वरद वल्लभा महागणपति के जयघोष से गूंजा आगरा, दक्षिण भारतीय वैदिक परंपरा और भव्य पालकी यात्रा ने मोहा मन
आगरा। आगरा-फिरोजाबाद रोड स्थित श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर दो दिवसीय चतुर्थ वार्षिक उत्सव के दौरान श्रद्धा, भक्ति और दक्षिण भारतीय वैदिक परंपराओं के अद्भुत संगम का साक्षी बना। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, भजन, शंखनाद और गणपति बप्पा मोरया के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। भव्य पालकी यात्रा, विशेष अभिषेक और महाआरती ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
दक्षिण भारतीय वास्तुशिल्प शैली में निर्मित यह मंदिर अपनी दिव्य भव्यता और विशाल महागणपति प्रतिमा के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ऊंचे गोपुरम, नक्काशीदार स्तंभ और कलात्मक स्थापत्य मंदिर को दक्षिण भारत के प्रसिद्ध देवालयों जैसी आभा प्रदान करते हैं।
आयोजक हरिमोहन गर्ग (एनआरएल ग्रुप) ने बताया कि दो दिवसीय उत्सव की शुरुआत बुधवार को विशेष पूजन-अर्चन के साथ हुई। प्रथम दिन शुद्धिकरण, पुष्पार्चन, कलश स्थापना और गणपति हवन सम्पन्न कराया गया। संध्या बेला में वैदिक विधि-विधान से गणपति सहस्त्रनाम हवन, लक्ष्मी गणपति हवन, मृत्युंजय हवन तथा धनवंतरी हवन आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और मंगलकामना के लिए आहुतियां अर्पित कीं।
गुरुवार को उत्सव का दूसरा दिन अत्यंत श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ प्रारंभ हुआ। प्रातःकाल कलश पूजन, कुम्भाभिषेक और भगवान गणपति का विशेष अभिषेक सम्पन्न कराया गया। कांचीपुरम से आए भरनीधरन आर. के सानिध्य में यज्ञाचार्य सबरी राजन द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार किए गए, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।
सायंकाल मंदिर प्रांगण में भगवान गणपति की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। पुष्पों और रोशनी से सुसज्जित पालकी में विराजमान महागणपति के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यात्रा के दौरान ढोल-नगाड़ों, भजनों और जयघोषों ने पूरे परिसर को उत्सवमय बना दिया।
इसके बाद दक्षिण एवं उत्तर भारतीय परंपराओं के समन्वय से विशेष महाआरती आयोजित की गई। दीपों की जगमगाहट, शंखनाद और वैदिक मंत्रों के बीच सम्पन्न हुई महाआरती ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। आरती के पश्चात प्रसादी वितरण किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित केंद्रीय मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता का प्रेरणास्रोत भी है। यहां दक्षिण और उत्तर भारतीय परंपराओं का सुंदर संगम भारतीय सांस्कृतिक एकता को सशक्त करता है।
यतेन्द्र कुमार गर्ग (एनआरएल ग्रुप) ने कहा कि यह मंदिर गणपति भक्ति के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक परंपराओं के संगम का प्रतीक बन चुका है। प्रतिवर्ष आयोजित यह उत्सव श्रद्धालुओं को एक सूत्र में जोड़ते हुए धर्म, संस्कृति और सेवा का संदेश देता है।
इस अवसर पर विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, श्री रामलीला कमेटी के महामंत्री राजीव अग्रवाल, मुकेश जैन, नीरज गर्ग, सिद्धांत गर्ग, दीपक गर्ग, साधना गर्ग, रिद्धि, अदिति, चन्दर सचदेवा, सीए राकेश अग्रवाल, सुनील बंसल, अर्चना अग्रवाल, संजय बंसल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।