तक जानें बचाई जा रही हैं।

कार्यक्रम में एनसीसी आर्मी विंग के कंपनी कमांडर कैप्टन अमित अग्रवाल ने कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत की। एयर विंग के फ्लाइंग ऑफिसर नीतिश शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि डॉ. सत्यदेव शर्मा ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. वीके सिंह ने की। इस अवसर पर बायोटेक विभाग अध्यक्ष डॉ. संध्या अग्रवाल, डॉ. दिव्या अग्रवाल, डॉ. नीता रानी और डॉ. रवि शंकर सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। एनएसएस प्रभारी डॉ. आनंद प्रताप सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में प्रो. आरके श्रीवास्तव, प्रो. संचिता सिंह, प्रो. कल्पना चतुर्वेदी, प्रो. आशीष कुमार, डॉ. रंजीत, डॉ. अश्विनी शर्मा, डॉ. हरेंद्र शर्मा सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे। इस दौरान एनसीसी आर्मी विंग, एयर विंग, बायोटेक्नोलॉजी विभाग और एनएसएस के बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor